Deepest Point of Ganga River: भारत की जीवनरेखा कही जाने वाली गंगा नदी श्रद्धा का प्रतीक भी मानी जाती है, जो अपने भीतर कई अनसुलझे रहस्य समेटे हुए है। करोड़ों लोगों के विश्वास से जुड़ी यह नदी हर मोड़ पर अपना रूप बदलती है, कहीं शांत, कहीं उफनती और कहीं बेहद गहरी। इसकी गहराई भी एक जैसी नहीं रहती, बल्कि स्थान, मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के साथ बदलती रहती है।
Ganga River: वाराणसी, हरिद्वार या प्रयागराज कहां सबसे ज्यादा गहरी है गंगा? चौंकाने वाले हैं आंकड़े
Interesting Facts About Ganga River: गंगा की गहराई को लेकर हमेशा जिज्ञासा बनी रहती है। आमतौर पर माना जाता है कि उत्तराखंड के ऋषिकेश और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के आसपास यह नदी सबसे अधिक गहरी होती है। आइए जानते हैं कहां है सबसे खतरनाक और गहरा पानी।
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ऋषिकेश के चौंकाने वाले आंकड़े
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, ऋषिकेश के चुनिंदा हिस्सों में गंगा की गहराई करीब 100 फीट यानी लगभग 30 मीटर तक पहुंच जाती है। यह आंकड़ा सुनकर आम लोगों के लिए हैरान होना स्वाभाविक है, क्योंकि सतह से देखने पर नदी इतनी गहरी प्रतीत नहीं होती।
प्रयागराज में गहराई का रिकॉर्ड
वहीं प्रयागराज को भी गंगा की सबसे गहरी जगहों में गिना जाता है। यहां कुछ स्थानों पर नदी की गहराई लगभग 33 मीटर यानी करीब 108 फीट तक बताई जाती है। यह गहराई किसी भी बड़े जलाशय की बराबरी करती है और नदी के विशाल स्वरूप को दर्शाती है।
वाराणसी में क्या है स्थिति?
अगर बात करें वाराणसी की, तो यहां गंगा की औसत गहराई करीब 50 से 60 फीट के बीच मानी जाती है। हालांकि मानसून के समय जलस्तर बढ़ने पर यह गहराई और भी अधिक हो सकती है, जिससे नदी का स्वरूप और भी भयावह हो जाता है।
हरिद्वार में अपेक्षाकृत कम गहराई
हरिद्वार में गंगा मैदानी इलाकों में प्रवेश कर चुकी होती है, इसलिए यहां इसकी गहराई अपेक्षाकृत कम रहती है। आम तौर पर यह 20 से 30 फीट के बीच मानी जाती है, जिससे यहां स्नान और धार्मिक गतिविधियां अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती हैं।
क्यों बदलती रहती है गहराई?
गंगा की गहराई कई कारणों पर निर्भर करती है, जैसे नदी का प्रवाह, तल की बनावट, मौसम और वर्षा। बरसात के मौसम में जलस्तर तेजी से बढ़ता है, जिससे गहराई भी अचानक बढ़ जाती है। यही वजह है कि मानसून के दौरान नदी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है। यह जानकारी विभिन्न रिपोर्ट्स और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है, इसलिए अलग-अलग जगहों पर आंकड़ों में बदलाव संभव है।
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