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धार्मिक एकता की मिशालः तीन साल से बेड पर हैं आसिफ, सेवा कर रहे लखन, देखें- तस्वीरें

Fri, 17 Jan 2020 05:20 PM IST
ajay kumar सीमा एस. आनंद, अमर उजाला, चंडीगढ़
सीमा एस. आनंद, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 17 Jan 2020 05:20 PM IST
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Positive news: Unique example of hindu-muslim unity and brotherhood
बाएं लखन और दाएं बेड पर आसिफ को लिटाते संस्था के लोग।

मैं मुस्लिम हूं, तू हिंदू है, हैं दोनों ही इंसान/ ला मैं तेरी गीता पढ़ लूं, तू पढ़ ले कुरान.. यही मिजाज है इस मुल्क का और हकीकत भी। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक इस देश को मजहब के नाम पर बांटने वाले तो बहुत लोग मिलेंगे लेकिन सच्चाई यह है कि हमारे समाज में आसिफ और लखन जैसे दोस्त भी हैं, जिनके लिए उनका मजहब बाद में है और इंसानियत पहले। ये कहानी आपको प्रेरित करेगी। समाज में फैल रही नफरत को कम करेगी। आइए पढ़ें मजहबी मिसाल की ये शानदार कहानी...

Positive news: Unique example of hindu-muslim unity and brotherhood
लखन और आसिफ। - फोटो : अमर उजाला

उत्त प्रदेश में एक जिला है हाथरस। यहीं के रहने वाले हैं आसिफ। एक हादसे के बाद आसिफ की जिंदगी पूरी तरह बदल गई, रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण वह पूरी तरह से बेड पर आ गए। इसके बाद लखन ने दोस्ती की मिसाल पेश की और आसिफ की सेवा में जी जान से जुट गए। स्थिति यह थी कि आसिफ ने जीने की आस तक छोड़ दी थी लेकिन उनके दोस्त लखन ने तीन साल तक उनका हौसला जिंदा रखा। अब आसिफ का इलाज चंडीगढ़-मोहाली बार्डर पर स्थित गांव रतवाड़ा में ‘रछपाल कौर आसरा फॉर पैराप्लाजिक एंड क्वार्टरा प्लाजिक पेशेंट’ में चल रहा है। 

Positive news: Unique example of hindu-muslim unity and brotherhood
बाएं से पहले लखन, बेड पर लेटे आसिफ और नीले जैकेट में संस्था के लोग। - फोटो : अमर उजाला

स्पाइनल कॉर्ड इंजरी (रीढ़ की हड्डी में चोट) के मरीजों का इलाज कराने वाली संस्था ‘सर्व ह्यूमैनिटी, सर्व गॉड चैरिटेबल ट्रस्ट’ के समन्वयक स्वर्णजीत ने बताया कि एक दिन उनके पास हाथरस से एक 21 वर्षीय मरीज ने फोन किया। जिंदगी से मायूस हो चुके इस मरीज का नाम आसिफ था। आसिफ ने उनसे पूछा कि यदि वह अपनी जिंदगी खत्म कर ले तो क्या उसका दर्द खत्म हो जाएगा। यह सुनते ही वह सन्न रह गए। पूरा मामला समझने के बाद स्वर्णजीत अपनी टीम के साथ आसिफ को लेने हाथरस निकल पड़े। वहां पहुंचकर वह आसिफ से मिले और उसे पंजाब लेकर आ गए। इस दौरान आसिफ अकेला नहीं था, उसके साथ लखन भी था। आसिफ के प्रति लखन की सेवाभाव देख स्वर्णजीत भी हैरान रह गए। 

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देश के राजनेताओं के लिए है मिसाल
स्वर्णजीत ने बताया कि आज के दौर में जब राजनीतिक पार्टियां धर्म के नाम पर हमें बांटने में जुटी हैं, उस वक्त में लखन एक मिसाल है। वह मुस्लिम दोस्त आसिफ की सेवा उसके परिवार की तरह कर रहा था। शौच से लेकर उसके खाने-पीने, नहलाने और कपड़े धोने तक का जिम्मा लखन ने अपने सिर पर ले रखा था। आज के दौर में यह बड़ी बात है। यही तानाबाना है, जो हमारे समाज को खूबसूरत बनाता है। समाज के बांटने वालों को हमारे समाज की गंगा-जमुनी तहजीब से रूबरू कराता है। स्वर्णजीत ने बताया कि अब सिख संस्था ने तीन साल से बेड पर पड़े आसिफ के इलाज और सेवा का बीड़ा उठाया है। 

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शाहरुख और सलमान से भी लगाई थी मदद की गुहार
आसिफ ने अपने इलाज के लिए शाहरुख और सलमान खान को भी पत्र लिखा था। परिवार ने भी उनका साथ छोड़ दिया, ऐसे में ‘सर्व ह्यूमैनिटी, सर्व गॉड चैरिटेबल ट्रस्ट’ ने आसिफ के इलाज का बीड़ा उठाया है। स्वर्णजीत की टोली ऐसे मरीजों का इलाज अपनी कमाई से कराती है, जो मुसीबत में हैं। यह संस्था मरीजों को व्हीलचेयर और दवा से लेकर उन्हें खुद अपनी देखभाल करने लायक बनने तक की हर जरूरत को पूरा कर रही है। करीब 80 लोगों की इस टोली में चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब से कुछ एनआरआई लोग शामिल हैं।  

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