जेट एयरवेज फिलहाल अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। हालांकि इसकी शुरुआत अभी न होकर बहुत लंबे समय से चली आ रही है। इसके पीछे पांच बड़े कारण हैं जो जेट एयरवेज के डूबने का सबसे बड़ा कारण बने हैं। आज हम आपको सिलसिलेवार ढंग से इसके पतन की कहानी आपको बताने जा रहे हैं।
नरेश गोयल के वो पांच फैसले जिनसे गर्त में पहुंच गई जेट एयरवेज
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2006 में एयर सहारा को कैश में खरीदना
जेट की खराब हालत 2006 में शुरू हो गई थी, जब इसने 500 करोड़ डॉलर में एयर सहारा को खरीदा था। यह डील नगद हुई थी और नरेश गोयल ने तब लोगों की सलाह न मानकर यह डील की थी। उस समय बाजार का भी इस डील को लेकर के बड़ा ठंडा रिस्पॉन्स था। हालांकि इसको जेट लाइट का नाम दिया गया लेकिन उसके बाद भी कंपनी अच्छे नतीजे नहीं दे पाई। इसके बाद 2015 में गोयल ने अपना सारा निवेश निकाल लिया।
बजट हवाई कंपनियों से प्रतिस्पर्धा
नरेश गोयल और जेट एयरवेज ने कभी भी बजट हवाई कंपनियों से प्रतिस्पर्धा नहीं मानी। इंडिगो, स्पाइसजेट और गो एयर काफी कम किराये पर टिकट बुक करती थी। जेट एयरवेज हमेशा से ही बड़ी कंपनियों के ग्राहकों को सेवा देती थी, लेकिन उसने कभी भी सस्ते में टिकट देने की नहीं सोची।
नरेश गोयल का अकेले फैसला लेना
हवाई एक्सपर्ट के मुताबिक नरेश गोयल जेट एयरवेज और जेट लाइट से जुड़े सारे फैसले अकेले लेते थे। हालांकि एक्सपर्ट का मानना है कि उनके पास दो टीम होनी चाहिए थी जो अलग-अलग एयरलाइन का परिचालन देखती।
वित्तीय हालत को किया अनदेखा
नरेश गोयल हमेशा से ही कंपनी की वित्तीय हालत को अनदेखा करते गए। इस वजह से कई बार गलत निवेश के चलते उन्होंने बड़ा उधार कर लिया। इससे कंपनी की स्थिति बद से बद्तर होती गई। इससे कंपनी को जितनी कमाई हो रही थी, उससे ज्यादा का उसके ऊपर लोन चढ़ता गया, जिसने कम होने का नाम नहीं लिया।