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भ्रष्टाचार की नींव पर Twin Towers: ये जीत है आम इंसान की, पढ़ें- बिल्डर-प्राधिकरण के अवैध गठजोड़ की कहानी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 27 Aug 2022 09:34 PM IST
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सार

भ्रष्टाचार की नींव पर खड़े सुपरटेक बिल्डर के ट्विन टावर 28 अगस्त की दोपहर 2:30 बजे चंद सेकेंड में जमींदोज हो जाएंगे। पहली बार अदालत के आदेश पर इतनी बड़ी इमारतों को गिराया जाएगा। इसके लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लंबी लड़ाई लड़ी गई। आखिरकार जीत आम आदमी की हुई जिसने बिल्डर की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाकर भ्रष्ट तंत्र को घुटनों पर ला दिया। आइए जानते हैं बिल्डर-प्राधिकरण के अवैध गठजोड़ की पूरी कहानी...

twin tower demolition Emerald Court project of Supertech builders and officials authority
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सेक्टर-93ए में सुपरटेक की एमराल्ड कोर्ट परियोजना में गड़बड़ी की पटकथा बिल्डर और प्राधिकरण के बड़े ओहदों पर बैठे कुछ अधिकारियों ने मिलकर लिखी। 23 नवंबर 2004 को जमीन आवंटन के बाद इसकी पैमाइश में लापरवाही बरती गई। शुरुआत में इस जमीन पर 9 मंजिल के 14 टावर बनाने की मंजूरी दी गई थी। इसके बाद बिल्डर-प्राधिकरण के भ्रष्ट गठजोड़ की बदौलत नक्शे में बदलाव और फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) के नाम पर अवैध निर्माण की नींव को मजबूत किया जाता रहा।

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29 दिसंबर 2006 को प्राधिकरण ने संशोधन कर 14 टावरों में अतिरिक्त दो मंजिल के निर्माण की मंजूरी दे दी यानी अब 9 की जगह 11 मंजिला टावर बनाए जा सकते थे। कुछ ही समय बाद 15 टावर बनाने का प्रावधान कर दिया गया। नवंबर 2009 आते-आते आवंटित भूखंड पर 17 टावर बनाने की मंजूरी दी गई। इस बीच एमराल्ड कोर्ट परियोजना को कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी मिल चुका था। नक्शे के हिसाब से आज जहां पर 32.5 मंजिला (103 मीटर ऊंचे) एपेक्स और 30.5 मंजिला (97 मीटर ऊंचे) सियान टावर खड़े हैं, वहां पर ग्रीन एरिया दिखाया गया था। इस जगह पर एक छोटी इमारत बनाने का प्रावधान किया गया था।

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28 फरवरी 2009 को शासन ने नए आवंटियों के लिए एफएआर बढ़ाने का निर्णय लिया और पुराने आवंटियों को कुल एफएआर का 33 प्रतिशत तक खरीदने का विकल्प दिया। इससे सुपरटेक को एपेक्स और सियान टावर की ऊंचाई 24 मंजिल यानी 73 मीटर तक बढ़ाने की अनुमति मिल गई। यहां तक सब कुछ ठीक था, लेकिन एक बार फिर प्लान में संशोधन कर टावरों को 40 और 39 मंजिला तक बढ़ाने की अनुमति मिल गई। इसकी ऊंचाई 121 मीटर तय कर दी गई। दोनों टावर के बीच की दूसरी महज 9 मीटर रखी गई, जबकि नियम के अनुसार कम से कम 16 मीटर की दूरी अनिवार्य है। इसके बाद एमराल्ड कोर्ट सोसाइटी के निवासियों के सब्र का बांध टूट गया।

 

तीन साल तक टहलाता रहा प्राधिकरण, नक्शा तक नहीं दिखाया

बिल्डर की मनमानी और गलतियों का पुलिंदा लेकर सुरपटेक एमराल्ड के घर खरीदार करीब तीन साल तक नोएडा प्राधिकरण के धक्के खाते रहे। बिल्डर से नक्शा दिखाने की मांग लगातार नजरंदाज होती रही। प्राधिकरण से नक्शा मांगा गया, लेकिन बहाने बनाकर घर खरीदारों को टरकाने का सिलसिला जारी रहा। बिल्डिंग बायलॉज के मुताबिक किसी भी परियोजना की निर्माण साइट पर नक्शा लगा होना अनिवार्य है, लेकिन बिल्डर ने नक्शा सार्वजनिक नहीं किया। बिल्डर से परेशान घर खरीदारों ने 2009 में आरडब्ल्यूए का गठन किया और 2012 में इलाहाबाद हाईकोर्ट रुख करने का फैसला लिया गया।


 

डेढ़ साल में 19 मंजिल बढ़ी इमारतें

साल 2012 तक एपेक्स और सियान टावर महज 13 मंजिल तक बन पाए थे, लेकिन जब मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो बिल्डर ने परियोजना के काम को ऐसी रफ्तार दी कि डेढ़ साल में ही 19 मंजिल का अतिरिक्त निर्माण कर डाला। 2014 में हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद काम बंद हो गया। बिल्डर की चालाकी काम नहीं आई। टावरों की ऊंचाई इसलिए बढ़ाई, ताकि कोर्ट ऐसा कोई फैसला न ले सके। इससे किसी तरह का नुकसान हो, लेकिन हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि नागरिकों और पर्यावरण की सुरक्षा को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं, अगर ये टावर दूसरे संशोधित प्लान के अनुसार 24 मंजिल तक ही बनाए जाते तो शायद आज इनके तोड़ने की नौबत न आती।


 

40 मंजिल क्षमता के हिसाब से नींव डाली

ट्विन टावर के नाम पर भ्रष्टाचार की इमारत खड़ी करने की साजिश 2009 में ही रच ली गई थी। स्थानीय निवासियों ने बताया कि दूसरे संशोधित प्लान के हिसाब से 22 मंजिल की इमारत की मंजूरी मिली थी, लेकिन बिल्डर ने इसकी नींव 40 मंजिला इमारत की क्षमता के हिसाब से तैयार कराई थी।


 

सात साल चली कानूनी लड़ाई, जीत आम आदमी की

प्राधिकरण से मायूसी मिलने के बाद 2012 में एमराल्ड परियोजना की आरडब्ल्यूए ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस जांच के आदेश दिए और जांच में निवासियों की दलीलें सही ठहराई गईं। 2014 में हाईकोर्ट ने ट्विन टावर को तोड़ने का आदेश दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुपरटेक सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। कोर्ट ने 31 अगस्त 2021 को आदेश जारी कर ट्विन टावर को तीन महीने के अंदर गिराने के आदेश दिए।


 

बदलनी पड़ी टावर तोड़ने की तारीख

टावरों को तोड़ने की तारीख 22 मई 2022 तय की गई थी, लेकिन तैयारी पूरी न होने का हवाला दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित एजेंसियों को मोहलत दी। इसके बाद 22 से 28 अगस्त के बीच टावरों को तोड़ने का समय दिया गया। हालांकि, इस बार भी टावरों को तोड़े जाने पर संशय था, लेकिन संबंधित एजेंसी ने प्राधिकरण को पत्र जारी कर ट्विन टावर के कमजोर होने से खतरे की आशंका जाहिर करते हुए इसे 28 तारीख तक तोड़े जाने का सुझाव दिया।


 

भ्रष्टाचार में शामिल 24 अधिकारी-कर्मचारी रडार पर

हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ ने साल 2014 में ही एक कमेटी का गठन कर दिया था। इसमें 12 से 15 अधिकारियों व कर्मचारियों को इसके लिए दोषी माना गया। जांच का दायरा बढ़ाया गया और हाई लेवल कमेटी को इसका जिम्मा सौंपा गया। जांच रिपोर्ट के बाद 24 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।


 

12 एकड़ में जितना निर्माण, उतना 1.6 एकड़ में करने की थी तैयारी

एमराल्ड कोर्ट परियोजना के लिए सुपरटेक को 13.5 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। परियोजना का 90 फीसदी यानी करीब 12 एकड़ हिस्से पर 2009 में ही निर्माण पूरा कर लिया गया था। घर खरीदार जब प्रोजेक्ट में शिफ्ट होने लगे तो 10 फीसदी हिस्से को ग्रीन जोन दिखाया गया। 2011 आते-आते दो नए टावरों के बनने की खबरें आने लगीं। लोगों को अंदेशा नहीं था कि नए टावर दिल्ली के कुतुब मीनार से भी ऊंचे होंगे। 12 एकड़ में जितना निर्माण किया गया, उतना एफएआर का खेल खेलकर दो गगनचुंबी इमारों के जरिये 1.6 एकड़ में ही करने का काम तेजी से जारी था। अंदाजा लगाया जा सकता है कि 12 एकड़ में 900 परिवार रह रहे हैं, इतने ही परिवार 1.6 एकड़ में बसाने की तैयारी थी। कोर्ट ने आरडब्ल्यूए की इन दलीलों को समझा और टावरों को ध्वस्त करने का फैसला बरकरार रखा।

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