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अंग्रेज अफसर के एक तंज ने राजकुमारी अमृत कौर को बनाया दुनिया की धाकड़ महिला

Sat, 07 Mar 2020 06:24 PM IST
ajay kumar आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 07 Mar 2020 06:24 PM IST
सार

  • टाइम्स मैग्जीन ने पिछली सदी की 100 प्रभावशाली महिलाओं की सूची में शामिल किया।
  • चंडीगढ़ के सेक्टर चार में रहते हैं अमृत कौर के पारिवारिक सदस्य।
  • अपनी नानी बुआ की जिंदगी पर रिसर्च कर रहे हैं सिद्धांत दास।

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Time magazine, read the motivational story of Rajkumari Amrit kaur
राजकुमारी अमृत कौर।

टाइम्स मैग्जीन ने पिछली सदी की 100 प्रभावशाली महिलाओं की सूची में जिन दो भारतीय महिलाओं को जगह दी है, उनमें एक इंदिरा गांधी और दूसरी राजकुमारी अमृत कौर हैं। कपूरथला के राजसी परिवार से ताल्लुक रखने वाली अमृत कौर के परिवार के सदस्य सिद्धांत दास चंडीगढ़ में सेक्टर चार में रहते हैं। उनके मुताबिक राजकुमारी से जुड़ीं कई ऐसे बातें हैं जिन्हें बेहद कम लोग जानते हैं।

Time magazine, read the motivational story of Rajkumari Amrit kaur
राजकुमारी अमृत कौर।

सिद्धांत ने बताया कि अमृत कौर उनके परनाना की सगी बहन थीं। वे अपनी नानी बुआ की जिंदगी पर काफी रिसर्च वर्क भी कर रहे हैं। अमृत कौर स्वतंत्रता सेनानी के साथ देश की पहली केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री व पहली महिला कैबिनेट मंत्री रही हैं। उनके मुताबिक अमृत कौर के स्वतंत्रता सेनानी बनने के पीछे कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक घटना है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़कर जब वे वापस आईं तो उस साल 1909 में अंग्रेजों ने शिमला के वाइस रिगल लॉज (अब राष्ट्रपति निवास कहा जाता है) में एक पार्टी रखी। 

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राजकुमारी अमृत कौर।

अंग्रेजों ने उनके पिता राजा सर हरनाम सिंह के परिवार को आमंत्रित किया। पार्टी में वह और उनकी बेटी राजकुमारी अमृत कौर भी पहुंची थीं। उस समय उनकी उम्र 20 साल रही होगी। पार्टी के दौरान एक अंग्रेज अफसर ने उन्हें अपने साथ डांस के लिए आमंत्रित किया लेकिन अमृत कौर ने मना कर दिया। उनके इनकार को अंग्रेज अफसर ने अपनी बेइज्जती समझी और गुस्से में आ गया। उसने कहा कि भारतीयों को कभी आजादी नहीं देनी चाहिए, वे बिगड़ैल हो चुके हैं। अपने देशवासियों के लिए ऐसी बात सुनकर वे बेहद आहत हुईं। इसके बाद उन्होंने राजसी शान शौकत को ठुकराकर स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में कूदने का फैसला लिया।

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राजकुमारी अमृत कौर।

स्वतंत्रता सेनानी बनने से पहले गांधी जी ने ली थी परीक्षा 
जलियांवाला बाग नरसंहार के बाद महात्मा गांधी अमृतसर का दौरा करने के बाद जालंधर पहुंचे। वहां पर अमृत कौर की उनसे मुलाकात हुई और उन्होंने उनके साथ जुड़ने की इच्छा जताई। गांधी जी जानते थे कि वह एक राजघराने से है, नाजों से पली-बढ़ी है। आंदोलन के साथ जुड़ना उनके लिए मुश्किल हो सकता है। गांधी जी उन्हें सेवाग्राम आश्रम ले आए और उन्हें आश्रम में रहने वाले हरिजन की सेवा करना, टायलेट साफ करने का काम दिया गया। पहनने के लिए खादी के कपड़े दिए गए। इस काम को अमृत कौर ने बहुत अच्छी तरह से निभाया और गांधी जी की परीक्षा में भी सफल हुईं।

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राजकुमारी अमृत कौर।

शिमला में हाउस अरेस्ट रहीं 
गांधी से जुड़ने के बाद वे आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने लगीं। उन्होंने सरोजनी नायडू के साथ मिलकर ऑल इंडिया वूमेन कांफ्रेंस और आई इंडिया वूमेन कांग्रेस की स्थापना की। साल 1942 में अंग्रेजों ने उन पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर जेल में डाल दिया। अंबाला जेल में रहने के दौरान उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई। अंग्रेजों ने उन्हें जेल से निकालकर शिमला के मैनोर्विल हवेली में तीन साल के लिए हाउस अरेस्ट कर दिया।

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