दालों और खाद्य तेलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सुधारों को लागू किया जा सकता है। जबकि अनाज के अधिक उत्पादन को हतोत्साहित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। आर्थिक सर्वेक्षण में यह सुझाव दिया गया है। वर्तमान में घरेलू कमी को पूरा करने के लिए दालों और खाद्य तेलों का बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है।
आर्थिक सर्वेक्षण: दालों-खाद्य तेलों का उत्पादन बढ़ाने, आयात कम करने के लिए नीतिगत सुधार होंगे लागू; बड़ी बातें
Economic Survey: बजट से एक दिन पहले शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वेक्षण को संसद में पेश किया। इसमें अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और अगले वित्त वर्ष में रफ्तार, महंगाई सहित सभी क्षेत्रों की चुनौतियों और उसके निराकरण पर जोर दिया गया है। 2025-26 में अर्थव्यवस्था की रफ्तार 6.3 से 6.8 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है। आयात पर निर्भरता कम करने के लिए खाद्य तेलों व दालों का उत्पादन बढ़ाने व अनाज का उत्पादन घटाने का सुझाव दिया गया है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने पर जोर
अधिक न्यायसंगत और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए सरकार का जोर ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने पर रहा है। ग्रामीण परिवारों और छोटे व्यवसायों की वित्तपोषण जरूरतों को सूक्ष्म वित्त संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और अन्य वित्तीय मध्यस्थों के माध्यम से पूरा किया जा रहा है।
ग्रामीण आजीविका को बढ़ाने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे, ग्रामीण आवास, पेयजल और स्वच्छता, स्वच्छ ईंधन, सामाजिक सुरक्षा और ग्रामीण कनेक्टिविटी पर ध्यान केंद्रित करके विभिन्न उपाय किए गए हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डिजिटलीकरण और प्रौद्योगिकी को ले जाना भी ग्रामीण विकास एजेंडे का एक प्रमुख पहलू रहा है। स्वामित्व योजना के माध्यम से बनाए जा रहे डिजिटल भूमि रिकॉर्ड दिखाता है कि ग्रामीण भूमि प्रबंधन और व्यक्तिगत आर्थिक सशक्तीकरण में संरचनात्मक बदलाव आ सकता है।
ग्रामीण आबादी के स्वास्थ्य पैरामीटर पर भी प्राथमिक ध्यान केंद्रित किया गया है। इस पर कोरोना के कारण ज्यादा जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत इस साल 9 जनवरी तक 8,34,695 किमी सड़क की लंबाई मंजूर की गई। 7,70,983 किमी लंबाई की सड़क पूरी हो गई। अब तक 99.6 प्रतिशत लक्षित बस्तियों को कनेक्टिविटी प्रदान की जा चुकी है। 2016 से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत 2.69 करोड़ घर पूरे हो चुके हैं। मिशन अमृत सरोवर के तहत 68,843 जल निकायों का निर्माण किया गया है।
27 जनवरी तक जल जीवन मिशन के तहत लगभग 12.2 करोड़ घरों को नल जल कनेक्शन दिया गया है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 11.8 करोड़ शौचालय और 2.51 लाख सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का निर्माण किया गया है।
11 करोड़ से अधिक किसान पीएम-किसान से लाभान्वित हुए 31 अक्तूबर, 2024 तक
सरकारी योजनाओं ने कृषि क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव दिखाया है। 31 अक्तूबर, 2024 तक 11 करोड़ से अधिक किसान पीएम-किसान से लाभान्वित हुए और 23.61 लाख किसान पीएम-केएमवाई पेंशन योजना के तहत नामांकित हुए। रिपोर्ट में छोटे किसानों को समर्थन देने और विशेष रूप से दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में खाद्यान्न भंडारण प्रणालियों को आधुनिक बनाने के लिए निजी क्षेत्र के निवेश की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।
जोखिम कम करने में मददगार पशुपालन मत्स्यपालन
पशुपालन, मत्स्य पालन या कृषिवानिकी जैसी संबद्ध गतिविधियां किसानों को जोखिमों को प्रभावी ढंग से कम करने में सक्षम बना सकती हैं। आय विविधीकरण के लिए इन क्षेत्रों और इनसे संबद्ध क्षेत्रों के बढ़ते महत्व पर जोर दिया गया है। हालांकि, इसने जलवायु परिवर्तन और पानी की कमी जैसी चुनौतियों को चिह्नित किया है जिनके लिए लक्षित हस्तक्षेप की जरूरत है।
कृषि क्षेत्र में 3.5 फीसदी वृद्धि
वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो पिछली चार तिमाहियों में 0.4-2.0 प्रतिशत की वृद्धि दर से उबर गई। मौजूदा कीमतों पर वित्त वर्ष 2024 के अनंतिम अनुमान के अनुसार, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि का लगभग 16 प्रतिशत योगदान रहा है। कृषि प्रदर्शन को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक मौसम की स्थिति का प्रभाव है।
कृषि में सुधार के लिए लक्षित हस्तक्षेप की जरूरत
किसानों के लिए प्रशिक्षण को बढ़ावा देने, उच्च उपज और रोग प्रतिरोधी बीज किस्मों के उपयोग और दलहन-तिलहन के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में कृषि में सुधार के लिए लक्षित हस्तक्षेप की जरूरत है। खादों का सही तरीके सेे उपयोग कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
विकसित भारत: कौशल व शिक्षा के लिए रणनीतिक योजना जरूरी
जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कौशल और शिक्षा के लिए एक रणनीतिक योजना जरूरी है। इसमें सीखने से लेकर नौकरी बाजार तक एक सुचारु परिवर्तन को सक्षम करने के लिए शुरुआती व्यावसायिक प्रशिक्षण की वकालत की गई है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि एक मजबूत भविष्य के रोडमैप में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल बनाने के लिए उद्योग-अकादमिक साझेदारी, निरंतर कौशल विकास और लचीले शिक्षण मॉडल को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। एक मजबूत दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए कई प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने और रणनीतिक हस्तक्षेप की जरूरत है।
कम कुशल श्रमिकों की चुनौती है प्रमुख
कौशल परिदृश्य में प्रमुख चुनौती कम कुशल श्रमिकों की है, जो शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर शैक्षिक परिणामों की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार है। कार्यबल में कम शैक्षिक कौशल उनकी शैक्षणिक योग्यता और नौकरी बाजार की मांगों के बीच बेमेल है। इस बेमेल के कारण 53 फीसदी से अधिक स्नातक व 36 फीसदी से अधिक स्नातकोत्तर शैक्षणिक योग्यता से नीचे की भूमिकाओं में बेरोजगार हो गए हैं। सर्वेक्षण में सुझाव दिया गया है कि कौशल व रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने वाली लक्षित योजनाएं कौशल अंतर को पाटने और सही प्रोत्साहन के माध्यम से रोजगार सृजन को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं। महिलाओं-लड़कियों पर केंद्रित दीर्घकालिक रणनीति अपनाने से उन्हें नौकरी के बढ़ते अवसरों के लिए तैयार किया जाएगा।
रोजगार क्षमता में सुधार की जरूरत
व्यावसायिक प्रशिक्षण के जरिये रोजगार क्षमता में सुधार के लिए शिक्षा का प्रारंभिक व्यावसायीकरण किया जा सकता है। नीतियों को पारंपरिक से गैर-पारंपरिक भूमिकाओं में परिवर्तन को प्रोत्साहित करते हुए उभरते क्षेत्रों के लिए लक्षित कौशल विकास और समर्थन को प्राथमिकता देनी चाहिए। 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम और 28 वर्ष की औसत आयु के साथ जनसांख्यिकीय लाभांश इसे वैश्विक प्रतिभा केंद्र बनाता है, बशर्ते कि यह रोजगार योग्य, उद्योग-प्रासंगिक कौशल के साथ कार्यबल तैयार कर सके।
यह अंतरराष्ट्रीय निवेश को आकर्षित करता है, विकास को प्रोत्साहित करता है, नवाचार को बढ़ावा देता है व भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है। ऑटोमेशन, एआई और डिजिटलीकरण जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियां उद्योगों को नया आकार दे रही हैं।
कंपनियों ने जमकर मुनाफा कमाया पर कर्मचारियों का वेतन कम बढ़ाया
अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कॉरपोरेट मुनाफे में वृद्धि मजदूरी के अनुरूप होनी चाहिए। दोनों के बीच ज्यादा असमानताएं मांग पर अंकुश लगाकर अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा करती हैं। कंपनियों ने जमकर मुनाफा कमाया है, पर वेतन वृद्धि उस तरह से नहीं हुई। कॉरपोरेट मुनाफे में असंगत वृद्धि बड़ी कंपनियों के बीच आय असमानता के बारे में चिंता पैदा करती है। सतत आर्थिक विकास रोजगार आय को बढ़ाने पर निर्भर करता है, जो सीधे ग्राहक खर्च को व उत्पादन क्षमता में निवेश को बढ़ावा देता है।
सर्वे के अनुसार, दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए पूंजी व श्रम के बीच आय का सही वितरण जरूरी है। यह मांग को बनाए रखने व मध्यम से लंबी अवधि में कॉरपोरेट राजस्व व लाभप्रदता वृद्धि का समर्थन करने के लिए जरूरी है।
निफ्टी-500 कंपनियों का मुनाफा 15 साल के शीर्ष पर
निफ्टी 500 कंपनियों का जीडीपी के अनुपात में लाभ वित्त वर्ष 2003 में 2.1 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 24 में 4.8 प्रतिशत हो गया। यह वित्त वर्ष 2008 के बाद सबसे अधिक है। वित्त वर्ष 24 में मुनाफा 22.3 प्रतिशत बढ़ गया, लेकिन रोजगार में केवल 1.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कर्मचारियों का खर्च 2023 में 17 प्रतिशत से घटकर केवल 13 प्रतिशत बढ़ा।