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Chardham Yatra 2020 : भगवान विष्णु को प्रिय है शंख, लेकिन फिर भी बदरीनाथ धाम में नहीं होता शंखनाद
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 15 May 2020 12:21 PM IST
भगवान विष्णु को शंख अतिप्रिय है, लेकिन फिर भी उनके धाम बदरीनाथ में शंखनाद नहीं होता है। इसके पीछे क्या वजह है इसके बारे में बता रहे हैं धाम के मुख्य पुजारी रावत ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी...
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बदरीनाथ धाम
- फोटो : amar ujala
मुख्य पुजारी ने बताया कि धाम में शंख न बजने का कारण महात्मा लोग बताते हैं। उनका कहना है कि यहां बदरीनाथ में भगवान ध्यानमुद्रा हैं। उनका योग भंग न किया जाए, इसलिए यहां शंखनाद नहीं होता है।
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बदरीनाथ धाम
उन्होंने कहा एक मान्यता यह भी है कि वृंदा ने यहां तुलसी के रूप में तपस्या की थी और उसका विवाह शंखचूड़ से हुआ था। वृंदा साक्षात मां लक्ष्मी हैं। उसके बाद भगवान विष्णु ने उन्हें धारण किया था। मां लक्ष्मी को यह याद न आए कि शंखचूड़ से मेरा विवाह हुआ है। इसलिए धाम में शंखनाद नहीं होता।
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बदरीनाथ धाम
- फोटो : AmarUjala
कहा कि धाम में लक्ष्मी तुलसी के रूप में तपस्या करती हैं। मां लक्ष्मी को अपना पूर्व चरित्र याद न आए, इसलिए यहां शंख बजने की परंपरा नहीं है। ऐसा शास्त्रों में भी लिखा है।
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बदरीनाथ धाम
- फोटो : amar ujala
आज तड़के चार बजकर 30 मिनट पर बदरीनाथ धाम के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए। अब छह माह तक भगवान बदरीश की पूजा यहीं होगी।
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