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हरतालिका तीज 2019: दूर कीजिए कंफ्यूजन, ये है व्रत और पूजा का सही दिन और शुभ मुहूर्त...

Sun, 01 Sep 2019 09:56 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 01 Sep 2019 09:56 AM IST
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Hartalika teej 2019 Confusion on Right date and timing for puja vrat

हरतालिका तीज व्रत हिंदू धर्म में मनाए जाने वाला एक प्रमुख व्रत है। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज मनाई जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए किया था। इस बार यह व्रत एक सितंबर को किया जाए या दो सितंबर को इसे लेकर महिलाओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आगे जानिए व्रत और पूजा का सही दिन और शुभ मुहूर्त...

Hartalika teej 2019 Confusion on Right date and timing for puja vrat

ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी के अनुसार, हरतालिका तीज व्रत के कुछ नियम भी होते हैं। इस तीज के व्रत में जल ग्रहण नहीं किया जाता है। व्रत के बाद अगले दिन जल ग्रहण करने का विधान है। हरतालिका तीज व्रत एक बार करने पर इसे छोड़ा नहीं जाता है। प्रत्येक वर्ष इस व्रत को विधि-विधान से करना चाहिए। इस व्रत में रात्रि जागरण किया जाता है। रात में भजन-कीर्तन करना चाहिए। इसे कुंवारी कन्याएं और सौभाग्यवती स्त्रियां ही कर सकती हैं। 

Hartalika teej 2019 Confusion on Right date and timing for puja vrat

तृतीया तिथि प्रारंभ- सुबह 8 बजकर 27 मिनट से (1 सितंबर 2019 ) ।
तृतीया तिथि समाप्त- अगले दिन सुबह 4 बजकर 47 मिनट तक (2 सितंबर 2019)।

हरतालिका तीज पूजा मुहूर्त- सुबह 8 बजकर 27 मिनट से 8 बजकर 37 मिनट तक।
प्रदोष काल हरतालिका पूजा मुहूर्त - शाम 6 बजकर 39 मिनट से रात 8 बजकर 56 मिनट तक।

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Hartalika teej 2019 Confusion on Right date and timing for puja vrat

इस दिन माता पार्वती और भगवान शंकर की विधि-विधान से पूजा की जाती है। हरतालिका तीज प्रदोषकाल में किया जाता है। सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त को प्रदोषकाल कहा जाता है। यह दिन और रात के मिलन का समय होता है। हरतालिका पूजन के लिए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की बालू रेत व काली मिट्टी की प्रतिमा हाथों से बनाएं। पूजा स्थल को फूलों से सजाकर एक चौकी रखें और उस चौकी पर केले के पत्ते रखकर भगवान शंकर, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।

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इसके बाद देवताओं का आह्वान करते हुए भगवान शिव, माता पार्वती का पूजन करें। सुहाग की पिटारी में सुहाग की सारी वस्तु रखकर माता पार्वती को चढ़ाना इस व्रत की मुख्य परंपरा है। इसमें शिव जी को धोती और अंगोछा चढ़ाया जाता है। यह सुहाग सामग्री सास के चरण स्पर्श करने के बाद ब्राह्मणी और ब्राह्मण को दान देना चाहिए।  आरती के बाद सुबह माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं व ककड़ी-हलवे का भोग लगाकर व्रत खोलें।

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