उत्तराखंड में युवा पीढ़ी जहां बेरोजगारी का दंश झेल रही है, वहीं, केमर पट्टी के चोपड़िया गांव में किसी भी परिवार का सदस्य बेरोजगार नहीं है। गांव में पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा ने शिक्षा की जो अलख जगाई थी, उसी का नतीजा है कि गांव के हर परिवार का सदस्य सरकारी सेवा में कार्यरत हैं।
{"_id":"593fac9f866419605d8b467d","slug":"no-one-unemployed-in-this-village","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":" इस गांव में फैला है ऐसा 'जादू' कि कोई नहीं रहता बेरोजगार, पढ़ें इसके पीछे की वजह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस गांव में फैला है ऐसा 'जादू' कि कोई नहीं रहता बेरोजगार, पढ़ें इसके पीछे की वजह
डा. मुकेश नैथानी / अमर उजाला, घनसाली (टिहरी)
Updated Wed, 14 Jun 2017 08:21 AM IST
विज्ञापन
job
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Village
भिलंगना ब्लॉक में केमर पट्टी के चोपड़िया गांव में 26 परिवारों में 150 की आबादी है। गांव के प्रत्येक परिवार से एक सदस्य शिक्षक जरूर है। गांव के लोगों को शिक्षा की प्रेरणा पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा से मिली। गांव के लोगों का कहना है कि पहले गांव में अधिकतर लोग अशिक्षित ही थे।
Village
तब बहुगुणा ने 1966-67 में गांव के पास नव जीवन मंडल आश्रम खोल कर गांव के बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए प्राथमिक स्कूल खुलवाया। ग्रामीणों ने भी अपने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू किया। नतीजतन आज गांव के हर परिवार का सदस्य सरकारी सेवा में है।
विज्ञापन
विज्ञापन
डेमो
- फोटो : demo pic
गांव के 26 परिवारों में 53 शिक्षक, तीन सेना और एक वन विभाग में रेंज अधिकारी के पद पर तैनात है। यही नही अधिकांश परिवारों की बहुएं भी शिक्षक हैं, जिससे गांव के एक भी परिवार के किसी भी व्यक्ति ने बाहर का रुख नहीं किया।
विज्ञापन
Earn Money
गांव के सामाजिक कार्यकर्ता कुशाल सिंह कोहली ने बताया कि सुंदरलाल बहुगुणा के प्रयास से ही गांव में शिक्षा की अलख जगी है। उन्होंने 1966-67 से 1990 तक गांव में लगातार शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और शराब के दुष्परिणाम के प्रति लोगों को जागरुक किया। इसी का परिणाम है कि गांव के हर परिवार का सदस्य सरकारी सेवा में है।