Moon: चांद के रहस्यों को जानने के लिए वैज्ञानिक सालों से अध्ययन कर रहे हैं। चांद की उम्र को लेकर काफी लंबे समय से बहस चल रही है। अमेरिका ने सन् 1970 के दशक में चांद मानव मिशन अपोलो 17 को भेजा था। अंतरिक्ष यात्रियों ने इस मिशन के दौरान चांद की सतह से धूल इकट्ठा किए थे, जिससे जानकारी मिली है कि चांद पहले की तुलना में 40 मिलियन साल पुराना है। हालांकि अब एक नए विश्लेषण से चांद की उम्र को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है। अब इससे पता चला है कि पहले के दावे से चांद की उम्र उससे कहीं अधिक है।
Moon: क्या है चांद की असली उम्र? सालों पहले लाई गई चांद की मिट्टी से हुआ चौंकाने वाला खुलासा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जियोकेमिकल पर्सपेक्टिव लेटर्स जर्नल में यह निष्कर्ष प्रकाशित किया गया है। शिकागो में नैचुरल हिस्ट्री के फील्ड म्यूजियम से जुड़े क्यूरेटर रॉबर्ट एक प्रित्जकर का कहना है कि यह क्रिस्टल सबसे पुराने ज्ञात ठोस पदार्थ हैं। इनका निर्माण विशाल प्रभाव के बाद हुआ है। हमें पता है कि यह क्रिस्टल कितने पुराने हैं। ऐसे में वो चांद का समय बताने के लिए एक बड़ी भूमिका के तौर पर काम करते हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे सौर मंडल के शुरुआती दिन बेहद उथल-पुथल भरे थे। इस समय धरती का निर्माण हो रहा था, लेकिन इसका आकार भी बढ़ रहा था। उस समय अंतरिक्ष में अक्सर चट्टानी पिंड की टक्कर होती थी।
Viral Video: दो भूतिया नन को गरबा करते देख सहम गए लोग, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
शोधकर्ताओं के मुताबिक, चार अरब साल से भी पहले उस दौरान, मंगल के आकार की एक वस्तु की धरती से टक्कर हुई थी जिसके बाद एक बड़े चट्टानी टुकड़े से टकराकर चंद्रमा का निर्माण हआ था। हालांकि वैज्ञानिकों को इस अहम घटना की सटीक तारीख बताने में संघर्ष का सामना करना पड़ा।
Asia Smallest Country: ये है एशिया का सबसे छोटा देश, मुस्लिमों के लिए है विशेष कानून, जानिए इसके बारे में...
चांद की सतह का कैसे हुआ निर्माण?
माना जाता है कि मंगल के आकार की वस्तु का धरती से टक्कर हुआ जिसके बाद उत्पन्न ऊर्जा ने चट्टा को पिघला दिया। इसके बाद चांद की सतह का निर्माण हुआ। नेगौनी इंटीग्रेटिव रिसर्च सेंटर के सीनियर डायरेक्टर और शिकागो यूनिवर्सिटी में भूभौतिकी विज्ञान विभाग में प्रोफेसर हेक का कहना है कि जब इस तरह सतह पिघलती थी, तो जिक्रोन क्रिस्टल नहीं बन पाए और जीवित नहीं रह सके।
Ajab-Gajab: इन ग्रहों पर होती है हीरे की बारिश, धरती के हैं बेहद नजदीक, जानिए आखिर क्या है रहस्य