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Joshimath Sinking: 80 साल तक झेले कई भूकंप...पर भू-धंसाव ने हिला दी पत्थर और मिट्टी बने घरों की नींव

Mon, 16 Jan 2023 06:01 PM IST
अलका त्यागी प्रदीप भंडारी, अमर उजाला, जोशीमठ(चमोली)
प्रदीप भंडारी, अमर उजाला, जोशीमठ(चमोली) Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 16 Jan 2023 06:01 PM IST
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Joshimath landslide shook foundation of houses made of stone and mud Even they bear Several earthquakes
जोशीमठ में पठाल के बने घर - फोटो : अमर उजाला

जोशीमठ नगर में हो रहे भू-धंसाव से दरक रहे मकानों में दशकों पुराने पठाल (पत्थर) और मिट्टी से बने घर भी शामिल हैं। कई साल तक इन मकानों ने भूकंप, अतिवृष्टि, बर्फबारी तो आराम से झेल ली लेकिन अब ये भू-धंसाव मकान नहीं झेल पा रहे हैं। हालांकि जहां भू-धंसाव नहीं है वहां ये मकान अब भी सुरक्षित हैं।



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नगर के मनोहर बाग वार्ड में कई पठाल और मिट्टी से निर्मित मकान हैं। बड़े से बड़ा भूकंप इन मकानों की नींव नहीं हिला पाया लेकिन भू-धंसाव ने मकान का नक्शा ही बदल कर रख दिया है। मनोहर बाग में चाहे वो नए घर हों या वर्षों पुराने सभी असुरक्षित हो गए हैं।

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जोशीमठ में मिट्टी के घर - फोटो : अमर उजाला

यहां सभी मकानों में दरारें आ गई हैं। आपदा प्रभावित यमुना प्रसाद कपरवाण का कहना है कि उनके पठाल और मिट्टी से बने मकान को करीब अस्सी साल हो गए हैं। यह मकान कई बार के भूकंप के झटके झेल चुका है तब हमारी मकान पर एक दरार तक नहीं पहुंची।

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मकानों में आईं दरारें - फोटो : अमर उजाला

इस भू-धंसाव ने मकान को हिला कर रख दिया है। मकान चारों तरफ से क्षतिग्रस्त हो गया है। लक्ष्मी प्रसाद सती का कहना है कि उनका 60 साल पुराना पठाल का मकान है। मकान के निर्माण के बाद से एक बार भी रिपेयरिंग नहीं की।

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दरारें - फोटो : अमर उजाला

कई भूकंप आए लेकिन मकान सुरक्षित रहा। अब भू-धंसाव से मकान रहने लायक नहीं बचा है। महिमानंद उनियाल का भी यही कहना है। वे कहते हैं कि ज्योतिर्मठ शिवालय के समीप एक 80 साल पुराना मकान है।

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घरों में पड़ी दरारें - फोटो : अमर उजाला

यहां भू-धंसाव नहीं हुआ है जिससे मकान सुरक्षित है। यदि भू-धंसाव यहां भी हुआ तो मकान खतरे की जद में आ जाएगा। 

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