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'मैं आ रही हूं, मुझे आखिरी बार शहीद भाई का चेहरा देखना है...फिर करना अंतिम संस्कार'
अनिल कुमार/अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब)
Updated Tue, 02 Jan 2018 05:20 PM IST
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जगसीर सिंह की मां
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मैं आस्ट्रेलिया से आ रही हूं, मुझे आखिरी बार भाई का चेहरा देखना है, उसके बाद ही अंतिम संस्कार करना। कहते हुए शहीद जवान की बहन फफक-फफक कर रो पड़ी।
जगसीर सिंह की मां
31 दिसंबर को नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से हुई फायरिंग में शहीद जगसीर सिंह शहीद हो गए, लेकिन शहीद की बहन पवनदीप कौर ने पिता अमरजीत सिंह को फोन कर आखिरी बार भाई का चेहरा देखने की इच्छा जताई। आतंकी मुठभेड़ में बड़े भाई जगसीर सिंह के शहीद होने की खबर सुनकर दुबई से सोमवार को गांव लोहगढ़ ठाकरां लौटे जसबीर सिंह के गले लगकर मां गुरमीत कौर इस कदर रोई कि वह बेहोश होकर गिर गईं।
जगसीर सिंह का परिवार
जसबीर सिंह ने बताया कि जगसीर 19 सिख रेजिमेंट में तैनात थे। दिसंबर माह में जब जगसीर दस दिन की छुट्टी पर गांव आए थे। इस दौरान फोन पर भाई ने बताया था कि अब वह नए साल में एक माह की छुट्टी लेकर दोबारा आएंगे। उस समय जगसीर से कहा था कि वह यहीं से पत्र भेजकर अपनी छुट्टी बढ़वा लें, लेकिन वो नहीं माने। जसबीर को देखकर शहीद जगसीर के तीनों बच्चे उनकी गोद में बैठ गए।
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जगसीर सिंह का परिवार
उधर, शहीद की पत्नी महिंदरपाल कौर का रो-रो कर बुरा हाल था। शहीद के पिता अमरजीत सिंह ने कहा कि श्रीनगर में रोजाना जवान शहीद हो रहे हैं। वह सभी गरीब परिवारों से संबंधित हैं। सरकार जवानों की शहादत के बाद उनके परिवार वालों की सुध तक नहीं लेती है। उन्होंने मांग की कि सरकार को चाहिए कि पाकिस्तान के साथ जंग कर जवानों की शहादत का सिलसिला खत्म करे। इसके अलावा उनके शहीद बेटे की याद में गांव में कोई यादगार बनाई जाए।
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सिपाही जगसीर सिंह
बता दें कि जगसीर गांव लोहगढ़ जिला फिरोजपुर का रहने वाला है और दस दिन पहले ही छुट्टी काटकर ड्यूटी पर लौटा था। जगसीर की दो छोटी बेटियां व एक बेटा है। पिता कहते हैं कि खुद ही जगसीर को देश की सुरक्षा के लिए फौज में भर्ती कराया था। जगसीर की मां गुरमीत कौर रोती हुई कहती हैं कि उन्होंने अपना बेटा देश को समर्पित कर दिया, जो अब कभी लौट कर नहीं आएगा।