हाल ही में बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) एक अनोखे विवाद को लेकर सुर्खियों में आ गया। बीएमसी द्वारा अपने शीर्ष अधिकारियों और नेताओं के लिए नई महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन (Mahindra Scorpio-N) एसयूवी का काफिला खरीदे जाने के 6 महीने से भी कम समय के भीतर, इन्हें बदलकर अधिक महंगी टोयोटा इनोवा क्रिस्टा (Toyota Innova Crysta) खरीदने का प्रस्ताव पेश किया गया। अधिकारियों की आधिकारिक शिकायत क्या थी? उनका कहना था कि स्कॉर्पियो-एन में सफर के दौरान "बहुत झटके" लगते हैं। जिससे पिछली सीट पर बैठने वाले अधिकारियों को पीठ में गंभीर दर्द की समस्या हो रही है।
BMC: Scorpio-N से पीठ दर्द और Innova Crysta की मांग क्यों? जानिए बीएमसी विवाद के पीछे की वाहन इंजीनियरिंग!
हाल ही में बृहन्मुंबई महानगरपालिका एक दिलचस्प विवाद को लेकर चर्चा में आ गई। महज छह महीने पहले अपने वरिष्ठ अधिकारियों के लिए खरीदी गई नई Mahindra Scorpio-N एसयूवी को ड्राइविंग के दौरान ज्यादा झटके लगने की शिकायत के बाद, बदलकर Toyota Innova Crysta लाने का प्रस्ताव सामने आया। पहली नजर में यह विवाद सिर्फ एक वाहन बदलने का मामला लग सकता है। लेकिन ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के नजरिए से देखा जाए तो रिपोर्ट में बताया गया है कि अधिकारियों की यह शिकायत तकनीकी आधार पर पूरी तरह समझी जा सकती है। जानें पूरी डिटेल्स।
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सेंटर ऑफ ग्रेविटी और "हेड टॉस" (शारीरिक हलचल) का क्या अंतर है?
दोनों गाड़ियों की बुनियादी बनावट और डीएनए (DNA) में सबसे बड़ा अंतर यही है:
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स्कॉर्पियो-एन (Scorpio-N):
यह एक ठेठ और पावरफुल स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (SUV) है। इसे पत्थरों-चट्टानों को आसानी से पार करने के लिए ऊंचे ग्राउंड क्लीयरेंस, सड़क पर दमदार मौजूदगी के लिए ऊंची छत और आक्रामक रुख के साथ डिजाइन किया गया है। -
सेंटर ऑफ ग्रेविटी का प्रभाव:
जमीन से काफी ऊंची होने के कारण स्कॉर्पियो-एन का 'सेंटर ऑफ ग्रेविटी' (गुरुत्वाकर्षण केंद्र) काफी ऊपर स्थित होता है। जब यह एसयूवी किसी खड्डे से गुजरती है या तीखे मोड़ लेती है, तो इस ऊंचे सेंटर ऑफ ग्रेविटी के कारण गाड़ी में बहुत अधिक साइड-टू-साइड हलचल होती है। जिसे 'बॉडी रोल' या 'हेड टॉस' कहा जाता है। पिछली सीट पर बैठे यात्री को निचली गाड़ियों की तुलना में काफी झटके के साथ एक तरफ से दूसरी तरफ हिलना पड़ता है। -
इनोवा क्रिस्टा (Innova Crysta):
इसके विपरीत, इनोवा क्रिस्टा एक मल्टी-पर्पज व्हीकल (MPV) है। हालांकि, यह भी मजबूत लैडर-फ्रेम चेसिस पर ही बनी है, लेकिन इसका बॉडी शेल जमीन के काफी करीब यानी नीचे बैठता है। -
निचले सेंटर ऑफ ग्रेविटी का फायदा:
इसका सेंटर ऑफ ग्रेविटी नीचे होने के कारण साइड-टू-साइड हिलने-डुलने की समस्या बेहद कम हो जाती है। जिससे पिछली सीट पर बैठा यात्री बिल्कुल स्थिर और आरामदायक स्थिति में बना रहता है।
दोनों गाड़ियों का सस्पेंशन ट्यूनिंग एक-दूसरे से अलग कैसे है?
सस्पेंशन का सेटअप हर स्थिति के लिए एक जैसा नहीं हो सकता। यह हमेशा जरूरतों के हिसाब से किया गया एक समझौता होता है:
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चट्टानों और ऑफ-रोडिंग के लिए स्कॉर्पियो-एन:
महिंद्रा ने स्कॉर्पियो-एन के सस्पेंशन (जिसमें एडवांस्ड वॉट्स लिंकेज शामिल है) को अत्यधिक खराब रास्तों और ऑफ-रोडिंग को संभालने के लिए ट्यून किया है। इसे इतना सख्त रखा गया है ताकि किसी जंप से उतरते समय या ऑफ-रोड ट्रेल पर चलते समय भारी एसयूवी का निचला हिस्सा जमीन से न टकराए।-
नुकसान:
शहर के भीतर कम स्पीड पर चलते समय यही सख्त सस्पेंशन सड़कों की मामूली कमियों, दरारों और एक्सपेंशन जॉइंट्स के ऊपर "झटकेदार" अहसास कराता है। इसका सस्पेंशन बड़े झटकों को सोखने के लिए बना है। इसलिए छोटे-मोटे खड्डों का कंपन सीधा केबिन तक पहुंच जाता है।
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स्पीड ब्रेकर्स और गड्ढों के लिए इनोवा क्रिस्टा:
टोयोटा के इंजीनियरों को इनोवा क्रिस्टा बनाते समय सिर्फ एक ही मुख्य लक्ष्य दिया गया था- 'यात्रियों का आराम'। इनोवा का सस्पेंशन कम स्पीड पर बेहद लचीला और सॉफ्ट रहने के लिए जाना जाता है। इसे शहर के स्पीड ब्रेकर्स और मुंबई के मशहूर गड्ढों को हल्की कोमलता के साथ सोखने के लिए डिजाइन किया गया है। जिससे सड़क की कठोरता पूरी तरह से केबिन के बाहर ही रुक जाती है।
सवारी की बैठने की बनावट में क्या अंतर है?
गाड़ी में बैठने की मुद्रा और सीटों की बनावट का रीढ़ की हड्डी पर सीधा असर पड़ता है:
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स्कॉर्पियो-एन की सीटिंग पोजीशन:
बीएमसी की स्कॉर्पियो-एन में स्टैंडर्ड रियर बेंच सीट लगी है। स्कॉर्पियो-एन ड्राइवर और फ्रंट-रो यात्रियों के लिए उत्कृष्ट आराम प्रदान करती है। लेकिन ऊंची एसयूवी की पिछली बेंच सीट पर बैठते समय आपके घुटने हल्के ऊपर उठे रहते हैं। लंबी यात्रा या रोजाना के लंबे सफर में यह मुद्रा रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से पर दबाव डालती है। -
इनोवा क्रिस्टा की 'कैप्टन सीट्स':
इनोवा क्रिस्टा अपनी दूसरी पंक्ति की 'कैप्टन सीट्स' के लिए जानी जाती है। ये अलग-अलग सीटें समर्पित आर्मरेस्ट, जांघों के नीचे बेहतरीन सपोर्ट और एक ऐसी झुकी हुई स्थिति प्रदान करती हैं ,जो ऑफिस की आरामदायक कुर्सी की तरह महसूस होती है। इससे पीठ और रीढ़ की थकान काफी हद तक कम हो जाती है। -
चढ़ने और उतरने की आसानी:
चूंकि इनोवा की ऊंचाई जमीन से कम है, इसलिए इसमें चढ़ने-उतरने के लिए शारीरिक रूप से कोई मशक्कत नहीं करनी पड़ती। जो कि वरिष्ठ या उम्रदराज यात्रियों के लिए बेहद जरूरी है।