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ग्लोबल वार्मिंग: अगर अंटार्कटिका का ग्लेशियर पिघलता है, तो विनाशकारी दौर से गुजरेगी पृथ्वी, करोड़ों लोग हो जाएंगे बेघर

फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संकल्प सिंह Updated Fri, 27 Aug 2021 09:59 AM IST
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Global Warming if all the Antarctica glacier would melt millions of people would have to left their house
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

ग्रीन हाउस गैसों के बढ़ते प्रभाव के कारण आज कई प्रमुख ग्लेशियर पिघल रहे हैं। लंबे समय से कई वैश्विक सम्मलेनों के बाद भी उसका कोई सकारात्मक असर जलवायु पर नहीं पड़ा है। हर साल ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार में वृद्धि देखने को मिल रही है। इस कारण वैश्विक तापवृद्धि में तेजी आ रही है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक 2060 तक आते आते ग्लेशियर पिघलने की गति काफी तेज हो जाएगी। इन हालातों में दुनिया को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यही नहीं इंसानी वजूद पर भी एक गहरा संकट मंडराएगा।



इसी सिलसिले में आज हम बात करेंगे क्या होगा जब अंटार्कटिका का सारा ग्लेशियर पिघल कर पानी में मेल्ट हो जाएगा? वैज्ञानिकों की मानें तो ऐसी स्थिति में मानव सभ्यता के लिए एक बहुत बड़ा संकट उभरेगा। इससे करोडों लोगों की जानें जा सकती हैं। यही नहीं पूरे ग्लेशियर के मेल्ट होने पर वैश्विक अर्थव्यवस्था पूर्ण रूप से धराशायी हो सकती है।

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Global Warming if all the Antarctica glacier would melt millions of people would have to left their house
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर पूरी पृथ्वी का ग्लेशियर पिघल जाता है तो इससे तकरीबन 70 मीटर तक सी लेवल ऊपर उठ जाएगा। वहीं Massey university के एप्लाइड मैथमेटिक के प्रोफेसर रॉबर्ट मेकलेचलन का ये तक कहना है कि अंटार्कटिका के ग्लेशियर के पूरी तरह से मेल्ट होने पर पृथ्वी की ग्रेविटेशनल पावर शिफ्ट हो जाएगी। इससे कई जगहों पर भारी नुकसान देखने को मिलेगा। 

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Global Warming if all the Antarctica glacier would melt millions of people would have to left their house
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

पृथ्वी के सभी महाद्वीप आंशिक रूप से पानी के भीतर समा जाएंगे। लंदन, मुंबई, मियामी, सिडनी जैसे शहर पूरी तरह से महासागरों के अंदर आ जाएंगे। इससे करोड़ों की संख्या में लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पर माइग्रेट करना पड़ेगा। अर्थव्यवस्था और रहने लायक जगह पूरी तरह से तहस नहस हो जाएगी। करोड़ों लोग बेघर होंगे। उनके पास रहने और खाने के लिए कुछ भी नहीं बचेगा। ऐसी स्थिति में बड़े स्तर पर आपसी मारकाट की स्थिति भी पनप सकती है।

Global Warming if all the Antarctica glacier would melt millions of people would have to left their house
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

इन ग्लेशियर के भीतर बड़ी मात्रा में खतरनाक वायरस पिछले हजारों सालों से दफन हैं। बर्फ के पिघलने से वे कोरोना से भी ज्यादा भयंकर महामारी देश दुनिया में ला सकते हैं। भारी मात्रा में जैव-विविधता को हानि पहुंचेगी। कई सारी मरीन लाइफ पूरी तरह से नष्ट हो जाएगी। इसके अलावा पृथ्वी पर रहने वाली कई प्राजितायां भी खत्म हो जाएंगी। पृथ्वी पर एक विनाशकारी स्थिति का उद्भव होगा। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कई हाइपोथेसिस का ये तक कहना है कि ग्लेशियर पिघलने का प्रभाव पृथ्वी की घूर्णन गति पर भी पड़ेगा। इससे पृथ्वी के दिन का समय थोड़ा ज्यादा बढ़ जाएगा। पीने लायक 69 प्रतिशत पानी ग्लेशियर के भीतर जमा हुआ है। उसके पिघलने पर ये शुद्ध पानी भी साल्ट वाटर में मिलकर पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। ऐसे में अगर देखा जाए तो अभी स्थिति बदली नहीं है। अभी भी हमारे पास बहुत वक्त है। हमें प्रकृति और विकास के साथ संतुलन बनाना होगा। अन्यथा एक दिन ऐसा भी आ सकता है, जब स्थिति काबू से बाहर हो जाएगी और हमें विनाशकारी दौर से गुजरना पडेगा।

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