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नई रिसर्चः मक्खियां बता देंगी, कितनी देर पुराना है शव?

Sat, 02 May 2015 09:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रेवाड़ी(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, रेवाड़ी(हरियाणा) Updated Sat, 02 May 2015 09:18 AM IST
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नई रिसर्चः मक्खियां बता देंगी, कितनी देर पुराना है शव?

new research: now flies will open murder mystery and dead body

अब मक्खी हत्या की अनसुलझी गुत्थी को सुलझाने में मदद करेगी। मक्खियां बता देंगी कि कितना पुराना है शव। नई रिसर्च से ये संभव हो पाएगा। तस्वीरों में देखिए, पूरी रिसर्च।

नई रिसर्चः मक्खियां बता देंगी, कितनी देर पुराना है शव?

new research: now flies will open murder mystery and dead body

हालांकि यह मक्खी आम नहीं,बल्कि खास तरह की ब्लू और ग्रीन बॉटल फ्लाई होंगी। यह दावा है रोहतक स्थित महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में फोरेंसिक एंटोमोटोक्सीकोलोजी में शोध कर रहे छात्र कपिल शर्मा का।

नई रिसर्चः मक्खियां बता देंगी, कितनी देर पुराना है शव?

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रेवाड़ी में अपने मित्र के यहां आए कपिल का कहना है फोरेंसिक कीट विज्ञान मौत के बाद से गुजरे समय को निर्धारित करने के प्रयास में लाश के साथ जुड़े कीड़ों का अध्ययन है। मौत के बाद लाश के साथ छेड़छाड़ की गई है या एक जगह से दूसरी जगह के ले जाया गया है, घावों की उपस्थिति, स्थिति और समय जानने के लिए दवाओं की उपस्थिति कीट सबूत का उपयोग करके पता लगाया जा सकता है।

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कपिल वर्मा ने बताया कि मौत के करीब 25-30 मिनट बाद गी ब्लू बॉटल, ग्रीन बॉटल आदि मक्खियां मृत शरीर पर मांस खाने, खून चूसने व अंडे देने के लिए आ जाती हैं। उन्होंने बताया कि मक्खियों के अंडे, लारवे और प्यूपा के जीवन चक्र का अध्ययन करके शव के बारे में जाना जा सकता है कि मौत कितने समय पहले मौत हुई है।

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कपिल वर्मा ने बताया कि वह विशेष प्रकार की बड़ी मक्खी पर अध्ययन कर रहे हैं जो हरे व नीले रंग की होती हैं। ये अपने अंडे भी मांस पर ही देती हैं। लारवा व प्यूपा भी मांस में पलते हैं। इस तरह जांच के सारे सबूत मक्खियों में आ जाते हैं।

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