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10-12 साल की होते ही चलाने लगती हैं घर का सारा खर्च, यहां बच्चियां करती हैं देह व्यापार
टीम डिजिटल, अमर उजाला
Updated Thu, 28 Dec 2017 10:35 AM IST
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कभी किसी ऐसे गांव के बारे में सुना है, जहां महज 10-12 साल की बच्चियां देह व्यापार करती हों..? चौंकिए मत! ये काली तस्वीर भारत के ही एक इलाके की है। जी हां... इन नन्ही बच्चियों को खेलने-कूदने की उम्र में ही इस नर्क में धकेल दिया जाता है।
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लेकिन दूसरा चौंकाने वाला सच जानेंगे तो यकीनन आपको तगड़ा झटका लगेगा। दरअसल, इस इलाके की 99 प्रतिशत लड़कियां देह व्यापार में लिप्त हैं। भारत में जहां लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या बेहद कम है, शादी के लिए लड़कियां तक नहीं मिलतीं, वहीं इस इलाके में लड़कियों की संख्या उम्मीद से कहीं ज्यादा है। यहां लड़कियों को कोख में मारा नहीं जाता क्योंकि यही लड़कियां अपने परिवार का पेट पालती हैं, घर को आर्थिक रूप से मजबूती देती हैं।
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यहां की लड़कियां 10 -12 साल की होते ही देह व्यापार में झौंक दी जाती है। सबसे बड़ी बात ये है कि इस धंधे में उनके माता-पिता खुद उन्हें भेजते हैं। घर की बड़ी लड़की की ये जिम्मेदारी होती है कि वो घर को आर्थिक रूप से मदद करें। ये कहानी है मध्य प्रदेश के एक खास इलाके की जो इस चलते बदनाम है। आपकी जानकारी के लिए बता दें इस इलाके में कई गांव ऐसे हैं जो इस व्यापार में लिप्त हैं।
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हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की। जी हां... सोशल मीडिया पर इससे जुड़ा एक वीडियो भी सामने आ चुका है। अब आप इस जगह का नाम सिर्फ अफीम की खेती से जोड़ कर ही नहीं लेंगे बल्कि इससे कहीं ज्यादा नाम उसके इस काम की वजह से लेंगे। यहां मंदसौर में कई गांव में बाछड़ा समुदाय के लोग फैले हुए हैं। उनका मुख्य पेशा अब देह व्यापार ही है। इसलिए आए दिन पुलिस यहां दबिश देती रहती है।
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अब तो यह समुदाय केवल मंदसौर तक ही नहीं बल्कि नीमच, रतलाम जिले के लगभग 75 गांव तक फैल गया है। इनकी आबादी 23 हजार के आसपास बताई जाती है। इनमें से अधिकतर महिलाएं इसी धंधे में हैं। हैरानी की बात तो ये है कि जब भी यहां किसी के घर लड़की होती है तो खुशी में उनके घर ढोल-नगाड़े बजाए जाते हैं। दरअसल, इस जाति में महिलाओं की बड़ी इज्जत होती है।