पश्चिमी किर्गिस्तान में उज्बेकिस्तान की सीमा से 70 किलोमीटर दूर अर्सलानबोब नाम का एक कस्बा है। करीब 13 हजार की आबादी वाला यह कस्बा बाबाश अटा की पहाड़ियों के बीच एक उपजाऊ घाटी में स्थित है। वसंत और गर्मियों में दो कुदरती झरने यहां सैलानियों को लुभाते हैं। लेकिन यहां की सबसे अनोखी चीज शरद ऋतु में होती है। वो है अखरोट।
वो जगह जहां होते हैं दुनिया में सबसे ज्यादा अखरोट, महीनों तक अपना घर-शहर छोड़कर चुनने जाते हैं लोग
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यह किंवदंतियों का हिस्सा है। कुछ लोगों के मुताबिक यह कहानी पैगंबर मोहम्मद साहब से जुड़ी है, जिन्होंने एक माली को अखरोट के बीज दिए थे और जंगल में जाकर लगाने को कहा था। लंबे सफ़र के बाद वह माली अर्सलानबोब पहुंचा। बर्फ से भरी पहाड़ी चोटियों की तलहटी में उसने एक जगह ढूंढी जहां का मौसम बहुत सुहाना था।
वहां साफ पानी की नदियां थीं और जमीन उपजाऊ थी। सही जगह देखकर उसने बीजों को रोप दिया। सदियों बाद वहां अखरोट के जंगल तैयार हो गए।
दूसरी कहानी
- एक दूसरी किंवदंती कुछ इस तरह है कि यूरोप में अखरोट के ज्यादातर पेड़ अर्सलानबोब के जंगलों से ही गए हैं। दो हजार साल पहले सिकंदर ने उन्हें फैलाया था। इस कहानी के मुताबिक जब सिकंदर की सेना पूर्वी एशिया की तरफ कूच कर रही थी तब इस घाटी में रुकी थी।
- युद्ध में मिले घावों के कारण कुछ सिपाही आगे नहीं जा सकते थे। वे अर्सलानबोब से कुछ किलोमीटर की दूरी पर रुक गए। सैनिकों को जंगल में अखरोट, सेब और अन्य फल बहुतायत में मिले थे। उन्हें खाकर ही वे तुरंत ठीक हो गए और अपने कमांडर के पास पहुंच गए।
- इस जगह को अब यारदार कहा जाता है। उज्बेक भाषा में यारदार का शाब्दिक अर्थ घायल होता है।
घर-शहर छोड़ महीनों तक जंगल में अखरोट चुनने जाते हैं लोग
- फसल चक्र के अनुसार वैसे तो अखरोट की फसल अक्तूबर की शुरुआत में तैयार होती है। लेकिन अर्सलानबोब के परिवार सितंबर के मध्य से ही पहाड़ी जंगल की ओर जाने लगते हैं।
- करीब 3000 परिवार यहां के अपने घर छोड़ देते हैं और 385 वर्ग किलोमीटर में फैले पहाड़ की दक्षिणी ढलानों की ओर चले जाते हैं। गांव से करीब घंटे भर की पैदल दूरी पर स्थित इस जंगल में दुनिया का सबसे अधिक अखरोट पैदा होता है।
- लोग अपने मवेशियों को भी साथ ले जाते हैं। ये लोग स्थानीय पेड़ों से अखरोट जमा करते हुए चलते हैं। उनके थैलों में 20 किलो तक अखरोट आ जाते हैं।
- स्थानीय कानून के अनुसार जंगल की जमीन वन विभाग की संपत्ति है। लेकिन अर्सलानबोब के परिवार कई हेक्टेयर जमीन किराये पर ले लेते हैं। दो महीने तक ये परिवार यहां कैंप में रहते हैं और खेतों में काम करते हैं।
- यहां अखरोट के कई पेड़ हैं जो सदियों पुराने हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अखरोट के ये पेड़ एक हजार साल तक जी सकते हैं और उनके तने का व्यास 2 मीटर तक हो सकता है।
पैसों की जगह अखरोट की लेन-देन
- अखरोट के मौसम में दुकानकार पैसे की जगह अखरोट लेते हैं। अखरोट के किसान फसल के बदले खाने-पीने और घर के काम आने वाली चीजें खरीदते हैं। बच्चे उनके बदले चॉकलेट, केक और आइसक्रीम खरीदते हैं।
- अर्सलानबोब में 11 तरह के अखरोट मिलते हैं। उसके दाने जितने बड़े होते हैं, क़ीमत उतनी ही अच्छी मिलती है। छिलके उतारे हुए अखरोट छिलके वाले अखरोट से महंगे बिकते हैं. स्थानीय बाजारों में इसका भाव 500 सोम (7.16 डॉलर) तक हो सकता है।
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सदियों से कैसे बचा है अखरोट के ये जंगल
- अर्सलानबोब के लोगों के साथ-साथ वन विभाग के प्रयासों से अखरोट के जंगल सदियों से बचे हुए हैं। जब कोई परिवार यहां जमीन का पट्टा लेता है तो इसकी अवधि 49 साल तक हो सकती है।
- लोग अपने सबसे अच्छे अखरोट के बीज वन विभाग को देते हैं, जो उनको अपनी नर्सरी में और जंगल में लगा देता है जिससे नये पेड़ तैयार होते रहें।
- सूखी डालियों को काटने के लिए भी स्थानीय रेंजर की अनुमति लेनी पड़ती है। पेड़ों को बिना इजाजत काटने पर जुर्माना लगता है।
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