25 Years Of Gupt: काजोल ने इस फिल्म में लिया करियर का सबसे बड़ा रिस्क, इसलिए रवीना टंडन हुईं फिल्म से बाहर
बॉबी से पहले अक्षय और सनी के नाम
फिल्म ‘गुप्त’ की कहानी लिखते समय इसके लेखक, निर्दशक राजीव राय के दिमाग में लीड रोल के लिए दो नाम थे, अक्षय कुमार और सनी देओल। सनी देओल के साथ वह ‘त्रिदेव’ और ‘विश्वात्मा’ बना चुके थे और अक्षय कुमार के साथ फिल्म ‘मोहरा’। राजीव राय ने कहानी का जिक्र अक्षय कुमार से भी किया और सनी देओल से भी। सनी देओल ने ही राजीव को सलाह दी कि ये फिल्म उन्हें बॉबी देओल के साथ बनानी चाहिए क्योंकि उनकी पहली फिल्म ‘बरसात’ तब बस रिलीज ही होने वाली थी और बॉबी के करियर की दूसरी फिल्म के लिए ये कहानी सनी को परफेक्ट लगी। राजीव राय को भी बात सही लगी और उन्होंने बॉबी देओल को साइन करके फिल्म की शूटिंग 1996 के शुरू में ही करने की तैयारी शुरू कर दी। फिल्म में सबसे पहले बॉबी के साथ साइन हुई हीरोइन थीं रवीना टंडन। रवीना के साथ बॉबी का फोटोशूट भी कराया गया जो फिल्म के टीजर के तौर पर कुछ जगहों पर छपा भी। लेकिन, तभी ‘बरसात’ के आखिरी शेड्यूल में बॉबी देओल अपनी टांग तुड़वा बैठे।
रवीना और करिश्मा के बाद मनीषा
तारीखों के चक्कर में रवीना टंडन फिल्म ‘गुप्त’ का हिस्सा नहीं रहीं। रवीना को फिल्म में वही रोल करना था जो बाद में मनीषा कोइराला के हिस्से आया। फिल्म में बॉबी देओल की मंगेतर शीतल चौधरी का ये किरदार मनीषा से पहले करिश्मा कपूर को भी ऑफर हुआ था लेकिन बात किन्हीं वजहों से बन नहीं सकी। बॉबी देओल और करिश्मा कपूर की जोड़ी इसके बाद पहली बार बनी थी निर्देशक कुंदन शाह की फिल्म ‘हम तो मोहब्बत करेगा’ में। मनीषा कोइराला के पास भी राजीव राय पहले फिल्म में बॉबी देओल के निभाए किरदार साहिल सिन्हा की बचपन की दोस्त ईशा दीवान के रोल के लिए ही गए थे लेकिन मनीषा ने लिया शीतल चौधरी का किरदार और ईशा के रोल में इसके बाद आईं काजोल।
एक कहानी पर बनी तीन फिल्में
फिल्म ‘गुप्त’ की कहानी बहुत कुछ 1976 में प्रकाशित अंग्रेजी उपन्यास ‘गुड चिल्ड्रेन डोंट किल‘’ के आसपास की कहानी है। इसी उपन्यास पर ऋषि कपूर के करियर की दूसरी फिल्म ‘खेल खेल में’ भी बनी थी। और, इसी उपन्यास की कहानी पर बनी अक्षय कुमार का करियर चमका देने वाली फिल्म ‘खिलाड़ी’। ‘खिलाड़ी’ की रिलीज के पांच साल बाद जब ‘गुप्त’ लिखी गई तो राजीव राय ने इसमें तमाम सारी बातें ऐसी डालीं जो उस वक्त के सिने दर्शकों को खूब भाईं। काजोल को फिल्म में जिस तरह पेश किया गया, वह पूरा आइडिया राजीव राय का ही था। शब्बीर बॉक्सवाला ने सह पटकथा लेखक के रूप में इस पूरे विचार को पूरी फिल्म में बुन दिया। काजोल ने जब ये फिल्म साइन की तो वह ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ की कामयाबी में झूम रही थीं। उन्होंने अपने करियर का ये बड़ा रिस्क लिया और ‘डीडीएलजे’ में फिल्मफेयर का बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड जीतने के बाद इस फिल्म में फिल्मफेयर का बेस्ट विलेन अवार्ड जीतकर उन्होंने अपनी काबिलियत की चमक चारों तरफ बिखेर दी।
काजोल का बेहतरीन अभिनय
फिल्मफेयर बेस्ट परफॉर्मेंस इन ए निगेटिव रोल का अवार्ड अभिनेत्रियों में काजोल के अलावा सिर्फ प्रियंका चोपड़ा ने फिल्म ‘एतराज’ के लिए जीता है। इस पुरस्कार के लिए नामित होने वाली अदाकाराओं में फिल्म ‘प्यार तूने क्या किया’ के लिए उर्मिला मातोंडकर, फिल्म ‘मकड़ी’ के लिए शबाना आजमी, फिल्म ‘जिस्म’ के लिए बिपाशा बसु, फिल्म ‘अरमान’ के लिए प्रीति जिंटा और फिल्म ‘कलयुग’ के लिए अमृता सिंह शामिल हैं। काजोल से इस किरदार पर अब भी बात करो तो वह चहक उठती हैं। वह मानती हैं, ‘फिल्म ‘गुप्त’ में इशा दीवान का किरदार करना एक बहुत बड़ी चुनौती भी थी और करियर के लिहाज से बहुत बड़ा खतरा भी। लेकिन, लाइफ मे थोड़ा रिस्क तो लेना ही चाहिए।’ काजोल को कंफर्ट जोन से बाहर जाकर कुछ अलग करना शुरू से पसंद रहा है। हां, ये वह बिल्कुल नहीं मानतीं कि गुप्त जैसी फिल्म का भी कोई सीक्वेल बन सकता है। वह तो यहां तक कहती हैं कि उन्होंने जितनी भी फिल्में अब तक अपने करियर में की हैं, उनमें से किसी का ना तो रीमेक होना चाहिए और न ही उसकी सीक्वेल बननी चाहिए।