दिल्ली के करोल बाग में 1955 को जन्मी कृष्णा तीरथ ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी जो कई सालों तक रहा। फिर 2015 में वह उन नेताओं की लिस्ट में शामिल हुईं जिन्होंने कांग्रेस की डूबती नैया को छोड़कर भाजपा की नाव में सवार हो गए थे। अब लोकसभा चुनाव 2019 के शुरुआत में ही उन्होंने घर वापसी कर ली है। उन्होंने भाजपा से इस्तीफा देकर एक बार फिर कांग्रेस ज्वाइन कर ली है। भाजपा में शामिल होते वक्त उन्होंने कहा था कि कांग्रेस में नेतृत्व की भारी कमी है, जिससे पार्टी ने अपनी दिशा खो दी है। वो बोली थीं हमें अपनी ऊर्जा खराब नहीं करनी चाहिए। वह केवल इसलिए बीजेपी में हैं ताकि समाज के हित का काम कर सकें, अब हमें कांग्रेसमुक्त भारत बनाकर महिलाओं और नवजवानों को आगे बढ़ाना है। कृष्णा तीरथ अपने राजनीतिक जीवन में कई विवादों से घिरी रहीं। आगे पढ़िए उनके ऐसे ही 3 विवाद...
'कांग्रेसमुक्त भारत' का नारा देकर भाजपा में जाने वाली कृष्णा तीरथ की घर वापसी, ये हैं उनके 3 विवाद
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मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री रहते हुए वह एक बार विवादों में आ गई थीं। 24 जनवरी 2010 को राष्ट्रीय बालिका दिवस के दिन उनके मंत्रालय ने अखबारों में एक फुल पेज न्यूजपेपर विज्ञापन छपवाया था जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के साथ ही पाकिस्तान के पूर्व एयर चीफ मार्शल तनवीर महमूद अहमद भी आर्मी यूनिफॉर्म में दिखाई दे रहे थे। शुरुआत में कृष्णा तीरथ ने अपने मंत्रालय की गलती मानने से इंकार किया और मीडिया पर इसका दोष मढ़ा। उन्होंने कहा कि फोटो सिंबॉलिक है। हालांकि बाद में इसके लिए उन्होंने अपने मंत्रालय की ओर से माफी मांग ली और जांच की बात कही थी।
13 सितंबर 2010 को कृष्णा तीरथ का एक और विवाद सामने आया था जब सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (सीएटी) ने उनकी बेटी यश्वी की एंकर और रिपोर्टर के पद पर दूरदर्शन में हुई नियुक्ति रद्द कर दी थी। ट्रिब्यूनल के तत्कालीन मुखिया वीके बाली ने यश्वी की नियुक्ति ये कहते हुए रद्द कर दी थी कि उसे इंटरव्यू में ज्यादा नंबर दिए गए और पूरी चयन प्रक्रिया में अनियमितता पाई गई है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री रहते हुए कृष्णा तीरथ ने कहा था कि बलात्कार के मामले में कानून में संशोधन कर इसमें मौत की सजा का प्रावधान करना चाहिए। उनकी राय में रासायनिक प्रक्रिया से दुष्कर्म के दोषियों को नपुंसक बनाने का सुझाव व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत अपराधों को गैर जमानती बनाने का सुझाव भी दिया था। तीरथ ने कहा था कि छेड़छाड़ और छींटाकशी की घटनाओं को सामान्य व्यवहार के रूप में नहीं देखना चाहिए बल्कि इनसे कड़ाई से निपटना चाहिए।
बीए, बीएड। वर्ष 1991 में लोकसभा चुनाव में हार के साथ राजनीति की शुरुआत की। वर्ष 1993, 1998 व 2003 में विधायक चुनी गईं। वह दिल्ली सरकार में मंत्री के अलावा दिल्ली विधानसभा की उपाध्यक्ष बनीं। वर्ष 2004 व 2009 में सांसद चुनी गईं। इस दौरान वह केंद्र सरकार में मंत्री भी बनीं।
1984 से 2004 तक वह दिल्ली विधानसभा की सदस्य भी रह चुकी हैं। 1998 में दिल्ली में बनी शीला दीक्षित की पहली सरकार में वह मंत्री भी रही थी। 2003 में वह दिल्ली विधानसभा की उपाध्यक्ष भी बनीं। तीरथ को दिल्ली में कांग्रेस का दलित चेहरा माना जाता रहा है। 2004 और 2009 में वह उत्तर-पूर्वी दिल्ली से लोकसभा के लिए चुनी गईं थी।