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देखिए ये हैं वो मां और पत्नियां, जिन्होंने अमृतसर ट्रेन हादसे में खो दिए अपने, टूट गए सारे सपने

Tue, 23 Oct 2018 01:33 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Updated Tue, 23 Oct 2018 01:33 PM IST
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Amritsar Train Accident, 59 people Killed on Dussehra 19 October 2018
अमृतसर ट्रेन हादसा
देखिए ये हैं वो मां, पत्नियां और परिजन, जिन्होंने अमृतसर ट्रेन हादसे में खो दिए अपने, टूट कर बिखर गए सपने। किसी का सुहाग उजड़ गया, तो किसी की कोख। किसी का भाई नहीं रहा, तो किसी के परिवार का इकलौता कमाने वाला। हर आंख नम है, सभी को इंसाफ की आस है। सरकार मुआवजा देकर मरहम तो लगा रही है, लेकिन उन्हें यह तो पता चले कि इन 59 मौतों का जिम्मेदार आखिर कौन है। कहीं मुआवजे की रकम के तले इंसाफ दब तो नहीं जाएगा। अमर उजाला की टीम ने कई पीड़ित परिवारों का दुख बांटा और उनके मौजूदा हालात पर बातचीत की, पढ़ें...
Amritsar Train Accident, 59 people Killed on Dussehra 19 October 2018
अमृतसर ट्रेन हादसा
दोनों बेटियों का उजड़ गया सुहाग, दोहते की भी गई जान
90 साल की शिवपति की दो ही बेटियां है। किसी तरह उन्होंने दोनों बेटियों को पाल पोसकर उनकी शादियां कीं। एक बेटी प्रीति अमृतसर में बिल्लेवाला चौक के पास मोहल्ले में रहती हैं। उनका दामाद दिनेश प्लंबर था। मेहनत कर उसने अपना घर बना लिया और तमन्ना थी कि दोनों बेटों अभिषेक और आरुष को पढ़ा लिखाकर अफसर बनाएगा। वहीं उनकी दूसरी बेटी राधा सुल्तानपुर से आई हुई थी। उसके बेटे विशाल का मुंडन था। सबने तय किया था कि वह दशहरा मनाने के बाद वैष्णो देवी जाएंगे। लेकिन उनकी खुशी को पता नहीं किसी नजर लग गई। धड़धड़ाती ट्रेन सारे ख्वाबों को रौंदती चली गई। हादसे में शिवपति की दोनों बेटियां प्रीति और राधा विधवा हो गईं। दोहता अभिषेक भी मौत की आगोश में चला गया। खुद भी घायल हो गई हैं। न बोल पाती है और न ही ढंग से सुन पाती है। आसपास बैठी महिलाएं कहती हैं कि दोनों बेटियों का सुहाग उजड़ गया, क्या अब भी सरकार से इंसाफ मांगना पड़ेगा। घर में खाने के लिए कुछ नहीं है। अगर सरकार ने इंसाफ नहीं दिया तो इसका एक ही मतलब है कि यह देश सिर्फ अमीरों की सुनता है। गरीबों की चीखें तो दबकर रह जाती हैं।
Amritsar Train Accident, 59 people Killed on Dussehra 19 October 2018
अमृतसर ट्रेन हादसा
पहाड़ सी जिंदगी कैसी कटेगी...
निर्मला यूपी के जिला बलिया के गांव वरसारिकपुर की रहने वाली है और रविवार को अमृतसर आई। निर्मला के पति 45 वर्षीय दिनेश राजमिस्त्री का काम करते थे। ट्रेन हादसे में दिनेश की जान चली गई। पीछे रह गए हैं 14 साल का बेटा दीपांशु, 20 साल की बेटी नीतू और 16 साल की बेटी निशा। निर्मला की आंखों से लगातार बहते आंसू उसकी सारी हालत बयां कर रहे हैं। निर्मला कहती है कि पति अमृतसर में कमाते थे और गांव में पैसा भेजते थे, उसी से बच्चे पढ़ते थे। घर में दो दिन से खाना नहीं बनाया। आसपास की महिलाएं आकर खाना दे जाती है। जिला प्रशासन की तरफ से अभी जो लिस्ट तैयार की गई है, उसमें उनका नाम तक नहीं है। निर्मला का कहना है कि गांव से आने के बाद सिर्फ आसपास के लोग ही उनका सहारा है। समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या होगा। क्या बच्चे पढ़ पाएंगे, क्या उनकी शादियां हो पाएंगी। क्या वे जी भी पाएंगे।
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Amritsar Train Accident, 59 people Killed on Dussehra 19 October 2018
अमृतसर ट्रेन हादसा
इंसाफ कौन देवेगा, एह ता आपस विच ही डांग सोटा होन नूं फिरदे ने...      
दशमेश नगर की सोनिया के परिवार में तीन महिलाएं हादसे की भेंट चढ़ गई। सोनिया की सास निर्मला, ननद रितु और देवरानी कर्मजोत ट्रेन से कट गई। सोनिया कहती हैं कि हमारे यहां चार मौत हुई है, देवरानी छह माह की गर्भवती थी। सास निर्मला का काफी सहारा था। सोनिया के पति पवनदीप कारखाने में काम करते हैं, जबकि देवर रवि टेलर मास्टर हैं। सोनिया कहती है कि हमारा तो घर उजड़ गया। इंसाफ की उम्मीद कहां से होगी, इंसाफ देने वाले खुद डांग सोटा चलाने को फिर रहे हैं। हमारी सुध कौन लेगा। 
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Amritsar Train Accident, 59 people Killed on Dussehra 19 October 2018
अमृतसर ट्रेन हादसा
सारे सपने टूट गए...
21 साल की कुसुम एलपीयू के डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से बीबीए कर रही थी। उसके पिता रामनाथ चाहते थे कि वह खूब पढ़े। अब सारे सपने टूट गए हैं। बहन संध्या और सुषमा कहती हैं कि चार दिन हो गए, कुसुम का कुछ अता पता नहीं है। सब कुछ धुंधला सा नजर आ रहा है।
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