Countries Without Trees: जहां हम पेड़ों की हरियाली को जीवन का आधार मानते हैं, वहीं दुनिया के कुछ हिस्से ऐसे भी हैं जहां पेड़ लगभग न के बराबर हैं, फिर भी वहां जिंदगी अपनी रफ्तार से चल रही है। यह सुनकर अजीब लग सकता है, लेकिन प्रकृति हर जगह एक जैसी नहीं होती और इसी फर्क ने कुछ देशों को हरियाली से लगभग खाली बना दिया है।
Countries Without Trees: दुनिया के वो देश जहां नहीं होते पेड़, नाम जानकर होगी हैरानी
Country With No Forest: दुनिया के कुछ हिस्से ऐसे भी हैं जहां पेड़ लगभग न के बराबर हैं, फिर भी वहां जिंदगी अपनी रफ्तार से चल रही है। आइए जानते हैं वे कौन से देश हैं जहां पेड़ नहीं हैं।
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पेड़ क्यों नहीं उग पाते?
रेगिस्तानी देशों जैसे कतर और कुवैत में बारिश बहुत कम होती है और मिट्टी रेतीली होती है। ऐसे में पेड़ों की जड़ें मजबूत नहीं हो पातीं और वे ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह पाते। दूसरी ओर, ग्रीनलैंड जैसे ठंडे इलाकों में जमीन के नीचे जमी पर्माफ्रॉस्ट की मोटी परत पौधों की जड़ों को फैलने नहीं देती। अत्यधिक ठंड भी पेड़ों की वृद्धि को रोक देती है।
क्या वहां ऑक्सीजन की कमी होती है?
यह मान लेना गलत होगा कि जहां पेड़ नहीं हैं, वहां ऑक्सीजन भी कम होगी। वैज्ञानिकों के अनुसार, धरती की 50% से 80% ऑक्सीजन समुद्री जीव, जैसे फाइटोप्लांकटन, शैवाल और समुद्री घास से आती है। यही वजह है कि तटीय इलाकों के पास बसे ये देश समुद्र से मिलने वाली ऑक्सीजन से भरपूर हवा प्राप्त करते हैं।
इसके अलावा, वैश्विक पवन प्रणाली भी अहम भूमिका निभाती है। अमेजन के घने जंगलों या दक्षिण-पूर्व एशिया के वन क्षेत्रों में बनने वाली ऑक्सीजन हवा के साथ पूरी दुनिया में फैलती रहती है। यही प्राकृतिक चक्र हर जगह जीवन के लिए जरूरी संतुलन बनाए रखता है।
कैसे बढ़ाई जा रही है हरियाली?
कठिन परिस्थितियों के बावजूद अब तकनीक के सहारे इन देशों में हरियाली बढ़ाने की कोशिशें हो रही हैं। ग्रीनलैंड जैसे ठंडे इलाकों में ग्रीनहाउस के अंदर पौधों की खेती की जाती है, जहां तापमान और नमी को नियंत्रित किया जाता है।
वहीं रेगिस्तानी देशों में ड्रिप इरिगेशन, समुद्री पानी को मीठा बनाने (डिसेलिनेशन) और क्लाइमेट कंट्रोल जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से धीरे-धीरे हरित क्षेत्र बढ़ाए जा रहे हैं। ये प्रयास न केवल पर्यावरण को बेहतर बना रहे हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर खाद्य उत्पादन को भी मजबूत कर रहे हैं।
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