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दर्द से निकली चमक: तीन साल की उम्र में मां का निधन, दादी की परवरिश और चाचा का त्याग; ऐसे बना IPL का नया सितारा

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद Published by: Swapnil Shashank Updated Mon, 30 Mar 2026 12:46 PM IST
सार

अनिकेत वर्मा की कहानी संघर्ष, त्याग और हिम्मत की मिसाल है। मां को खोने के दर्द से लेकर आईपीएल तक का सफर आसान नहीं था। दादी और अंकल के सहारे उन्होंने अपने सपनों को सच किया और आज वह एक उभरते सितारे बन चुके हैं।

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From Tragedy To Triumph: From Losing His Mother To Stardom, The Emotional Rise Of IPL Sensation Aniket verma
अनिकेत वर्मा की दर्दभरी कहानी - फोटो : ANI
आईपीएल के उभरते सितारे सनराइजर्स हैदराबाद के अनिकेत वर्मा की कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं, बल्कि दर्द, संघर्ष और हौसले की कहानी है। उनकी जिंदगी की शुरुआत ही एक ऐसे दर्द से हुई, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं। महज तीन साल की उम्र में उन्होंने अपनी मां को खो दिया। उस उम्र में जब बच्चे दुनिया को समझना शुरू करते हैं, अनिकेत के हिस्से में एक गहरा खालीपन आ गया। घर में हालात बदल गए। पिता ने दूसरी शादी कर ली, लेकिन अनिकेत के जीवन में सबसे बड़ा सवाल था, अब उनका सहारा कौन बनेगा?


तभी उनकी दादी और चाचा उनका सहारा बने। इन दोनों ने अनिकेत को एक स्टार बनाने के लिए सबकुछ त्याग दिया। उन्होंने खुद दर्दभरी जिंदगी काटी, लेकिन अनिकेत के सफलता के रास्ते में कोई कठिनाई नहीं आने दी। अब अनिकेत आईपीएल में खूब चमक रहे हैं, लेकिन उनका सफर और उनकी कहानी भावुक कर देने वाली है। आइए जानते हैं...
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From Tragedy To Triumph: From Losing His Mother To Stardom, The Emotional Rise Of IPL Sensation Aniket verma
चाचा के साथ अनिकेत वर्मा - फोटो : IPL/BCCI
अनिकेत वर्मा का बचपन
तीन साल की उम्र में मां को खो देने के बाद अनिकेत के मन में उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकी। वह अक्सर चुप रहते, अपने ही ख्यालों में खोए रहते थे। यहीं से कहानी में एंट्री होती है उनके अंकल अमित वर्मा की। खुद किशोर उम्र में थे, लेकिन जिम्मेदारी का बोझ अचानक कंधों पर आ गया। उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया कि अनिकेत को झांसी से भोपाल ले जाएंगे। उन्होंने तय किया कि अनिकेत को एक बेहतर माहौल देना होगा।

भोपाल में ही अनिकेत की दादी पार्वती वर्मा रहती थीं। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन यही कदम आगे चलकर अनिकेत की जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बना। अमित ने कहा, 'अनिकेत हमेशा मेरे और मां के करीब था, इसलिए हमने उसे भोपाल लाने का फैसला किया।' 
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चाचा अमित के साथ अनिकेत वर्मा - फोटो : IPL/BCCI
कम उम्र में जिम्मेदारी, संघर्ष भरा सफर
भोपाल में दादी पार्वती वर्मा के साथ अमित और अनिकेत का नया जीवन शुरू हुआ, लेकिन यह सफर आसान नहीं था। अमित ने 18 साल से पहले ही काम करना शुरू कर दिया ताकि अनिकेत की परवरिश और पढ़ाई-लिखाई का खर्च उठा सकें। वह एक छोटे से वाहन शोरूम में काम करते थे और करीब 3000 रुपये महीने कमाते थे। इतनी कम आमदनी में घर चलाना ही मुश्किल था, लेकिन उन्होंने अनिकेत के सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया।

अनिकेत का मन सिर्फ क्रिकेट में लगता था। वह खाते-पीते, सोते-जागते सिर्फ क्रिकेट के बारे में सोचते थे, लेकिन आर्थिक हालात इतने मजबूत नहीं थे कि महंगे क्रिकेट किट और ट्रेनिंग का खर्च आसानी से उठाया जा सके। अमित ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में बताया, 'कई बार मुझे कर्ज लेना पड़ा ताकि मैं उसके लिए क्रिकेट का सामान ला सकूं। मैंने ठान लिया था कि उसे किसी चीज की कमी नहीं होने दूंगा।'
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अनिकेत वर्मा - फोटो : IPL/BCCI
कोच का भरोसा और बिना फीस की ट्रेनिंग
शुरुआत में अनिकेत ने रेलवे अकादमी में ट्रेनिंग ली, लेकिन वहां उनकी प्रतिभा सीमित होती नजर आ रही थी। तभी कोचों ने सुझाव दिया कि उन्हें बेहतर ट्रेनिंग की जरूरत है। ऐसे में उन्हें ज्योति प्रकाश त्यागी की क्रिकेट अकादमी में भेजा गया। कोच ज्योति प्रकाश त्यागी ने अनिकेत की प्रतिभा को पहचाना और बिना फीस के ट्रेनिंग देने का फैसला किया। उन्होंने न सिर्फ कोचिंग दी, बल्कि जरूरत पड़ने पर क्रिकेट किट भी उपलब्ध कराई। त्यागी बताते हैं, 'जब अनिकेत 12-13 साल का था, तब ही मुझे पता था कि यह लड़का बहुत आगे जाएगा। उसमें बड़े शॉट खेलने की क्षमता शुरू से थी।'
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अनिकेत वर्मा - फोटो : IPL/BCCI
13 साल का संघर्ष, फिर मिली पहचान
करीब 13 साल तक लगातार मेहनत और संघर्ष के बाद अनिकेत को पहचान मिलनी शुरू हुई। लेकिन यह रास्ता आसान नहीं था। कई बार टीम में जगह नहीं मिली, कई बार निराशा हाथ लगी। फिर आया मध्य प्रदेश लीग का मौका। भोपाल लेपर्ड्स के लिए खेलते हुए उन्होंने छह पारियों में 273 रन बनाए। एक मैच में 41 गेंदों पर 123 रन की विस्फोटक पारी ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया। इस पारी में उन्होंने 13 छक्के और आठ चौके लगाए थे। यही वह पल था जिसने उनके करियर को नई दिशा दी।
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