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Road Accidents: ओवरस्पीड भारत में मौत की बड़ी वजह, पिछले साल सभी सड़क दुर्घटनाओं में ज्यादा लोगों की ली जान
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 30 Dec 2022 02:57 PM IST
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ऋषभ पंत कार एक्सिडेंट
- फोटो : अमर उजाला
वाहन की Overspeed (ओवरस्पीड) यानी तेज रफ्तार भारतीय सड़कों पर जान जाने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा हाल ही में जारी की गई सड़क दुर्घटना रिपोर्ट से पता चलता है कि 2021 में मरने वाले पीड़ितों में से दो-तिहाई से ज्यादा वाहन ओवरस्पीडिंग (ज्यादा स्पीड) के मामलों में शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल लगभग तीन लाख सड़क दुर्घटनाएं तेज रफ्तार के कारण हुईं, जिनमें 1.07 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई। इससे पिछले वर्ष दर्ज की गई 91,239 मौतों की तुलना में मृत्यु दर बहुत ज्यादा है।
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कार हादसा
- फोटो : अमर उजाला
70 फीसदी मौतों का कारण ओवरस्पीडिंग
मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की श्रेणी के तहत 2021 में 70 प्रतिशत से ज्यादा मौतों के लिए ओवरस्पीडिंग एक प्रमुख कारण है। शराब पीकर गाड़ी चलाना और गलत साइड से गाड़ी चलाना पिछले साल दुर्घटनाओं और मौतों का दूसरा और तीसरा सबसे बड़ा कारण था। पिछले साल देशभर में सड़क हादसों में कुल मिलाकर 1.53 लाख लोगों की जान गई। मौतों का यह आंकड़ा साल 2020 से क ज्यादा है, जब 3,66,138 सड़क दुर्घटनाओं में 1,31,714 मौतें दर्ज की गई थीं।
मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की श्रेणी के तहत 2021 में 70 प्रतिशत से ज्यादा मौतों के लिए ओवरस्पीडिंग एक प्रमुख कारण है। शराब पीकर गाड़ी चलाना और गलत साइड से गाड़ी चलाना पिछले साल दुर्घटनाओं और मौतों का दूसरा और तीसरा सबसे बड़ा कारण था। पिछले साल देशभर में सड़क हादसों में कुल मिलाकर 1.53 लाख लोगों की जान गई। मौतों का यह आंकड़ा साल 2020 से क ज्यादा है, जब 3,66,138 सड़क दुर्घटनाओं में 1,31,714 मौतें दर्ज की गई थीं।
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सड़क हादसा
- फोटो : अमर उजाला
यह लगातार तीसरा साल है जब ओवरस्पीडिंग भारत में सभी सड़क दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण रही है। 2019 में, कोविड प्रतिबंधों के लागू होने से एक साल पहले, देश में हुई 4.49 लाख सड़क दुर्घटनाओं में से लगभग 71 प्रतिशत ओवरस्पीडिंग के कारण हुई थीं।
कार दुर्घटना
- फोटो : अमर उजाला
पिछले साल सड़क हादसों में सबसे ज्यादा शिकार 18 साल से 45 साल के बीच के युवा हुए हैं। मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 के दौरान 18 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के युवा वयस्कों की संख्या 67.6 प्रतिशत थी, जबकि 18 से 60 वर्ष के कामकाजी आयु वर्ग के लोग कुल सड़क दुर्घटनाओं में 84.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं।
तमिलनाडु में 2021 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। जबकि सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा थी।
तमिलनाडु में 2021 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। जबकि सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा थी।
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सायरस मिस्त्री की दुर्घटनाग्रस्त कार
- फोटो : सोशल मीडिया
2021 में हर घंटे 18 लोगों ने गंवाई जान
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020 की तुलना में 2021 में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में औसतन 12.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसी तरह, सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतों और घायलों की संख्या में क्रमशः 16.9 प्रतिशत और 10.39 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है, ये आंकड़े देश में औसतन हर दिन 1130 दुर्घटनाएं और 422 मौतें या हर घंटे 47 दुर्घटनाएं और 18 मौतें होती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020 की तुलना में 2021 में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में औसतन 12.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसी तरह, सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतों और घायलों की संख्या में क्रमशः 16.9 प्रतिशत और 10.39 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है, ये आंकड़े देश में औसतन हर दिन 1130 दुर्घटनाएं और 422 मौतें या हर घंटे 47 दुर्घटनाएं और 18 मौतें होती हैं।