आम आदमी को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना से बैंक किनारा कर रहे हैं। एक साल में बैंकों ने अपने टारगेट का केवल 50 प्रतिशत मुद्रा लोन ही बांटा है।
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प्रधानमंत्री मुद्रा लोन से बैंकों ने किया किनारा, जानिए इसके पीछे की बड़ी वजह
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 26 May 2017 04:56 PM IST
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राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की 61वीं बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। बैठक में आए शासन के अधिकारियों ने बैंकों को निर्देश दिए कि वह प्रत्येक शाखा में नोडल अधिकारी तैनात करने के साथ ही आम आदमी तक मुद्रा लोन को पहुंचाएं।
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देहरादून स्थित एक होटल में आयोजित बैठक का शुभारंभ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया। उन्होंने बैंकों से आह्वान किया कि सरकार की योजनाओं की आम आदमी तक पहुंच आसान बनाएं। मुद्रा लोन से लेकर तमाम योजनाओं को भी ज्यादा से ज्यादा आम आदमी तक पहुंचाएं।
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मुद्रा लोन में बैंकों की उदासी और मोटे कारोबारियों के की तरफ आकर्षित नहीं होने से लोन का टारगेट गिर रहा है। नोटबंदी के बाद काफी पैसा जमा होने के बावजूद सरकार की योजनाओं में लोन देने में बैंक किनारा कर रहे हैं। एक अन्य योजना स्टैंडअप इंडिया का तो मुद्रा लोन से भी बुरा हाल है।
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सएलबीसी की बैठक में तय हुआ था कि प्रदेश की 2200 बैंक शाखाएं प्रति शाखा दो स्टैंडअप ऋण देंगी, लेकिन एक साल में महज पांच प्रतिशत ही लोन आवंटित किए गए हैं। इस पर बैंकों को निर्देश दिए गए कि योजना के तहत ज्यादा से ज्यादा महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के जरूरतमंदों को स्टैंडअप इंडिया के तहत लोन दें ताकि वह अपना रोजगार शुरू करें।