New Study: दुनियाभर में गर्मी लगातार बढ़ रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 अब तक का सबसे गर्म साल रह सकता है। यूरोप की जलवायु एजेंसी ने भी कुछ दिन पहले ठीक यही अनुमान जाहिर किया है। धरती पर बढ़ता तापमान बड़ी तबाही का कारण बन सकता है। एक नए शोध में डराने वाला खुलासा हुआ है। इसमें कहा गया है कि भविष्य में ज्यादा तापमान डायनासोर के बाद धरती पर पहली बार बड़े पैमाने पर इंसानों के विलुप्त होने की वजह बन सकता है।
New Study: नए शोध में डराने वाला दावा, मिल जाएंगे महाद्वीप, आग उगलेगा सूरज और खत्म हो जाएंगे इंसान
New Study: शोध के मुताबिक, पृथ्वी के महाद्वीप आखिरकार एक भूभाग (लैंडमास) में समा जाएंगे। इसे पैंजिया अल्टिमा कहा जाता है। इस सुपरकॉन्टिनेंट से पृथ्वी का जलवायु नाटकीय रूप से बदल सकता है।
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शोध के लिए इस्तेमाल हुआ खास मॉडल
वैज्ञानिकों ने इस शोध में सुपरकंप्यूटर जलवायु मॉडल का इस्तेमाल किया है। टीम ने इसके माध्यम से दिखाया कि किस तरह यह लेआउट इंसानों के लिए एक खराब ग्रह का निर्माण कर सकता है। डॉक्टर फार्न्सवर्थ ने कहा कि नए उभरे सुपरकॉन्टिनेंट से पथ्वी पर इंसानों को तिहरी मार झेलनी पड़ेगी। इसमें महाद्वीपीय प्रभाव, गर्म सूर्य और वायुमंडल में ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड शामिल है। इससे पृथ्वी के ज्यादातर भाग में बेतहाशा गर्मी बढ़ेगी।
शोध से पता चलता है कि इन वजहों से असहनीय तापमान बढ़ेगा। पहले महाद्वीपीय प्रभाव की बात करें, तो जैसे-जैसे भूमि ठंडे महासागरीय प्रभावों से दूर होगी, महाद्वीप पर वैसे-वैसे तापमान बढ़ता जाएगा। दूसरा गर्म सूर्य से मतलब यह है कि सूरज बहुत अधिक ऊर्जा उत्सर्जित करेगा और धरती गर्म होती चली जाएगी। कार्बन डाइऑक्साइड की बात जाए, तो टेक्टोनिक शिफ्ट से ज्वालामुखी गतिविधि अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ेगी, जिससे वायुमंडल में गर्मी बरकरार रहेगी।
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नहीं बचेगा भोजन और पानी
अलेक्जेंडर फार्न्सवर्थ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इस संयोजन से तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से 50 डिग्री सेल्सियस (104 डिग्री से 122 डिग्री फारेनहाइट) के बीच पहुंच जाएगा। इसके साथ ही हो सकता है कि दैनिक चरम सीमा और आर्द्रता भी बढ़ जाए। इंसान और दूसरे जीवों के लिए इस गर्मी को झेलना मुश्किल होगा। शोध से पता चलता है कि पैंजिया अल्टिमा के सिर्फ 8 प्रतिशत से 16 फीसदी स्तनधारियों के लिए उपयुक्त होने की संभावना है। अधिकतर भूभाग को ज्यादा गर्मी और सूखे का सामना करना पड़ेगा। इसके कारण भोजन और पानी की भयावह कमी होगी।
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शोधकर्ता ने इस तरफ ध्यान दिलाया है। हालांकि ऐसी स्थिति लाखों साल बाद उतपन्न होगी। इसके बाद भी शोधकर्ता वर्तमान समय के जलवायु संकट की तरफ ध्यान देने पर जोर दे रहे हैं। शोधकर्ता का कहना है कि वर्तमान के जलवायु संकट को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।