दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 का परिणाम (Delhi Assembly Election 2020 result) कुछ ही समय में साफ हो जाएगा। रुझानों से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आम आदमी पार्टी (AAP) को फिर से दिल्ली में सरकार बनाने का मौका मिलेगा। गौरतलब है कि इस चुनाव में जहां आम आदमी पार्टी ने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में किए अपने काम के नाम पर वोट मांगे, वहीं भाजपा राष्ट्रीय मुद्दों और प्रधानमंत्री मोदी के नाम को एजेंडा बनाया।
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पहले किसी और नाम से जानी जाती थी 'दिल्ली', जानें फिर कैसे मिला नाम
Tue, 11 Feb 2020 11:57 AM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया
Updated Tue, 11 Feb 2020 11:57 AM IST
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Delhi Tourist places
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delhi central secretriat
- फोटो : AmarUjala
- दिल्ली के पुराने नाम का जिक्र सबसे पहले पौराणिक काल में पाया जाता है। सबसे पहले पांडवों ने दिल्ली को इंद्रप्रस्थ के नाम से बसाया था। यह उस समय यह पांडवों की राजधानी थी।
- फिर हमारी राष्ट्रीय राजधानी का नाम इंद्रप्रस्थ से दिल्ली कैसे पड़ा? इसे लेकर भी कई कहानियां है। आइए जानते हैं वो कहानी...
लालकिला (फाइल फोटो)
- दिल्ली नाम को लेकर एक कहानी है जो सबसे ज्यादा प्रचलित है, वो है - ईसा पूर्व 50 में एक मौर्य राजा थे धिल्लु। उन्हें दिलु भी कहा जाता था। ऐसा कहा जाता है कि धिल्लु का अपभ्रंश होकर बाद में दिल्ली हो गया।
- एक तर्क यह भी दिया जाता है कि तोमरवंश के राजा धव ने इलाके का नाम ढीली रख दिया था। उनके ऐसा करने कि वजह बड़ी ही अजीबोगरीब बताई जाती है। ऐसा माना जाता है कि किले के अंदर लोहे का खंभा ढीला था। इस लिए उन्होंने इलाके का नाम ढीली रख दिया। यही ढीली शब्द बाद में दिल्ली हो गया।
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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन बोर्ड
- फोटो : Social media
- इतिहासकारों के बीच एक कहानी यह भी प्रचलित है कि तोमरवंश के दौरान जो सिक्के बनाए जाते थे, उन सिक्कों को देहलीवाल कहा जाता था। इसी से शहर का नाम दिल्ली हो गया।
- कुछ इतिहासकार ऐसा भी मानते हैं कि पहले के समय में दिल्ली के इलाके को हिंदुस्तान की दहलीज माना जाता था। यह दहलीज बाद में दिल्ली हो गई।
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दिल्ली की जामा मस्जिद (फाइल फोटो)
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- मौर्य सम्राट दिलु को लेकर कई दावे किए जाते हैं। एक धारणा के मुताबिक उनके सिंहासन के सामने एक कील थी, इस कील के बारे में कहा जाता था कि यह कील पाताल तक पहुंच गई है। राज्य के ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि जब तक यह कील है, तब तक मौर्य साम्राज्य का राज रहेगा। पूरी कहानी अगली स्लाइड में...
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