क्षेत्रफल के आधार पर राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है। आजादी के बाद दो साल बाद राजस्थान एक राज्य के तौर पर भारत में शामिल हुआ था। आधिकारिक तौर पर 30 मार्च, 1949 को राजस्थान राज्य का गठन हुआ था। इसलिए, प्रत्येक वर्ष 30 मार्च के दिन को राजस्थान दिवस के तौर पर मनाया जाता है। राजस्थान को 'राजाओं की भूमि' और 'रजवाड़ों की धरती' के रूप में जाना जाता है। यहां के राजाओं का इतिहास बड़ा गौरवशाली रहा है।
राजस्थान दिवस 2021 : जानिए क्या है महत्व, राजस्थान का इतिहास और राजस्थान का भूगोल
- देश का सबसे बड़ा राज्य राजस्थान भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है
- 30 मार्च के दिन को राजस्थान दिवस के तौर पर मनाया जाता है
- 30 मार्च, 1949 को राजपूताना क्षेत्र भारत गणराज्य में सम्मिलित हुआ था
राजस्थान का भूगोल
- राजस्थान राज्य भौगोलिक आधार पर नौ क्षेत्रों में विभाजित है। ये नौ क्षेत्र अजेयमेरु (अजमेर), हाड़ौती, ढूंढ़ाड़, गोड़वाड़ (गोरवार) , शेखावाटी, मेवाड़, मारवाड़, वागड़ और मेवात हैं।
- ये सभी क्षेत्र अपनी अलग अूनठी विरासत, संस्कृति, भाषा, जलवायु और कला के लिए जाने जाते हैं। इन क्षेत्रों का राजस्थान के कलात्मक योगदान में समान रूप से हिस्सेदार हैं।
- भरतपुर के पास केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, जो अपने पक्षी जीवन के लिए जाना जाता है, एक विश्व धरोहर स्थल है।
- राज्य में तीन नेशनल टाइगर रिजर्व यानी राष्ट्रीय बाघ संरक्षित क्षेत्र हैं।
- इनमें से एक सवाई माधोपुर में रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, दूसरा अलवर में सरिस्का टाइगर रिजर्व और तीसरा कोटा जिले में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व है।
- राज्य में एक दर्जन से अधिक अभयारण्य भी हैं।
- राजस्थान के पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी भाग मरुस्थलीय और अर्द्ध मरुस्थलीय है। इसे ग्रेट इंडियन डेजर्ट थार के नाम से जाना जाता है।
- वहीं, दक्षिण-पूर्वी भाग मैदानी और पठारी क्षेत्र है।
- प्रशासनिक दृष्टि से राजस्थान में सात संभाग (डिवीजन या मंडल) हैं।
- राज्य में कुल 33 जिले हैं।
राजस्थान का इतिहास
ज्ञात तौर पर राजस्थान का इतिहास पांच हजार साल पहले का है। भारत की आजादी के पहले तक राजस्थान में अलग-अलग क्षेत्रों में राज घराने थे। राजस्थान के सभी राजाओं का अपना गौरवशाली इतिहास है। विदेशी आक्रमणों के दौर में भी राजस्थान के रजवाड़े नहीं झुके। यहां के राजघरानों की अपनी अलग समृद्ध वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत है, जो तमाम विविधताओं की समावेशी है।
राजस्थान का प्राचीन इतिहास
- राजस्थान के प्राचीन इतिहास को देखें तो यहां पर मत्स्य महाजनपद, कुरू महाजनपद, शूरसेन महाजनपद, अवंती महाजनपद प्रभावी रूप से रहे।
- इनके अलावा यौद्धेय, राजन्य, अर्जुनायन, शाल्व, मालव, शिवि जनपदों का भी राज रहा।
- राजस्थान में मौर्य शासन, गुप्त शासन, यवन-शुंग, कुषाण, शक क्षत्रप, हूण और वर्धन साम्राज्य भी रहा है।
- इनके बाद राजपूत वंशों ने लगभग 700 ईस्वी से राजस्थान के विभिन्न हिस्सों पर शासन किया।
- कुछ हिस्सों में गुर्जर प्रतिहार वंश और चौहान वंश का शासन रहा है।
- प्रतिहारों ने 750-1000 ईस्वी के दौरान राजस्थान और उत्तरी भारत के अधिकांश क्षेत्रों पर शासन किया।
वर्चस्व की जंग
- प्राचीन राजस्थान में 1000-1200 ईस्वी की अवधि के बीच चालुक्य, परमार और चौहान वंश के बीच वर्चस्व की जंग देखी गई।
- इसका लाभ मुगल आक्रांताओं को भी मिला।
- मुगल शासक अकबर के काल के दौरान राजस्थान के रजवाड़े पहली बार राजनीतिक रूप से एकजुट हुए थे।
- 13वीं शताब्दी ईस्वी की शुरुआत में, मेवाड़ को राजस्थान के सबसे शक्तिशाली क्षेत्र के रूप में देखा गया था।
- मुगलों ने 1707 के बाद अपने साम्राज्य में गिरावट देखी।
- 19वीं सदी की शुरुआत पिंडारियों के आक्रमण से हुई।
राजस्थान के महान राजा और महाराजा
राजस्थान का इतिहास यहां के वीर राजाओं की वीरता की हजारों सच्ची गाथाओं के लिए भी जाना जाता है। राजस्थान के प्रारंभिक इतिहास में कुछ महान राजा-महाराजा शामिल हैं। इनमें से कुछ के प्रमुख राजा-महाराजाओं के नाम यहां दिए गए हैं। इनके अलावा भी राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में कई अन्य वीर राजा-महाराजाओं का अपना समृद्ध शासन रहा है।
- सम्राट पृथ्वीराज चौहान
- सम्राट हेम चंद्र विक्रमादित्य (जिन्हें हेमू के नाम से भी जाना जाता है),
- गुहिल राजवंश के संस्थापक राजा बप्पा रावल
- हिंदुपत राणा सांगा (महाराणा संग्राम सिंह)
- मेवाड़ के महाराणा उदय सिंह
- मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा महाराणा प्रताप सिंह
- महाराजा सूरजमल
- राजा मान सिंह
