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बोर्ड को पता था VIVO के हटने का, लेकिन 440 करोड़ का मोटा प्रायोजक नहीं खोना चाहता था BCCI

Thu, 06 Aug 2020 07:16 AM IST
Rohit Ojha अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: Rohit Ojha Updated Thu, 06 Aug 2020 07:16 AM IST
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BCCI knew of the withdrawal of VIVO but they did not want to lose the Rs 440 crore sponsor
आईपीएल 2020 - फोटो : सोशल मीडिया

आईपीएल के मुख्य प्रायोजक से चीनी कंपनी विवो के हटने को राष्ट्रभक्ति से भले जोड़कर देखा जा रहा हो, लेकिन इसके अंदर की कहानी बाजार से जुड़ी नजर आ रही है। बीसीसीआई इससे भली भांति परिचित था। रविवार को आयोजित आईपीएल संचालन परिषद की बैठक से पहले ही विवो के इस साल आईपीएल से नहीं जुड़ने की मंशा के बारे में बीसीसीआई के कुछ आला अधिकारियों को पता था।मगर बोर्ड इतने अहम मौके पर 440 करोड़ रुपये का मोटा प्रायोजक खोना नहीं चाहता था। बोर्ड को उम्मीद थी कि चीनी कंपनी मान जाएगी, लेकिन इससे पहले ही विवो के हटने की बात बाहर निकल आई।

BCCI knew of the withdrawal of VIVO but they did not want to lose the Rs 440 crore sponsor
IPL 2020 - फोटो : सोशल मीडिया

आसान नहीं है हटना
सूत्रों की माने तो विवो का एक साल के लिए मुख्य प्रायोजक से हाथ खींचना आसान नहीं है। अगर बात आपसी समझौते पर भी बन जाती है तब भी बोर्ड को अपेक्स काउंसिल को भरोसे में लेना पड़ सकता है। विवो से अलग होने का आधिकारिक बयान दोनों ओर से अब तक नहीं आया है। अनुबंध में इससे बाहर निकलने का भी प्रावधान है, लेकिन यह सिर्फ बोर्ड और विवो को ही मालूम है।

BCCI knew of the withdrawal of VIVO but they did not want to lose the Rs 440 crore sponsor
आईपीएल - फोटो : IPL twitter

सूत्र बताते हैं कि देश में चीन विरोधी माहौल और खराब होते बाजार के हालात के मद्देनजर ही विवो ने बोर्ड अधिकारियों के समक्ष राशि को कम करने या फिर एक साल के लिए हटने की इच्छा जताई थी।आईपीएल के प्रायोजकों में कुछ अन्य कंपनियां ऐसी हैं जिनमें चीन की हिस्सेदारी है। उनसे दूर रहने की बात अब तक सामने नहीं आई है।

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BCCI knew of the withdrawal of VIVO but they did not want to lose the Rs 440 crore sponsor
बीसीसीआई

नया प्रायोजक ढूंढने में लगा बोर्ड 
सूत्रों के अनुसार बोर्ड नया प्रायोजक ढूंढने में जुट गया है। हालांकि उसकी सबसे बड़ी चिंता अब तक लीग के लिए गृह और विदेश मंत्रालय की मंजूरी सरकार से नहीं मिलना है। संचालन परिषद की बैठक में बोर्ड सदस्यों ने मंगलवार तक सरकार की मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई थी।

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