रुड़की से आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित पिरान कलियर का विश्वविख्यात धार्मिक स्थल है। कलियर विभिन्न धर्म के लोगों में आस्था का प्रतीक है। यहां पर सभी धर्मों के लोग अपनी-अपनी मुरादें लेकर आते हैं। कहते हैं कि यहां हर किसी की मुरादें पूरी होती है। इस धर्मनगरी में मुख्य साबिर पाक मजार के साथ ही चार अन्य शख्सियतों की भी मजारें हैं। इन पर जाकर लोगों को रुहानी फैज का इल्म होता है। इन्हें लोग बड़े ऐहतराम के साथ तवज्जो देते हैं।
इन पीरों की मजार पर सजदा करने से पूरी होती है हर मुराद
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साबिर साहब:
जिनको हजरत अलाउद्दीन अली अहमद साबिर कलियरी भी कहा जाता है कलियर में इनकी दरगाह को प्रमुखता दी जाती है और आने वाले जायरीन सबसे पहले इनकी जियारत करते हैं। चादर और प्रसाद चढ़ाकर मन्नतें मांगते हैं। साबिर साहब के बारे में प्रचलित है कि आप ने बारह साल तक मात्र गुल्लर खाकर अपना जीवन यापन किया और गरीब लोगों की सेवा की। खुद भूखे रहे और लोगों को लंगर खिलाया जिस वजह से इनका नाम साबिर पड़ा।
इमाम साहब:
इन्हें हजरत इमाम अबू सालेह रहमतुल्लाह अलैहि कहा जाता है जो कि रिश्ते में साबिर साहब के मामू भी लगते थे। इनके
बारे में कहा जाता है कि आप उसूलों के पक्के और कौम के खिदमतगार थे। उनके दर्जनों ऐसे वाकये हैं जिन्हें आज भी लोग
याद करते हैं। पिरान कलियर में जियारत के लिए आने वाले लोग साबिर साहब कि दरगाह पर जियारत करने के साथ-साथ
इमाम साहब कि जियारत भी करते हैं।
किलकिली शाह:
हजरत किलकिली साहब रहमतुल्लाह अलैहि के नाम से जानी जाने वाली ये शख्सियत भी अपने आप में अपना अलग ही
रुतबा रखते हैं। जिनके बारे में कहा जाता है कि जब वहां के राजा ने इंसानियत को शर्मशार कर डाला तो उन्होंने गुस्से में
एक ऐसी चीख मारी कि सारा इलाका ही थर्रा उठा और उन्हें लोग किलकिली शाह के नाम से पुकारने लगे। जियारत क लिए
यहां पहुंचने वाले लोग किलकिली शाह कि जियारत जरूर करते हैं।
गायब साहब:
हजरत पीर गायब अली साहब के नाम से जाने जाने वाले संत की मजार पर लोग अपने चेहरे या किसी और जगह पर
निकल आए मस्सो से निजात पाने के लिए नमक और झाड़ू चढ़ा कर अपने लिए दुआ मांगते हैं। यहां आने वाले लोगों के
अनुसार इस प्रक्रिया के बाद उन्हें अपनी परेशानी से निजात मिल जाती है।
अबदाल साहब:
हजरत अबदाल साहब रहमतुल्लाह अलैहि के मजार पर लोग अपनी परेशानियों की एक लिस्ट बनाकर वहां छोड़कर आ जाते
हैं। कहते हैं कि कुछ दिनों में उनकी परेशानी दूर हो जाती है। अपनी तमाम परेशानियों के चलते यहां आने वाले जायरीन
अब्दल साहब कि दरगाह पर जियारत के लिए जरूर जाते हैं।