बॉक्सर कुलदीप सिंह ने आठ वर्ष के कॅरियर में पांच सिल्वर और दो गोल्ड मेडल जीते थे। कोच हरदीप सिंह बराड़ के मुताबिक कुलदीप बहुत ही होनहार और तेज दिमाग का था। मगर नशे की तरफ कैसे चला गया यह एक पहेली बनी है। कुलदीप करीब आठ साल पहले उनकी अकादमी में बाक्सिंग सीखने आया था। उन्होंने अंदाजा लगा लिया था कि एक दिन पंजाब और देश का नाम रोशन करेगा। बता दें कि नशे की ओवरडोज से बॉक्सर कुलदीप सिंह की मौत हो गई है। वह पंजाब के बठिंडा के रहने वाले थे।
बॉक्सर का खौफनाक अंत: दो गोल्ड व पांच सिल्वर मेडल थे जीते, ऐसे विदा होगा... किसी ने सोचा नहीं होगा
वर्ष 2016-17 में देहरादून समेत देश के कई राज्यों में बाक्सिंग मुकाबले में कुलदीप ने पंजाब का नाम रोशन किया और राष्ट्रीय स्तर पर अच्छे बॉक्सर के तौर पर पहचान बना ली थी। कुलदीप सिंह बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन का छात्र था। बुधवार सुबह कुलदीप ट्रेनिंग करके गया था लेकिन जब शाम तक घर नहीं पहुंचा तो पिता प्रीतम सिंह और भाई मेला सिंह ने उसकी तलाश शुरू की। इसके बाद कुलदीप का शव खेत में मिला।
कुलदीप की बाजू पर मिले टीके के निशान
कोच हरदीप सिंह ने बताया कि जब बॉक्सर कुलदीप सिंह का अंतिम संस्कार के वक्त परिजन उसे नहलाने लगे तो देखा कि उसकी बाजू पर सिरिंज के कई निशान थे। कोच ने बताया कि कुलदीप सिंह नशे का आदी नहीं था लेकिन वह नशा कब और किसकी संगत में पड़कर करने लगा इसके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि परिजनों से पता चला कि एक युवक उसके साथ कई बार देखा गया था। इसके बारे में पता करने पर पता चला कि उक्त युवक नशे का आदी है।
तीन वर्ष की आयु में छोड़कर चली गई थी मां
कोच हरदीप सिंह ने बताया कि कुलदीप सिंह को उसकी माता तीन वर्ष की आयु में ही छोड़कर चली गई थीं। इसके बाद बड़ी बहन ने ही कुलदीप और मेला को पाला। परिवार को कुलदीप से बहुत आश थी लेकिन उनको क्या पता था कि एक दिन कुलदीप उनके सपनों को तोड़कर हमेशा के लिए चला जाएगा। कोच हरदीप सिंह ने बताया कि बॉक्सर कुलदीप सिंह के पिता प्रीतम सिंह दिहाड़ी का काम करते है, जबकि उनका भाई मेला सिंह गांव में ही नाई की दुकान करता है।
खेत में मिला कुलदीप का शव
बुधवार देर शाम को बॉक्सर कुलदीप सिंह का शव खेत में मिला। शव के पास से चिट्टे का टीका भी मिला। इससे पता चलता है कि बॉक्सर की मौत नशे की ओवरडोज से हुई है। कुलदीप सिंह तलवंडी साबो के रहने वाले थे। खिलाड़ी की मौत के बाद से पूरे तलवंडी साबो में शोक की लहर है।