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राजस्थान में होली के कुछ और ही होते हैं रंग

Thu, 09 Mar 2017 11:21 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Thu, 09 Mar 2017 11:21 AM IST
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Here people are curious to paint in the color of Holi
ब्यावर का बादशाह मेला - फोटो : amar ujala
राजस्थान में अजमेर और उदयपुर की होली हर मायने में खास है। रंगों का नाम सुनते ही देशभर से लोग यहां की होली का आनंद लेने खिंचे चले आते हैं। हर गली में गुलाल बिखरा नजर आता है और घरों से पकवानों की खुशबू हर व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करती है। कई तरह की किवदंतियां भी इस होली से जुड़ी हुई है तो इतिहास भी, प्रभु भक्ति के रंग भी दिखते हैं तो श्रद्धा का सैलाब भी। रसिया का गान भी सुनने को मिलता है तो भक्तों के मुख से भजन भी। यदि होली का हर रंग यहां साकार होने की कहे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।


 

इसलिए मनाया जाता है ब्यावर में बादशाह मेला

Here people are curious to paint in the color of Holi
बादशाह मेले में निकलता जुलूस - फोटो : amar ujala
ब्यावर का बादशाह मेला अपनी अलग पहचान रखता है। इस मेले को मनाए जाने के पीछे  प्रचलित प्रसंग के अनुसार एक बार बादशाह अकबर शिकार के उद्देश्य से जंगल में गए। रास्ता भटक जाने के कारण वे काफी आगे निकल गए। जंगल में डाकुओं ने बादशाह अकबर को घेर लिया तथा जान से मारने की धमकी दी। उस वक्त उनके साथ सेठ टोडरमल अग्रवाल भी थे। उन्होंने अपनी वाक् चातुर्यता से न केवल बादशाह को छुड़वाया बल्कि माल एवं अस्लाह भी लूटने से बचा लिया।

 

अकबर ने खुश होकर दी ढाई दिन की बादशाहत

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बादशाह मेले में शामिल लोगों का हुजूम - फोटो : amar ujala
बादशाह अकबर ने सेठ टोडरमल की चतुराई से खुश होकर बतौर तोहफे के रूप में ढाई दिन की बादशाहत बख्शी। आम जनता को धनवान एवं समर्थ बनाने के लिए ढाई दिन की बादशाहत की याद को जीवित रखने के लिए ढाई घण्टे के बादशाह की सवारी ब्यावर शहर में निकाली जाती है। इसमें बादशाह तथा वजीर खजाने के रूप में लाल गुलाल लुटाते हैं।

 
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इसलिए लूटते हैं यहां लोग गुलाल

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गुलाल से लाल हुई सड़क - फोटो : amar ujala
प्रसिद्ध बादशाह मेले में बादशाह द्वारा लुटाई गई गुलाल को बादशाह खर्ची दे... के नाम से सोने की अशर्फियों की तरह नगर के लोग लूटने को तत्पर दिखाई देते हैं। इसके चलते यहां की गलियां गुलाल से लाल हो जाती है। ऐसी मान्यता है कि लूटी हुई यह लाल गुलाल अपनी तिजोरी एवं दुकान के गल्ले में रखने से कारोबार में वृद्धि होती है और खजाना कभी खाली नहीं होता।
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नाथद्वारा में दो महीने तक उड़ता है अबीर—गुलाल

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श्रद्धा-भक्ति व रंगों के आनंद से सराबोर लोग - फोटो : amar ujala
फाग के रसिया से नाथद्वारा में श्रीनाथजी की हवेली बसंत पंचमी के दिन से होली के त्योहार में रंग जाती है। यहां धुलण्डी के दिन गुलाल की तोप चलती है। मेवाड़ क्षेत्र में आने वाले उदयपुर के नाथद्वारा में फाल्गुन के रंग-गुलाल के साथ आमजन श्रद्धा-भक्ति व आनंद से सराबोर रहेंगे। यहां करीब साढ़े तीन शताब्दी पूर्व मुगल बादशाह औरंगजेब के अत्याचारों से परेशान होकर गुसांई श्रीनाथजी को लेकर 1672 ईस्वी में मेवाड़ पधारे। मेवाड़ में श्री वल्लभ संप्रदाय पुष्टिमार्ग के तीन पीठ द्वारिकाधीश, श्रीनाथजी, विठ्ठलनाथजी हैं।
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