बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के बेटे और अभिनेता अभिषेक बच्चन पिछले काफी समय से ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर अपने अभिनय का लोहा मनवा रहे हैं। ऐसा लग रहा है मानो ओटीटी ने उनके करियर को फिर से एक नई उड़ान दे दी हो। उनकी आखिरी पांच फिल्में कोरोना काल में लगातार ओटीटी पर रिलीज की गई हैं। साल 2020 में फिल्म 'लूडो' से शुरू हुआ यह सफर इस साल रिलीज हुई फिल्म 'दसवीं' तक कब आ पहुंचा किसी को पता नहीं चला। लेकिन अब, जब कोरोना का भयानक असर दुनिया पर से कम होने लगा है तो धीरे-धीरे मनोरंजन की दुनिया भी पटरी पर लौट रही है। जैसे-जैसे फिल्में बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं, वैसे-वैसे बॉक्स ऑफिस पर कमाई के आंकड़ों की चर्चाएं फिर से शुरू हो गई हैं। लेकिन अभिषेक बच्चन को ओटीटी पर उनकी फिल्में रिलीज होने का जरा दुख नहीं है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में अभिषेक ने अपने ओटीटी के सफर के बारे में खुलकर बात करते हुए कई चीजों से पर्दा उठाया।
Abhishek Bachchan: ओटीटी पर अभिषेक बच्चन का बड़ा बयान, बोले- "सिनेमाघरों से ज्यादा है ओटीटी की पहुंच"
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ओटीटी की पहुंच ज्यादा
अभिषेक के करियर ने काफी लंबे समय बाद रफ्तार पकड़ी है। ओटीटी पर उनके काम को दर्शकों की बहुत सरहाना मिली है। ऐसे में जब अभिषेक से पूछा गया कि क्या उन्हें कभी फर्क पड़ा है कि उनकी फिल्मों को बड़े पर्दे की बजाय ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया जा रहा है। इसका जवाब देते हुए 46 वर्षीय अभिनेता ने कहा," मैं एक एक्टर हूं। मेर काम एक्टिंग करना है। इस बात को कोई झुठला नहीं सकता कि हम सभी को बड़े पर्दे पर काम करना बहुत पसंद है, लेकिन मुझे लगता है कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर होना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि ओटीटी की पहुंच ,सिनेमाघरों के मुकाबले कई ज्यादा लोगों तक है।"
ओटीटी का धन्यवाद
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अभिषेक ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का शुक्रिया अदा करना नहीं भूले। उनका मानना है कि फिल्म अब ज्यादा दर्शकों तक पहुंच पाती है और इन दर्शकों में भारत के इंटीरियर पार्ट्स में रहने वाले लोग भी हैं। अभिषेक ने कहा, "चाहे वह लूडो हो या द बिग बुल इन फिल्मों को बहुत लोगों ने देखा...। अगर बात दसवी की करें तो, 400 मिलियन लोगों के लिए यह वेब पर एक बटन दूर थी। अगर हम इसपर बहस भी करने चलें तो केवल 10 प्रतिशत लोग ऐसे होंगे, जिन्होंने फिल्म सिनेमाघरों में देखना पसंद किया होगा। यह कुल 40 मिलियन लोग बैठते हैं और अगर हम इस हिसाब से टिकट का अव्रेज निकालें तो भारत में 120 रुपये का टिकट होता है। हम इसका हिसाब लगाएं तो, जो फिगर निकलकर आती है वो बहुत ही बढ़िया है।"
ओटीटी पर आंकड़ें न होना अच्छी बात
हाल के दिनों में, यह देखा गया है कि बॉक्स-ऑफिस पर फिल्मों की कमाई के आंकड़े देखने वालों की मानसिकता को प्रभावित करते हैं। फिल्म की कमाई आज के समय में यह तय करने में एक महत्पूर्ण कारक बन जाती है कि दर्शक सिनेमाघरों में फिल्म देखना चाहते हैं या नहीं। अभिषेक इस बात से खुश हैं कि वेब पर अभी यह नंबर गेम मौजूद नहीं है। वह कहते हैं, "कितनी अच्छी बात है कि ओटीती प्लेटफॉर्म इस तरह का डेटा जारी नहीं करते हैं। लेकिन बॉक्स ऑफिस के यह आंकडे़ं वर्षों से दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। पहले कोई फिल्म अच्छी हो या न हो, वह फोकस में रहा करती थी।"