कोरोनाकाल में पुरानी कारों की मांग तेजी से बढी है। आलम यह है कि बाजार में पुरानी कारों की सप्लाई भी कम हो गई है। लोग भी नई कारों की खरीदने की बजाय पुरानी कारों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। लॉकडाउन के चलते नई कारों की बिक्री प्रभावित हुई तो इसका सीधा असर यूज्ड कार मार्केट पर भी पड़ा है। 2014 में जहां एक नई कार पर एक पुरानी कार की बिक्री होती थी, वहीं अब कोरोना काल में पांच नई कारों पर आठ पुरानी कारों की बिक्री हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2020 में 42 लाख पुरानी कारों की बिक्री हुई थी, जो 2021 में बढ़कर 44 लाख तक पहुंच गई। वहीं सप्लाई में कमी की वजह से इस बाजार में अभी थोड़े वक्त के लिए ग्रोथ रुक गई है, उम्मीद है कि जल्द ही यह बाजार फिर से रफ्तार पकड़ेगा। ऐसे में अगर आप फर्स्ट टाइम बायर हैं तो नई कार लेने की बजाय पुरानी कार खरीदना ज्यादा बेहतर है। क्योंकि पुरानी कार न केवल आपको सस्ती पड़ती है बल्कि आप पर लोन का बोझ भी कम पड़ता है। आइए जानते हैं आपको क्यों खरीदनी चाहिए सेकंड हैंड कार...
कोरोना काल में पुरानी कारों का क्रेज: आखिर क्यों खरीदें सेकंड हैंड कार, पैसे की बचत के साथ और भी हैं कई फायदे
सस्ती पड़ती है
पुरानी कार खरीदना का सबसे पहला फायदा यह है कि यह सस्ती पड़ती है। पुरानी कारों पर आपको अच्छी डील मिल जाती है। अगर आप नई मारुति स्विफ्ट जैसे कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपको कम से कम 5.49 लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे, लेकिन पुरानी स्विफ्ट आपको आधे से कम दाम में मिल जाएगी। वहीं आपको बजट ज्यादा है तो आप सुजुकी SX4 या किजाशी जैसे कार भी बेहद सस्ते में खरीद सकते हैं। कार्स24 के आंकड़ों के मुताबिक उसके 50 फीसदी से ज्यादा खरीदर फर्स्ट टाइम बायर होते हैं। मारुति ट्रू वेल्यू पर भी बिकने वाली 65 फीसदी कारें 2 लाख रुपये तक की कीमत वाली होती हैं।
नई कार को टक्कर
अपने पसंद की कार खरीदने जब आप शोरूम हो जाते हैं तो आपको उसके लिए लाखों रुपये चुकाने पड़ते हैं, लेकिन अगर वह मॉडल बाजार में ज्यादा पॉपुलर नहीं है तो हो सकता है कि बेहद कम दामों में आप उस कार के मालिक बन सकते हैं। साथ ही यूज्ड कार मार्केट में आपको ऐसी भी कारें मिल सकती हैं, जो साफ-सुथरी होती हैं यानी कम इस्तेमाल वाली होती हैं, और उनका मेंटेनेंस भी अच्छे से किया होता है। नई कार जब खरीदते हैं तो रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस जैसे खर्चे भी झेलने पड़ते हैं, लेकिन यूज्ड कार ऑनर्स को ये सब खर्च करने की जरूरत नहीं होती है।
घटती कीमत का उठाएं फायदा
नई कारों की कीमत तेजी से घटती है। पहले साल में कार खरीदते ही उसकी डेप्रीसिएशन वेल्यू 20 फीसदी की दर से गिरती है। दो-तीन साल में ही कीमत 50 फीसदी से नीचे आ जाती हैं। कई लग्जरी कारें ऐसी होती हैं कि जिनकी शुरुआती सालों में कीमतें तेजी से गिरती हैं। लेकिन यूज्ड कारों के मामले में ऐसा बहुत ज्यादा नहीं है। क्योंकि उनकी कीमत पहले ही गिर चुकी होती है, अगर आप पुरानी कार खरीदते हैं और दो-तीन साल बाद चला कर बेचते हैं तो आपको ज्यादा नुकसान नहीं होगा।
बेफिक्र हो कर चलाएं
मारुति, ह्यूंदै कंपनियों की यूज्ड कारों की काफी मांग रहती है। इसकी वजह है कि इनका सर्विस नेटवर्क हर जगह मौजूद है और कोई भी मैकेनिक आसानी से ठीक कर देता है। इसके अलावा इनके पार्ट्स भी बाजार में आसानी से मिल जाते हैं। नई कार खरीदते हैं तो स्क्रेच आदि लगने का डर रहता है, लेकिन कार सस्ती है तो डेंट या स्क्रेच लगने का डर नहीं होता। आप बाहर से कोई अपनी पसंद की एसेसरीज या सीएनजी लगाना चाहते हैं, तो वारंटी खोने का डर नहीं रहता। बेफिक्र हो कर लगवा सकते हैं। जबकि नई कार में यह संभव नहीं है। बाहर किसी भी मैकेनिक से ठीक करवा सकते हैं बार-बार शोरूम जाकर पैसे खर्च करने का कोई लॉजिक नहीं बनता।