भारत एक ऐसा देश है जहां पर महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है। यह दर्जा शायद यूं ही नही दिया गया है। भारत के निर्माण में कुछ ऐसी महिलाओं ने भी योगदान दिया है जिसे आज की युवा पीढ़ी शायद ही जानती हो। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर हम आपको ऐसी ही कुछ महिलाओं के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने अपनी काबिलियत के बल पर देश का नाम रोशन किया।
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Women's day 2020: भारत की पांच शक्तिशाली महिलाएं जिन्होंने दुनिया में किया देश का नाम रोशन
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jaya Tripathi
Updated Sun, 08 Mar 2020 10:07 AM IST
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Women's day 2020
- फोटो : amar ujala
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पद्मावती बंदोपाध्याय
पद्मावती बंदोपाध्याय :
- पद्मावती बंदोपाध्याय भारतीय वायु सेना की पहली एयर मार्शल थीं। उन्होंने 1968 में वायु सेना ज्वॉइन की और 1978 में डिफेंस सर्विस स्टाफ कोर्स को पूरा किया। वे एविएशन मेडिसिन विशेषज्ञ बनने वाली पहली महिला अधिकारी थीं।
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सुचेता कृपलानी
सुचेता कृपलानी:
- ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है जहां पर महिलाओं ने अपनी धाक न जमाई हो। भारत की राजनीति में पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का शौभाग्य सुचेता कृपलानी को जाता है। सुचेता कृपलानी 1963 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने 1971 मे अपने राजनीतिक करियर को अलविदा कह दिया। 1 दिसंबर 1974 को सुचेता कृपलानी का देहांत हो गया।
सावित्रीबाई फुले
सावित्रीबाई फुले :
- उन्नीसवीं सदी के दौर में भारतीय महिलाओं की स्थिति बड़ी ही दयनीय थीं, तब सावित्रिबाई फुले ने शिक्षा को लेकर अलख जगाई। सन् 1848 में जब सावित्रीबाई फुले स्कूल में पढ़ाने जाती थीं तो वे आपने साथ दो साड़ियां स्कूल ले जाती थीं, एक पहनकर और एक झोले में रखकर। क्योंकि रास्ते में जो लोग रहते थे उनका मानना था कि शूद्रों को पढ़ने का अधिकार नहीं है इस लिए उनपर गोबर फेंका जाता था, जिसकी वजह से कपड़े पूरी तरह से गंदे हो जाते थे। उन्होंने इन सब के बाद भी पुणे में लगभग 18 स्कूल खोले।
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अन्ना राजम मल्होत्रा
अन्ना राजम मल्होत्रा:
- अन्ना राजम मल्होत्रा भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला थीं। वे 1951 बैच की आईएएस अधिकारी रहीं। उन्होंने मद्रास कैडर चुना था। अन्ना ने अपने कार्यकाल में 7 मुख्यमंत्रियों के अंडर कार्य किया। साल 1989 में उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
