Science News: इस साल अप्रैल के महीने में दुनिया के कई देशों को आलोवृष्टि का सामना करना पड़ा था। अप्रैल के आखिरी में अमेरिका के मिसौरी राज्य के स्प्रिंगफील्ड शहर में भयानक ओला पड़ा था। सबसे बड़ी बात यह है कि इनके आकार बेसबॉल के बराबर थे। इन ओलों ने कारों को तोड़ दिया, घरों की छतों और खिड़कियों को नुकसान पहुंचाया है। अब इस तरह की घटनाएं पहले से अधिक हो रही हैं।
Science News: मौसम पर हुए नए शोध में वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी, ओले हो जाएंगे विनाशकारी और मचाएंगे तबाही
Science News: वैज्ञानिकों ने एक नए शोध में चेतावनी दी है कि आने वाले समय में आले विनाशकारी साबित होंगे। उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया के कई इलाकों में बड़े और ज्यादा खतरनाक ओले गिरने की संभावना बढ़ रही है।
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नेचर जर्नल में 27 मई को एक अध्ययन प्रकाशित हुआ है। इसमें पेकिंग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि गर्म होती दुनिया में बड़े ओले ज्यादा आम हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने एक कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए बादलों में ओलों के बनने की प्रक्रिया को समझा है। इस मॉडल में तापमान, नमी और हवाओं जैसे मौसम संबंधी वजहों को शामिल किया गया था।
वैज्ञानिकों के इस अध्ययन से पता चलता है कि जलवायु संकट वर्तमान समय में हमारे आसपास घट रही घटनाओं के रूप में नजर आ रहा है। अगर दुनिया अभी ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम नहीं करती है, तो आने वाले वर्षों में अंगूर के आकार के ओले पड़ने आम हो जाएंगे और उनका विनाशकारी प्रभाव बढ़ेगा।
वैज्ञानिकों ने 2014 से 2021 तक दुनिया भर में हुए 14,000 से अधिक ऐसे तूफानों का डेटा लिया था, जिसमें ओला-वृष्टि हुई थीं। इसके बाद उन्होंने भविष्य के जलवायु परिदृश्य में लागू किया। फिर चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। अगर इतने बड़े ओले गिरते हैं, तो तबाही मचेगी।
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विनाशकारी होंगे ओले
अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता किंगहोंग झांग ने बताया कि छोटे ओले गर्म परत में पूरी तरह से पिघल जाते हैं और बारिश की बूंदें बन जाते हैं। लेकिन बड़े ओले इतनी जल्दी नहीं पिघलते और काफी बड़े टुकड़ों में जमीन पर गिरते हैं। इसके कारण ओले की घटनाएं कम हो सकती हैं, लेकिन जो ओले गिरेंगे वे अधिक बड़े और विनाशकारी होंगे।
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अध्ययन के मुताबिक, भूमध्य रेखा से दूर वाले इलाकों में ज्यादा बड़ा ओला गिरने का खतरा अधिक बढ़ेगा, जबकि ट्रॉपिकल और उसके नीचे के इलाकों में ओले का खतरा कम भी हो सकता है। इसकी मुख्य वजह है ध्रुवीय क्षेत्रों में तापमान अधिक तेजी से बढ़ रहा है। इससे तूफानी बादलों में ऊपर उठने वाली हवाएं और ताकतवर होती हैं। ताकतवर हवाएं ओलों को और ऊपर ले जाती हैं, जिससे उन्हें अधिक समय तक बढ़ने का मौका मिलता है और वो उनका आकार बड़ा हो जाता है।
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क्या होगा भारत पर असर?
भारत समेत दक्षिण एशिया में भी इस बदलाव के प्रभाव को देखा जा सकता है। उत्तर भारत, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे क्षेत्रों में पहले से ही प्री-मॉनसून में आंधी-तूफान और ओले पड़ते है। इन इलाकों में बड़े ओलों की संख्या बढ़ सकती है। जबकि देश के कुछ दक्षिणी और पूर्वी इलाकों में ओले की घटनाएं कम हो सकती हैं, लेकिन कुल मिलाकर मौसम की अनिश्चितता बढ़ेगी।
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फ्रांस के नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च के जलवायु वैज्ञानिक डेविड फरांडा ने बताया कि यह अध्ययन जलवायु परिवर्तन और ओले के खतरे को समझने में अहम मदद करेगा। उनका कहना है कि शोधकर्ताओं ने फिजिक्स के नियमों को जलवायु मॉडल के साथ अच्छी तरह जोड़ा है। उनका कहना है कि अगर तापमान बढ़ता रहा है, 21वीं सदी के आखिरी तक कई इलाकों में बड़े ओले और आधिक आम हो जाएंगे।