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Terrorist-Criminal Syndicate: दिल्ली-एनसीआर को दहलाने के लिए हो रही थी रेकी, हिंदू नेता भी थे निशाने पर

पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 17 Jun 2026 03:35 AM IST
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सार

पकड़े गए आरोपी अनस से पूछताछ में खुलासा किया है कि शहजाद भट्टी और अजमल गुज्जर ने आरोपियों को सार्वजनिक जगहों समेत कई संभावित ठिकानों की रेकी (निगरानी) करने का निर्देश दिया था।

Reconnaissance was being conducted to unleash terror in Delhi-NCR; Hindu leaders were also targeted.
टारगेट वाले हिंदू नेताओं की रेकी भी कर ली गई थी। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पाकिस्तान की आईएसआई के द्वारा चलाए जा रहे इंटरनेशनल टेरर-क्राइम मॉड्यूल के पकड़े गए आरोपियों ने खुलासा किया है कि दिल्ली-एनीआर के साथ-साथ इस बार कई हिंदू नेता इनके निशान पर थे। हिंदू नेताओं की हत्या करने के लिए इनको टारगेट किलिंग के आदेश दिए गए थे। पकड़े गए आरोपी अनस से पूछताछ में खुलासा किया है कि शहजाद भट्टी और अजमल गुज्जर ने आरोपियों को सार्वजनिक जगहों समेत कई संभावित ठिकानों की रेकी (निगरानी) करने का निर्देश दिया था। टारगेट वाले हिंदू नेताओं की रेकी भी कर ली गई थी।



स्पेशल सेल के पुलिस उपायुक्त चैतन्य नारा ने बताया कि ऐसी गतिविधियों का मकसद डर फैलाना और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ना भी था। पहचाने गए ठिकानों की रेकी की गई और आगे की ऑपरेशनल प्लानिंग के लिए उन जगहों की तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेज दिए गए थे। मुख्य ऑपरेटिव्स की गिरफ्तारी और स्पेशल सेल के सही समय पर की गई कार्रवाई ने कई नियोजित आतंकी घटनाओं को रोक कर दिल्ली-एनसीआर को दहलाने से बचा लिया गया है। आरोपियोंं के पास से जो 7 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं उनमें शहजाद भट्टी और अजमल गुज्जर से जुड़ी आपत्तिजनक चैट और वॉयस नोट हैं। हालांकि आरोपियों ने काफी चैट आदि डिलीट कर दी थीं। इनको रिकवर करने के लिए सभी मोबाइल को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।
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युवकों को पैसे का लालच देकर बरगालाते थे
स्पेशल सेल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मॉड्यूल के आंका भारतीय युवाओं को पैसे का लालच देकर अपने मॉड्यूल भर्ती कर रहे थे। ये भारतीय युवाओं को झांसा देते थे कि उन्हें इतना पैसे देंगे कि उनकी जिंदगी बन जाएगी। किसी को ये मकान बनाने का आदि का झांसा देते थे। हालांकि जांच मे ये पता लगा है कि ये पैसे किसी को नहीं देते थे। स्पेशल सेल में तैनात एसआई शैलेंद्र की टीम ने जिन सात भारतीय युवकों को पकड़ा है उनसे पूछताछ में पता लगा है कि ये किसी को पैसे नहीं देते थे।
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ऐसे मॉड्यूल में भर्ती किया जाता है
कई बैंक खातों की जानकारी जिनका इस्तेमाल सिंडिकेट द्वारा नशीले पदार्थों और अवैध हथियारों की बिक्री से हुई कमाई को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। जांच से पता चला कि शहज़ाद भट्टी और उसके विदेश में रहने वाले साथियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन चैनलों का इस्तेमाल करके आसानी से प्रभावित होने वाले भारतीय युवाओं की पहचान की। उन्हें कट्टरपंथी बनाया, भर्ती किया और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए प्रेरित किया। संभावित रंगरूटों को पैसे का लालच, जल्दी आर्थिक लाभ का वादा और सोशल मीडिया के जरिए आपराधिक जीवनशैली को महिमामंडित करके लुभाया जाता था। यह नेटवर्क एन्क्रिप्टेड एप्लिकेशन, डिस्पोजेबल मोबाइल नंबर, गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट, हवाला चैनल, स्कैनर-आधारित वित्तीय लेनदेन, डेड-ड्रॉप डिलीवरी मैकेनिज्म और फोटो/वीडियो-आधारित कन्फर्मेशन सिस्टम के जरिए काम करता था। भारत के बाहर बैठे हैंडलर्स भारतीय क्षेत्र से बाहर रहते हुए ही रेकी, लॉजिस्टिक्स, हथियार और विस्फोटक खरीदने, टारगेट चुनने और हमले को अंजाम देने से जुड़े निर्देश देते थे।

शहजाद भट्टी और अजमल गुज्जर से संबंध
जांच से पता चला कि आरोपी मोहित, आरिफ, फरार आरोपी आमिर और अनस जरूरतमंद लोगों को बहुत ज़्यादा ब्याज दरों पर रोज़ाना पैसे उधार देने के धंधे में शामिल थे। अपना दबदबा बनाने और उधार लेने वालों को डराने-धमकाने के लिए वे अवैध हथियार रखते थे। वे अक्सर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर समय बिताते थे, जिससे वे अजमल गुज्जर द्वारा चलाए जा रहे इंस्टाग्राम अकाउंट के संपर्क में आए, जो अत्याधुनिक हथियार हासिल करने के लिए इस्तेमाल होते थे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए बातचीत से धीरे-धीरे शहज़ाद भट्टी के साथ उनका सीधा संपर्क बन गया। आरिफ ने अजमल गुज्जर से 1,00,000 रुपये में एक जिगाना पिस्तौल खरीदी। पेमेंट दुबई में काम कर रहे अलग-अलग लोगों के अकाउंट का इस्तेमाल करके यूपीआई स्कैनर ट्रांज़ैक्शन के जरिए ट्रांसफर किया गया, और आखिर में यह पैसा नेटवर्क से जुड़े लोगों के जरिए मिला। इसके बाद,यह ग्रुप कथित तौर पर पंजाब से दिल्ली और एनसीआर में हेरोइन/चिट्टा की तस्करी और आगे वितरण में शामिल हो गया।

बचने के लिए ये तरीका अपनाते थे
पकड़े जाने से बचने के लिए उन्होंने डेड-ड्रॉप डिलीवरी सिस्टम अपनाया और तस्करी के कामों को आसान बनाने के लिए अनस को करण के साथ पंजाब भेजा। आरोप है कि शहज़ाद भट्टी ने आरिफ़ और अनस को हरियाणा के एक मशहूर रेस्टोरेंट दिल्ली और उत्तर प्रदेश के लोनी में रहने वाले कुछ खास लोगों और दिल्ली-एनसीआर में दूसरी संवेदनशील जगहों की रेकी (निगरानी) करने के लिए कहा था। उसने आरिफ़ और अनस को नशीले पदार्थों और गैर-कानूनी हथियारों को बेचकर पैसे जुटाने और उस पैसे का इस्तेमाल सौंपे गए कामों को पूरा करने और समुदाय के और युवाओं को बहला-फुसलाकर या भर्ती करके अपने साथ जोड़ने के लिए भी कहा। फरवरी 2026 में आरिफ़ ने अपने साथी हैप्पी को नशीले पदार्थ सप्लाई किए, जिसे बाद में पंजाब पुलिस ने पकड़ लिया। मोहित की गिरफ्तारी के बाद, अनस भाग गया और बाद में अपनी ज़मानत वापस लेने के बाद एक पुराने मामले में सरेंडर कर दिया।

दीपक की अजमल गुज्जर से मुलाकात
अजमल गुज्जर ने अनस को गैर-कानूनी हथियारों और नशीले पदार्थों (हेरोइन/चिट्टा) के लिए नए ग्राहक ढूंढने को कहा। अनस मंडोली जेल में बंद गैंगस्टर दीपक एग्रोला के लगातार संपर्क में था और उसने उसे अजमल गुज्जर से मिलवाया। दीपक एग्रोला जेल में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता था और जेल स्टाफ ने उसे ज़ब्त कर लिया था। इसके बाद, दीपक एग्रोला ने अनस की मदद से और अपने साथी जतन के ज़रिए अजमल गुज्जर से गैर-कानूनी हथियारों की खेप मंगवाई।

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