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VIDEO: हरभजन ने समझाया कोहली और धोनी की कप्तानी में अंतर; गंभीर पर कहा- वह दिल के अच्छे, लोगों को सच पसंद नहीं
Thu, 13 Aug 2026 10:45 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 13 Aug 2026 10:45 AM IST
सार
पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी के बीच अंतर बताते हुए कहा कि कोहली ने टीम की सोच बदल दी। उन्होंने फिटनेस और फील्डिंग में कोहली के योगदान को भी अहम बताया। वहीं, गौतम गंभीर का बचाव करते हुए हरभजन ने कहा कि वह दिल के अच्छे हैं और सच बोलते हैं।
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हरभजन का कोहली को लेकर बयान
- फोटो : ANI
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भारतीय क्रिकेट में विराट कोहली और एमएस धोनी की कप्तानी के अंदाज में क्या फर्क था और मौजूदा कोच गौतम गंभीर को लेकर लोगों की राय क्यों अलग है? पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने दोनों मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कोहली की कप्तानी की सबसे बड़ी खासियत बताते हुए गंभीर का भी बचाव किया और कहा कि वह दिल के अच्छे इंसान हैं, लेकिन लोगों को उनका सच बोलना पसंद नहीं आता।
कोहली, धोनी, गंभीर और हरभजन
- फोटो : ANI
कोहली और धोनी की कप्तानी में क्या था अंतर?
हरभजन ने 2010-11 के ऑस्ट्रेलिया दौरे का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय कोहली ने रन बनाने के साथ-साथ टीम की सोच पर भी असर डालना शुरू कर दिया था। उनके मुताबिक, धोनी की कप्तानी में जहां कई बार मुश्किल लक्ष्य को हासिल करना लगभग असंभव माना जाता था, वहीं कोहली का रवैया था कि लक्ष्य कितना भी बड़ा हो, उसे हासिल करने की कोशिश जरूर की जानी चाहिए।
हरभजन ने कहा, 'विराट ने जो सबसे सरल बदलाव किया, वह मानसिकता का था। टेस्ट के पांचवें दिन कई बार ऐसी स्थिति आती थी जब हमें लगता था कि 400 रन का लक्ष्य हासिल करना असंभव है। विराट कहते थे- हम कोशिश करेंगे। उनका मानना था कि कोशिश करते हुए हार जाना भी ठीक है, क्योंकि किसी दिन आप 400 रन भी चेज कर पाएंगे। लेकिन अगर आप कोशिश ही नहीं करेंगे तो आपकी सोच कभी नहीं बदलेगी।'
हरभजन ने 2010-11 के ऑस्ट्रेलिया दौरे का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय कोहली ने रन बनाने के साथ-साथ टीम की सोच पर भी असर डालना शुरू कर दिया था। उनके मुताबिक, धोनी की कप्तानी में जहां कई बार मुश्किल लक्ष्य को हासिल करना लगभग असंभव माना जाता था, वहीं कोहली का रवैया था कि लक्ष्य कितना भी बड़ा हो, उसे हासिल करने की कोशिश जरूर की जानी चाहिए।
हरभजन ने कहा, 'विराट ने जो सबसे सरल बदलाव किया, वह मानसिकता का था। टेस्ट के पांचवें दिन कई बार ऐसी स्थिति आती थी जब हमें लगता था कि 400 रन का लक्ष्य हासिल करना असंभव है। विराट कहते थे- हम कोशिश करेंगे। उनका मानना था कि कोशिश करते हुए हार जाना भी ठीक है, क्योंकि किसी दिन आप 400 रन भी चेज कर पाएंगे। लेकिन अगर आप कोशिश ही नहीं करेंगे तो आपकी सोच कभी नहीं बदलेगी।'
विराट कोहली-धोनी
- फोटो : ANI
'10 विकेट चाहिए तो जीत के लिए जाएंगे'
हरभजन के मुताबिक, कोहली ने टीम को सकारात्मक और आक्रामक क्रिकेट खेलने की मानसिकता दी। उनका कहना था कि आखिरी दिन अगर भारत को जीत के लिए 10 विकेट चाहिए होते, तो टीम विकेट लेने के इरादे से जाती थी। अगर 200 रन बनाने होते, तो उन्हें भी हासिल करने की कोशिश की जाती थी।
उन्होंने कहा, 'अगर हमें आखिरी दिन 10 विकेट चाहिए होते, तो हम जीत के लिए जाते। अगर हमें 200 रन बनाने होते, तो हम जीत के लिए जाते। हम नकारात्मक गेंदबाजी नहीं करते थे। यही वह बड़ा बदलाव था, जो विराट कोहली भारतीय क्रिकेट में लेकर आए।' हरभजन के मुताबिक, यह बदलाव सिर्फ कप्तानी की रणनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने भारतीय क्रिकेटरों की सोच को लंबे समय तक प्रभावित किया।
हरभजन के मुताबिक, कोहली ने टीम को सकारात्मक और आक्रामक क्रिकेट खेलने की मानसिकता दी। उनका कहना था कि आखिरी दिन अगर भारत को जीत के लिए 10 विकेट चाहिए होते, तो टीम विकेट लेने के इरादे से जाती थी। अगर 200 रन बनाने होते, तो उन्हें भी हासिल करने की कोशिश की जाती थी।
उन्होंने कहा, 'अगर हमें आखिरी दिन 10 विकेट चाहिए होते, तो हम जीत के लिए जाते। अगर हमें 200 रन बनाने होते, तो हम जीत के लिए जाते। हम नकारात्मक गेंदबाजी नहीं करते थे। यही वह बड़ा बदलाव था, जो विराट कोहली भारतीय क्रिकेट में लेकर आए।' हरभजन के मुताबिक, यह बदलाव सिर्फ कप्तानी की रणनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने भारतीय क्रिकेटरों की सोच को लंबे समय तक प्रभावित किया।
VIDEO | PTI Exclusive: Former India cricketer and Rajya Sabha MP Harbhajan Singh (@harbhajan_singh) says, "Virat Kohli once said something very important. When he was in Australia in 2010-11 and scored a lot of runs, many people asked what had changed. Dhoni had given him the… pic.twitter.com/cjMudl7TH0
— Press Trust of India (@PTI_News) August 13, 2026
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गिल, कोहली और राहुल
- फोटो : Shubman Gill X
फिटनेस में भी कोहली ने बदल दी तस्वीर
हरभजन ने विराट कोहली के योगदान का सबसे बड़ा हिस्सा फिटनेस को बताया। उन्होंने कहा कि उनके दौर में फिटनेस का मतलब मुख्य रूप से स्टैमिना और लंबे समय तक टिके रहने से था, लेकिन कोहली ने खिलाड़ियों को फिटनेस का एक नया मतलब समझाया। हरभजन ने कहा, 'मैं विराट को टीम का फिटनेस स्तर बढ़ाने का 90 प्रतिशत श्रेय दूंगा। हमें एक मानक चाहिए था, हमें एक रोल मॉडल चाहिए था और विराट कोहली वह रोल मॉडल बने।' उन्होंने कहा कि क्रिकेटर का फिट होना सिर्फ बल्लेबाजी या गेंदबाजी के लिए जरूरी नहीं है। मैदान पर डाइव लगाकर रन बचाना, कैच के लिए खुद को झोंकना और हाफ चांस को रन आउट में बदलना भी टीम के प्रदर्शन का हिस्सा है।
'भारतीय फील्डिंग अब किसी से कम नहीं'
हरभजन ने कहा कि एक समय भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया की बेहतरीन फील्डिंग का उदाहरण देती थी, क्योंकि वहां के खिलाड़ी रन बचाने के लिए मैदान पर अपना शरीर तक झोंक देते थे। लेकिन अब भारतीय टीम भी उसी स्तर की फील्डिंग कर रही है। उन्होंने कहा, 'आज जब मैं भारतीय खिलाड़ियों को उसी तरह मैदान पर डाइव लगाते, रन रोकते और आधे मौकों को रन आउट में बदलते देखता हूं तो मुझे बेहद गर्व होता है। भारतीय फील्डिंग अब किसी से कम नहीं है और मेरा मानना है कि इस बदलाव को काफी हद तक विराट कोहली ने आगे बढ़ाया।' हालांकि, हरभजन ने इस बदलाव का श्रेय सिर्फ कोहली को नहीं दिया। उन्होंने अजिंक्य रहाणे, सूर्यकुमार यादव, रोहित शर्मा और दिनेश कार्तिक जैसे खिलाड़ियों के योगदान का भी जिक्र किया।
हरभजन ने विराट कोहली के योगदान का सबसे बड़ा हिस्सा फिटनेस को बताया। उन्होंने कहा कि उनके दौर में फिटनेस का मतलब मुख्य रूप से स्टैमिना और लंबे समय तक टिके रहने से था, लेकिन कोहली ने खिलाड़ियों को फिटनेस का एक नया मतलब समझाया। हरभजन ने कहा, 'मैं विराट को टीम का फिटनेस स्तर बढ़ाने का 90 प्रतिशत श्रेय दूंगा। हमें एक मानक चाहिए था, हमें एक रोल मॉडल चाहिए था और विराट कोहली वह रोल मॉडल बने।' उन्होंने कहा कि क्रिकेटर का फिट होना सिर्फ बल्लेबाजी या गेंदबाजी के लिए जरूरी नहीं है। मैदान पर डाइव लगाकर रन बचाना, कैच के लिए खुद को झोंकना और हाफ चांस को रन आउट में बदलना भी टीम के प्रदर्शन का हिस्सा है।
'भारतीय फील्डिंग अब किसी से कम नहीं'
हरभजन ने कहा कि एक समय भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया की बेहतरीन फील्डिंग का उदाहरण देती थी, क्योंकि वहां के खिलाड़ी रन बचाने के लिए मैदान पर अपना शरीर तक झोंक देते थे। लेकिन अब भारतीय टीम भी उसी स्तर की फील्डिंग कर रही है। उन्होंने कहा, 'आज जब मैं भारतीय खिलाड़ियों को उसी तरह मैदान पर डाइव लगाते, रन रोकते और आधे मौकों को रन आउट में बदलते देखता हूं तो मुझे बेहद गर्व होता है। भारतीय फील्डिंग अब किसी से कम नहीं है और मेरा मानना है कि इस बदलाव को काफी हद तक विराट कोहली ने आगे बढ़ाया।' हालांकि, हरभजन ने इस बदलाव का श्रेय सिर्फ कोहली को नहीं दिया। उन्होंने अजिंक्य रहाणे, सूर्यकुमार यादव, रोहित शर्मा और दिनेश कार्तिक जैसे खिलाड़ियों के योगदान का भी जिक्र किया।
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गंभीर और हरभजन
- फोटो : ANI
गंभीर पर बोले- दिल के अच्छे हैं
हरभजन सिंह ने मौजूदा भारतीय मुख्य कोच गौतम गंभीर को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि कोच के रूप में टीम के खराब प्रदर्शन पर गंभीर पर दबाव आना स्वाभाविक है, लेकिन लोगों को उनके व्यक्तित्व को केवल उनके बोलने के अंदाज से नहीं आंकना चाहिए। हरभजन ने कहा, 'गौतम बहुत अच्छे इंसान हैं और उनका दिल अच्छा है। बहुत से लोगों को लगता है कि वह कड़वे अंदाज में बोलते हैं, लेकिन असलियत यह है कि वह सच बोलते हैं। बहुत से लोगों को सच सुनना पसंद नहीं होता। इसी वजह से कुछ लोगों को वह थोड़े घमंडी लग सकते हैं। लेकिन आपको किसी किताब को उसके कवर से नहीं आंकना चाहिए।'
हरभजन सिंह ने मौजूदा भारतीय मुख्य कोच गौतम गंभीर को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि कोच के रूप में टीम के खराब प्रदर्शन पर गंभीर पर दबाव आना स्वाभाविक है, लेकिन लोगों को उनके व्यक्तित्व को केवल उनके बोलने के अंदाज से नहीं आंकना चाहिए। हरभजन ने कहा, 'गौतम बहुत अच्छे इंसान हैं और उनका दिल अच्छा है। बहुत से लोगों को लगता है कि वह कड़वे अंदाज में बोलते हैं, लेकिन असलियत यह है कि वह सच बोलते हैं। बहुत से लोगों को सच सुनना पसंद नहीं होता। इसी वजह से कुछ लोगों को वह थोड़े घमंडी लग सकते हैं। लेकिन आपको किसी किताब को उसके कवर से नहीं आंकना चाहिए।'