ब्रेन स्ट्रोक (पैरालिसिस या लकवा) के मरीजों के लिए समय बहुत ही मायने रखता है। यदि पेशेंट समय पर अस्पताल पहुंच जाए तो उसकी विकलांगता को काफी हद तक बचाया जा सकता, लेकिन इससे बड़ी दिक्कत ब्रेन स्ट्रोक की दवाई टीपीए (टिश्यू प्लाजमाइनोजेन एक्टीवेटर) का इंतजाम करना। ब्रेन स्ट्रोक की दवाई कीमत करीब 35 से 60 हजार रुपये है। स्ट्रोक होने के साढ़े चार घंटे के भीतर मरीज को यह दवा हर हालत में मिल जानी चाहिए।
जान लीजिए क्या है ब्रेन स्ट्रोक, अगर दिखे ये लक्षण तो तुरंत करवाए इलाज, वरना देर हो जाएगी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोमवार को पीजीआई में आयोजित प्रेसवार्ता में पीजीआई के स्ट्रोक प्रोग्राम के इंचार्ज डॉ. धीरज खुराना ने बताया कि नवंबर 2017 से अक्तूबर 2018 तक सिर्फ 25 फीसदी मरीजों को इलाज मिल पाया। जबकि 75 फीसदी को नहीं। इनमें अधिकतर मरीज देरी से पहुंचे, जबकि कुछ मरीज इलाज के खर्च को वहन नहीं कर पाए। ऐसे में मरीजों को चाहिए कि वे ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण के प्रति जागरूक रहें और उसके खतरे को कम करते रहें। उनके मुताबिक भारत में हर साल 17 से 18 लाख स्ट्रोक केस आते हैं और इनमें से सात से आठ लाख मरीजों की मौत हो जाती है।
हर हाल में साढ़े चार घंटे के भीतर अस्पताल में पहुंचना होगा
सेक्टर-32 मेडिकल कालेज के मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. राम सिंह ने बताया कि स्ट्रोक पर समय पर अस्पताल पहुचंने के लिए उसके लक्षणों को जानना जरूरी होता है। यदि लोगों को लक्षण के बारे में पता ही नहीं होगा तो वे देरी से ही अस्पताल पहुंचेंगे। इसलिए पहले लक्षण जानना जरूरी है और उसके बाद तुरंत अस्पताल में और मरीज को उस हास्पिटल में पहुंचना चाहिए, जहां पर सीटी स्कैन की सुविधा 24 घंटे हो और ब्रेन स्ट्रोक का इलाज उपलब्ध हो। कई लोग मरीज को इलाज के लिए किसी बाबा या देशी दवा देने वाले के पास ले जाते हैं। इसमें समय बहुत खराब होता है। यदि मरीज साढ़े चार घंटे के भीतर पहुंच गया और दवा खरीदने के लिए सक्षम है तो उसकी विकलांगता को बचाया जा सकता है।
क्या हैं ब्रेन अटैक
जब दिमाग की एक नस में अचानक खून पहुंचना बंद हो जाए तो उसे ब्रेन अटैक कहते हैं। यह तब होता है, जब दिमाग तक ब्लड पहुंचने में रुकावट आती है। इससे ब्रेन के प्रभावित हिस्से की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं।
ब्रेन अटैक और ब्रेन हेमरिज में अंतर
ब्रेन अटैक और ब्रेन हेमरिज दोनों में काफी अंतर है। जब दिमाग की नस खून की सप्लाई कम करे तो उसे छोटा ब्रेन अटैक कहते हैं। जब नस ब्लाक हो जाए तो उसे एस्केमिक यानी ब्रेन अटैक कहते हैं और जब दिमाग की नस फट जाए तो उसे ब्रेन हेमरिज कहते हैं। यह 20 में से 3 लोगों में होता है। ब्रेन हेमरिज उन लोगों में ज्यादा होने की संभावनाए होती हैं, जिनका बीपी अनकंट्रोल होता है। खास तौर पर सुबह चार बजे। इस दौरान लोगों का सबसे ज्यादा बीपी हाई होता है।
ब्रेन अटैक के क्या लक्षण हैं?
1. चेहरे, बाजू व टांग में अचानक कमजोरी।
2. अचानक बोलने व समझने में कठिनाई।
3. अचानक एक या दोनों आंखों से दिखाई न देना।
4. अचानक चलने-फिरने में कठिनाई, शरीर का संतुलन बनाए रखने में कठिनाई।
5. बिना किसी कारण अचानक तेज सिर दर्द।
इन्हें ब्रेन स्ट्रोक की संभावना ज्यादा
1. उम्रदराज
2. ब्रेन स्ट्रोक की फैमिली हिस्ट्री
3. स्मोकिंग करने वालों को
4. दिल के मरीज
5. शुगर के मरीज
6. कॉलस्ट्राल के मरीज
7. ब्लड प्रेशर के मरीज
ऐसे बचे ब्रेन स्ट्रोक से
1. बीपी को कंट्रोल करें।
2. धूम्रपान से बचें।
3. कॉलेस्ट्राल युक्त खाना खाने से बचें।
4. रोजाना सैर करें।
5. फल और हरी सब्जियां खाएं।
6. शुगर कंट्रोल रखें।
7. मोटापा व शराब से बचें।
स्ट्रोक के खिलाफ पीजीआई की लड़ाई
स्ट्रोक के मरीजों के इलाज के लिए पीजीआई का न्यूरोलाजी डिपार्टमेंट काफी काम कर रहा है। इसके लिए पीजीआई का एक स्ट्रोक प्रोग्राम है। इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर है। हर साल विश्व स्ट्रोक के दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम होते हैं। इस बार 12 से 15 नवंबर तक कार्यक्रम होंगे। इसके अतिरिक्त न्यूरो रिहैबिलिटेशन क्लीनिक और टेली स्ट्रोक पर काम चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक स्ट्रोक के बाद न्यूरो रिहैबिलिटेशन की जरूरत पड़ती है। इसमें फिजियोथैरेपी की अहम भूमिका होती है। इस साल यह क्लीनिक शुरू कर दिया जाएगा। इसकी ओपीडी हर बुधवार को होगी। टेली स्ट्रोक के तहत जीएमसीएच 32 और जीएमएसएच 16 के स्टाफ को ब्रेन स्ट्रोक के प्रति जागरूक किया जाएगा।