हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक भारत भूषण की आज पुण्यतिथि है। 50 के दशक में लड़कियां भारत भूषण के लुक्स और चार्मिंग पर्सनालिटी की दीवानी थीं। उस दौर में जब राज कपूर, देवानंद और दिलीप कुमार का दौर था, तब उस समय भारत भूषण ने अपने लुक्स और बेहतरीन अदाकारी के दम पर अपनी एक अलग पहचान बनाई। भारत ने 'बैजू बावरा', 'आनंदमठ', 'मिर्जा गालिब' और 'मुड़ मुड़ के ना देख' जैसी बेहतरीन फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया। फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे महान कलाकारों की कमी नहीं रही है, जिन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए परिवार और समाज के ताने सुने हों, लेकिन भारत भूषण एक ऐसे अभिनेता हैं, जिन्होंने अपने बचपन में फिल्म देखने को लेकर अपने पिता की मार तक खाई है। उनके पिता को उनका फिल्म तक देखना पसंद नहीं था, लेकिन फिर भी वह अपने जमाने के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता बनकर उभरे। आज ब्लैक एंड वाइट सिनेमा के दौर के मशहूर अभिनेता भारत भूषण की पुण्यतिथि के मौके पर जानते हैं, उनके जीवन से जुड़े कुछ अनसुने किस्से...
Bharat Bhushan: फिल्म देखने पर बचपन में हुई थी खूब पिटाई, फिर ऐसे हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार बने भारत भूषण
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पिता ने फिल्म देखने पर मारा
भारत भूषण का जन्म 14 जून 1920 को उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुआ था। दो साल की उम्र में ही भारत की मां गुजर गई थीं। भारत के पिता एक पक्के आर्य समाजी थे। उन्हें बच्चों का फिल्मी देखना बिल्कुल भी पसंद नहीं था। भारत में इंटरव्यू में बताया था कि बचपन में जब उनके पिता किसी काम के सिलसिले में बाहर गए थे तो वह अपने साथियों के साथ मिलकर फिल्म देखने चले गए थे। जब इस बारे में उनके पिता को भनक लगी तो उन्होंने उनकी खूब पिटाई की थी।
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पिता से हुए अलग
अपनी पिता की मार का भारत पर गहरा असर पड़ा और वह उनसे अलग रहने लगे। अपने पिता से अलग रहते हुए ही भारत ने पढ़ाई पूरी की। इस दौरान उन्होंने शास्त्रीय संगीत भी सीखा। गायक बनने का सपना लेकर भारत भूषण मुंबई पहुंचे, लेकिन अभिनय के दम पर उनका सिक्का चमका। निर्देशक केदार शर्मा की 1941 में आई फिल्म 'चित्रलेखा' में छोटी भूमिका के साथ भारत ने अपने अभिनय की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने कई फिल्में कीं, लेकिन उन्हें अभिनेता के तौर पर पहचान मिली निर्देशक विजय भट्ट की क्लासिकल फिल्म 'बैजू बावरा' से। इसके बाद लगातार वह कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते गए।
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अर्श से फर्श पर आए भारत
एक समय ऐसा आया जब उनकी फिल्म 'दूज का चांद' बॉक्स ऑफिस पर बेहद ही बुरी तरीके से फ्लॉप रही और भारत को काफी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद से ही भारत के सितारे गर्दिश में चले गए। भारत को अपने बंगले समेत कई सारी प्रॉपर्टी बेचनी पड़ी। फिल्मों में उन्होंने छोटे से छोटा रोल किया, लेकिन ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाए। 1960 में भारत भूषण सदमे में चले गए थे। हिंदी सिनेमा के सुनहरे इतिहास में भारत भूषण ने अपना नाम लिख दिया था। कभी शोहरत के शिखर पर बैठने वाले अभिनेता अपनी जिंदगी के आखिरी दिनों में पाई पाई के मोहताज हो गए थे। आखिरकार सुपरस्टार भारत भूषण 27 जनवरी 1992 को 72 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह गए।
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