भारत के संशोधित नागरिकता अधिनियम (Citizenship Act 2019) के अनुसार अब तीन पड़ोसी देशों: पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता मिलना आसान हो जाएगा। लेकिन कानून बनने के बाद से ही इस कानून देशभर में जगह-जगह विरोध हो रहा है।
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पाकिस्तान में कैसे मिलती है नागरिकता, क्या धर्म भी है आधार
Fri, 20 Dec 2019 11:45 AM IST
Mohit Mudgal
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Mohit Mudgal
Updated Fri, 20 Dec 2019 11:45 AM IST
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भारत और पाकिस्तान के संविधान की प्रस्तावना
- भारत के संविधान की प्रस्तावना के अनुसार भारत एक समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य है। इसमें 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्दों को साल 1976 में संविधान में 42वें संशोधन में जोड़ा गया था।
- पाकिस्तान के संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है कि 'पाकिस्तान एक लोकतंत्रिक, स्वतंत्र, समानता, सहिष्णुता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों, जैसे इस्लाम द्वारा प्रतिपादित किया गया है और इसका पूरी तरह से पालन किया जाएगा। मुसलमान पवित्र कुरान और सुन्नत द्वारा रखे गए शिक्षओं और अवश्यक्ताओं के अनुसार व्यक्तिगत और सामूहिक क्षेत्रों में अपने जीवन को निर्देशित करने के लिए सक्षम होंगे।'
कौन है पाकिस्तानी नागरिक
- पाकिस्तान एक इस्लामिक देश है, पर पाकिस्तान में नागरिकता के लिए धर्म से संबंधित कोई प्रावधान नहीं है।
- पाकिस्तान का नागरिकता अधिनियम 1951, भारत के नागरिकता अधिनियम ने काफी हद तक मिलता जुलता है।
- पाकिस्तान नागरिकता अधिनियम, 1951 के खंड-6 के मुताबिक जो व्यक्ति एक जनवरी 1952 से पहले पाकिस्तान में प्रवास कर चुका है, वो पाकिस्तानी नागरिक है।
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पाकिस्तान में नागरिकता के और क्या हैं नियम
- इस अधिनियम का खंड-3 कहता है कि जिस व्यक्ति के माता-पिता या पूर्वज 31 मार्च 1973 से पहले पाकिस्तान में पैदा हुए हैं वो भी पाकिस्तान की नागरिकता का हकदार है।
- पाकिस्तान उन सभी लोगों को नागरिकता प्रदान कर करता है, जो 13 अप्रैल 1951 से पाकिस्तान में प्रवास कर गए।
- पाकिस्तान नागरिकता अधिनियम के खंड-5 में वंश द्वारा नागरिकता का प्रावधान है। इसमें कहा गया है कि अगर व्यक्ति के जन्म के समय उसके माता-पिता में से कोई एक भी पाकिस्तान का नागरिक था, तो उसे भी पाकिस्तान की नागरिकता मिल सकती है।
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भारत और पाकिस्तान के लिए कैसे अलग है 'धार्मिक स्वतंत्रता'?
- पाकिस्तान के संविधान की प्रस्तावना के अनुसार धार्मिक अल्पसंख्यकों को स्वतंत्र रूप से उनके धर्म का अभ्यास करने और संस्कृति को विकसित करने के लिए उचित प्रावधान किए गए हैं। अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्गों के हितों के रक्षा के लिए पर्याप्त प्रावधान किए जाएंगे।
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- पाकिस्तान केवल अपने नागरिकों को धर्म की स्वतंत्रता प्रदान करता है, जबकि भारत में यह स्वतंत्रता विदेशियों को भी दी गई है। इस वजह से विदेशी मिशनरियों को ईसाई धर्म के प्रचार करने का भी अधिकार प्राप्त है।
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