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Joshimath Sinking: यहां नृसिंह मंदिर में दर्शन बिना अधूरी रहती है बदरीनाथ धाम की यात्रा, पढ़ें रोचक बातें

Thu, 19 Jan 2023 10:21 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 19 Jan 2023 10:21 PM IST
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Joshimath Is Sinking Know badrinath dham entry point Narsingh temple Interesting Facts in hindi
जोशीमठ सिंह मंदिर - फोटो : अमर उजाला

लगातार धंस रहा जोशीमठ बदरीनाथ धाम का प्रवेश द्वारा है। चारधाम यात्रा के दौरान जोशीमठ में लाखों श्रद्धालु जुटते हैं। श्रद्धालु यहां नृसिंह मंदिर के दर्शन करने के बाद ही बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा शुरू करते हैं। बदरीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल का कहना है कि बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा तभी सफल मानी जाती है जब पहले नृसिंह भगवान के दर्शन कर लिए जाएं। 



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हालांकि अभी मंदिर भू-धंसाव से बचा हुआ है, लेकिन मंदिर के शंकराचार्य गद्दी स्थल के पास हल्की दरारें देखी गई हैं। वहीं, खतरे को देखते हुए नृसिंह मंदिर परिसर में सभी बड़े आयोजनों पर रोक लगा दी गई है। श्री बदरीनाथ, केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने बताया कि स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुजनों के सुझाव पर जोशीमठ स्थित नृसिंह मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के आयोजन व गतिविधि पर बिना अनुमति के रोक लगा दी गई है। चलिए आपको बताते हैं मंदिर के बारे में कुछ खास बातें...

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जोशीमठ सिंह मंदिर - फोटो : अमर उजाला
  • जोशीमठ नृसिंह मंदिर बदरीनाथ हाईवे पर स्थित है। नृसिंह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। नृसिंह मंदिर परिसर में मां भगवती और लक्ष्मी मंदिर स्थित है। नृसिंह मंदिर के दर्शन को चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की लाइन लगी रहती है। 
  • कपाट बंद होने के बाद भगवान बदरी विशाल की डोली जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में विराजमान होती है। जहां पर श्रद्धालु दर्शन और पूजा अर्चना के लिए आते हैं।
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जोशीमठ सिंह मंदिर - फोटो : अमर उजाला
  • बता दें कि मंदिर में नृसिंह भगवान की प्रतिमा का दाहिना हाथ कोहनी से बेहद पतला है। 
  • मान्यता है कि जब प्रतिमा से हाथ अलग होकर नीचे गिर जाएगा, तब बदरीनाथ धाम को जाने वाले सड़क भी चट्टानों के टूटने से बंद हो जाएगी।
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जोशीमठ सिंह मंदिर - फोटो : अमर उजाला
  • इसके बाद बदरीनाथ धाम के दर्शन भविष्य बदरी मंदिर में होंगे। भविष्य बदरी मंदिर भी जोशीमठ क्षेत्र में ही स्थित है। 
  • यहां अलकनंदा के किनारे हर रोज गंगा आरती का आयोजन भी होता है। जोशीमठ में शंकराचार्य मठ भी है। यहां आठवीं सदी में आदि गुरु शंकराचार्य ने कल्पवृक्ष के नीचे तपस्या की थी।
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बदरीनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
  • जोशीमठ से बदरीनाथ धाम की दूरी मात्र 45 किलोमीटर है। जोशीमठ आध्यात्मिक ही नहीं पर्यटन नगरी भी है।
  • यहां से चीन सीमा क्षेत्र को जोड़ने वाला जोशीमठ-मलारी हाईवे स्थित है। इस सीमावर्ती रोड पर भी पर्यटक सैर-सपाटे के लिए जा सकते हैं।    
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