आज सड़कों पर दौड़ती किसी भी कार, बाइक, बस या ट्रक को देखिए, आपको एक चीज सब में एक जैसी दिखेगी। वह है काले रंग के टायर। भले ही आज देखकर ऐसा लगे कि टायर हमेशा से ही काले रंग के होते आए हैं, लेकिन असल में ऐसा बिल्कुल नहीं है। वाहन उद्योग के शुरुआती दौर में टायरों का रंग सफेद या हल्का क्रीम होता था।
Tyre: क्या आपने कभी सोचा है गाड़ियों के टायर काले ही क्यों होते हैं? जानें इसके पीछे का दिलचस्प वैज्ञानिक कारण
अगर आपने कभी गौर किया हो तो सड़क पर चलने वाली लगभग हर कार, बाइक, बस या ट्रक में एक चीज समान होती है- काले रंग के टायर। पहली नजर में यह सिर्फ डिजाइन का हिस्सा लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कारण छिपा है।
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शुरुआती दौर में वाहनों के टायर सफेद क्यों हुआ करते थे?
गाड़ियों के शुरुआती इतिहास पर नजर डालें तो टायरों का रंग और उनका टिकाऊपन आज से बिल्कुल अलग था:
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प्राकृतिक रबर का इस्तेमाल:
शुरुआती वाहनों के टायर मुख्य रूप से प्राकृतिक रबर से बनाए जाते थे। प्राकृतिक रबर का रंग स्वाभाविक रूप से दूधिया सफेद या हल्का क्रीम होता है। -
कोई मिलावट या मजबूती देने वाले तत्व नहीं:
शुरुआती दौर में रबर में किसी भी प्रकार का रंग या उसे मजबूती देने वाला पदार्थ नहीं मिलाया जाता था। इसलिए टायरों का मूल रंग सफेद ही रहता था। -
जल्दी घिस जाना और कम टिकाऊपन:
ये सफेद टायर बहुत जल्दी घिस जाते थे। भारी वजन उठाने, उबड़-खाबड़ सड़कों पर चलने या लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए ये पर्याप्त मजबूत नहीं थे। जिसके कारण ड्राइवरों को इन्हें बहुत जल्दी-जल्दी बदलना पड़ता था।
किस चीज ने टायरों की दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया?
टायर के प्रदर्शन और उसकी मजबूती को बेहतर बनाने के लिए निर्माताओं ने रबर के मिश्रण में 'कार्बन ब्लैक' नाम के एक बारीक कार्बन-आधारित सामग्री मिलाना शुरू किया। इस एक छोटे से बदलाव ने पूरी टायर इंडस्ट्री को बदलकर रख दिया:
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रबर की मजबूती में जबरदस्त इजाफा:
कार्बन ब्लैक मिलाने से रबर अत्यधिक मजबूत हो गया। -
टूट-फूट और घिसावट से सुरक्षा:
इससे टायर अधिक टिकाऊ बने और रोजमर्रा की टूट-फूट के प्रति ज्यादा प्रतिरोधी हो गए। -
भारी वजन और खराब सड़कों के अनुकूल:
कार्बन ब्लैक के इस्तेमाल से टायर भारी लोड उठाने और उबड़-खाबड़ सड़कों पर लंबा टिकने के काबिल बन गए। -
स्थायी रूप से काला रंग:
रबर के कंपाउंड में कार्बन ब्लैक मिलाते ही टायरों का रंग हमेशा के लिए काला हो गया।
क्या काले टायर गर्मी और धूप से बेहतर सुरक्षा प्रदान करते हैं?
वाहनों के चलने के दौरान पैदा होने वाली गर्मी से निपटने में कार्बन ब्लैक बहुत बड़ी भूमिका निभाता है:
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गर्मी का प्रतिरोध:
जब गाड़ियां सड़कों पर चलती हैं, तो टायर और सड़क के बीच होने वाले घर्षण से काफी मात्रा में गर्मी पैदा होती है। अत्यधिक गर्मी रबर को कमजोर कर सकती है और टायर की उम्र कम कर देती है। -
हीट रेजिस्टेंस में सुधार:
कार्बन ब्लैक टायरों को इस उच्च तापमान का सामना करने में मदद करता है। -
UV किरणों और मौसम से सुरक्षा:
यह रबर को सूर्य की पराबैंगनी (यूवी) किरणों और बदलते मौसम से होने वाले नुकसान से भी बचाता है। जिससे टायर समय के साथ अपनी परफॉर्मेंस बनाए रखते हैं।
आज भी कुछ क्लासिक और विंटेज कारों में सफेद टायर क्यों दिखाई देते हैं?
हालांकि आधुनिक टायर पूरी तरह से काले होते हैं, लेकिन विंटेज और क्लासिक कारों में आपने 'व्हाइटवॉल टायर्स' देखे होंगे:
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सजावटी सफेद पट्टी:
इन टायरों की बाहरी साइडवॉल पर एक सजावटी सफेद पट्टी होती है। -
सड़क को छूने वाला हिस्सा काला:
इन टायरों का ट्रेड, यानी सड़क के संपर्क में आने वाला हिस्सा, काला ही रहता है। क्योंकि मजबूती और टिकाऊपन के लिए उसमें कार्बन ब्लैक मिलाया जाता है। -
विंटेज लुक और स्टाइल:
आज के समय में इन 'व्हाइटवॉल टायरों' का उपयोग किसी कार्यात्मक या तकनीकी कारण के बजाय केवल रेट्रो स्टाइलिंग और पुराने लुक के लिए किया जाता है।
टायरों का काला रंग केवल दिखावा नहीं, सुरक्षा का आधार है!
आधुनिक टायरों का काला रंग केवल कोई डिजाइन या स्टाइल स्टेटमेंट नहीं है। यह कार्बन ब्लैक के उपयोग से आता है, जो टायरों के टिकाऊपन, गर्मी के प्रतिरोध, रोड ग्रिप (पकड़) और समग्र सुरक्षा को बढ़ाता है। इन्हीं फायदों की वजह से आज दुनिया भर में चलने वाले लगभग हर प्रकार के वाहन के लिए काले रंग के टायर ही वैश्विक मानक बन चुके हैं।