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जानिए, संस्कृत के प्रसार-प्रचार के लिए क्या है मोदी सरकार का पूरा 'प्लान'?

एजुकेशन डेस्क,अमर उजाला,नई दिल्ली Published by: ललित फुलारा Updated Mon, 02 Mar 2020 07:35 PM IST
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How the Centre’s planned Sanskrit universities will function
पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक - फोटो : अमर उजाला

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने सोमवार को राज्यसभा में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक, 2019 पेश किया। यह विधेयक लोकसभा में पिछले साल 11 दिसंबर को पास हुआ था। इस विधेयक का मकसद भारत की तीन डीम्ड यूनिवर्सिटी को केंद्रीय संस्कृत यूनिवर्सिटी में तब्दील करना है। अगर यह बिल राज्यसभा में पास हो जाता है तो, दिल्ली की दो और त्रिपुरा की एक डीम्ड यूनिवर्सिटी, केंद्रीय संस्कृत यूनिवर्सिटी बन जाएंगी। ये तीनों यूनिवर्सिटी- राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (नई दिल्ली), श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ (नई दिल्ली ) और राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ ( तिरुपति) हैं।

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How the Centre’s planned Sanskrit universities will function
रमेश पोखरियाल निशंक

क्या काम करेंगे ये संस्कृत विश्वविद्यालय?
इन संस्कृत विश्वविद्यालयों का काम संस्कृत भाषा के ज्ञान का प्रसार करना और संस्कृत भाषा को और उन्नत बनाना होगा। इन विश्वविद्यालयों में मानविकी, सामाजिक विज्ञान और विज्ञान के एकीकृत पाठ्यक्रम के लिए विशेष प्रावधान किया जाएगा। इन विश्वविद्यालयों के जरिए संस्कृत भाषा और उससे संबद्ध विषयों के समग्र विकास और संरक्षण के लिए लोगों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। अगली स्लाइड में पढ़िए क्या होगा इस यूनिवर्सिटी का फंक्शन....

 

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How the Centre’s planned Sanskrit universities will function
रमेश पोखरियाल ‘निशंक - फोटो : अमर उजाला

संस्कृत विश्वविद्यालयों के लिए बनेगी 15 सदस्यी कार्यकारी परिषद 

  • केंद्रीय संस्कृत यूनिवर्सिटी की नीतियों की समीक्षा अदालत करेगी। इनके विकास के लिए उपाय सुझाएगी।
  • एक कार्यकारी परिषद होगी जो कि मुख्य कार्यकारी निकाय का हिस्सा होगी। इसमें 15 सदस्य होंगे।
  • केंद्र सरकार द्वारा इन केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्त किया जाएगा।
  • इस परिषद में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का एक संयुक्त सचिव भी शामिल होगा।
  • इसके अलावा, संस्कृत भाषा के दो विद्वान भी कार्यकारी परिषद में शामिल होंगे।
How the Centre’s planned Sanskrit universities will function
रमेश पोखरियाल निशंक - फोटो : ट्विटर

यह कार्यकारी परिषद ही शिक्षकों की भर्ती करेगी और विश्वविद्यायल के वित्त का भी प्रबंधन करेगी। कार्यकारी परिषद ही अकादमी नीतियों को सुपरवाइज करेगी। एक बोर्ड ऑफ स्टडीज होगा, जो शोध के लिए विषयों को मंजूरी देगा और शिक्षण के मानकों में सुधार के उपायों की सिफारिश करेगा।
 

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डा.रमेश पोखरियाल निशंक - फोटो : google

संस्कृत विश्वविद्यालय की शक्तियां और कार्य

  • अध्ययन का पाठ्यक्रम बनाना और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना
  • डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट देना
  • दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के जरिए सुविधाएं देना।
  • संस्कृत भाषा के पाठ्यक्रम के लिए दिशा-निर्देश देना।
  • देश के अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तरह ही राष्ट्रपति इन केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयों के विजिटर होंगे। संस्कृत विश्वविद्यालयों के कामकाज की समीक्षा और निरीक्षण के लिए वो ही व्यक्तियों को नियुक्त करेंगे।
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