फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

आतंकी मुठभेड़ में शहीद दीपक द्वारा परिवार को की गई ये आखिरी कॉल आपकी आखें भिगो देगी

Tue, 22 May 2018 09:06 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 22 May 2018 09:06 AM IST
विज्ञापन
martyr deepak nainwal last call will bring tear in your eyes
deepak nainwal
मम्मी, आप बिल्कुल परेशान मत होइए, मैं एकदम ठीक हूं। आप लोगों की बहुत याद आ रही है। अब यहां फर्स्ट महार रेजिमेंट की ओर से कमरा भी मिल गया है। आप लोगों को रहने में कोई दिक्कत नहीं होगी। रेयांश-लावण्या आई लव यू... जल्द ही ठीक होकर आपके पास आऊंगा...।

 
martyr deepak nainwal last call will bring tear in your eyes
deepak nainwal dead body - फोटो : amar ujala
ये बातें दीपक नैनवाल ने 17 मई की रात 8.30 बजे अंतिम बार अपने परिजनों के साथ हुई वीडियो कॉल में कही थी, लेकिन यह दीपक के साथ उनकी अंतिम बातचीत होगी, इसका इल्म परिजनों को कतई नहीं था। दीपक के भाई प्रदीप नैनवाल बताते हैं कि 17 मई को करीब 12 मिनट वीडियो कॉल पर बात हुई थी। वह पूरी तरह स्वस्थ लग रहे थे। उन्होंने माता-पिता, पत्नी और बच्चों के साथ ही उनसे भी बात की। हमें लग रहा था कि जल्द ही दीपक हमारे बीच होगा, लेकिन हमें नहीं पता था कि यह हमारी अंतिम बातचीत होगी। प्रदीप के मुताबिक, अगले ही दिन दोपहर दीपक को लगातार तीन अटैक पड़े। उन्हें आईसीयू से हटाकर वेंटीलेटर पर रखा गया, लेकिन मौत के मुंह से निकले दीपक को जिंदगी फिर दगा दे गई।
 
martyr deepak nainwal last call will bring tear in your eyes
deepak nainwal - फोटो : file photo
मुठभेड़ में उन्हें कई गोलियां और छर्रे लगे थे। दिल्ली के आरआर अस्पताल में कई गोलियां निकाल दी गईं। वहीं, दो गोलियां उनके फेफड़े को चीरती हुई दिल के पास लगी थीं। इसमें से एक गोली चिकित्सकों ने निकाल दी, लेकिन एक गोली को इसलिए नहीं निकाला गया, क्योंकि उसके निकलते ही दीपक का शरीर शून्य हो जाता। इसे देखते हुए उन्हें इलाज के लिए पुणे स्थित पैराप्लेजिक रिहैब सेंटर रेफर किया गया था। यहां 20 दिन के बाद रविवार की सुबह उनका निधन हो गया। 

.
विज्ञापन
विज्ञापन
martyr deepak nainwal last call will bring tear in your eyes
डेमो इमेज
...मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफन नहीं होता
शहीद नायक दीपक नैनवाल के दिल में बचपन से ही देशभक्ति का जज्बा कूट-कूटकर भरा था। वह अपने पिता की तरह सेना में जाना चाहते थे। जब पिता घर आते तो उनसे अपने लिए वर्दी लाने की जिद करते थे। पिता कहते थे की जब बड़े हो जाओगे, तब वर्दी मिलेगी। दीपक का यह सपना वर्ष 2001 में फर्स्ट रेजिमेंट के जरिये सेना में जाने के साथ पूरा हुआ।

 
विज्ञापन
martyr deepak nainwal last call will bring tear in your eyes
deepak nainwal
दीपक नैनवाल के पिता चक्रधर प्रसाद ने फोन पर बताया कि बेटे को एडवेंचर लाइफ बहुत पसंद थी। उसने बचपन से ही सेना में जाने की जिद की और उसे पूरा किया। मां पार्वती कहती हैं कि अगर उनका बेटा जिंदा होता तो देश के लिए और भी बहुत कुछ करता। मुझे उम्मीद थी कि मेरा बेटा मौत को मात देकर 12 अप्रैल को छुट्टी पर घर आएगा, लेकिन अब वो कभी नहीं आएगा। शहीद की पत्नी ज्योति कहती हैं कि दीपक हमेशा कहते थे कि ‘जमानेभर में मिलते हैं आशिक कई, मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता, नोटों में सिमटकर मरे हैं लोग, मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफन नहीं होता।’ वह कहती हैं कि अपने बच्चों को भी सेना में भेजेंगी।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed