1973 में रिलीज हुई फिल्म ‘जंजीर’ से एंग्री यंग मैन बनकर चमके अमिताभ बच्चन और 1973 में ही रिलीज हुई फिल्म ‘बॉबी’ से देसी बार्बी डॉल बनकर चमकीं डिंपल कपाड़िया। डिंपल कपाड़िया ने वैसे तो शादी के एक दशक से भी ज्यादा समय बाद वापसी करते हुए साल 1985 में रिलीज हुई निर्देशक रमेश सिप्पी की फिल्म ‘सागर’ में भी अपने हुस्न की अनदेखी अदाओं से अपने करोड़ो नए दीवाने बना लिए थे। लेकिन, उसके अगले साल रिलीज हुई फिल्म ‘जांबाज़’ में उनके जलवों के रंग निराले रहे। ये डिंपल कपाड़िया के करियर की सबसे बोल्ड फिल्म मानी जाती है। यही वह फिल्म है जिसमें श्रीदेवी का रंग रूप देख फिल्म निर्माता बोनी कपूर उनके दीवाने हो गए। फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ के गाने ‘काटे नहीं कटते ये दिन ये रात..’ में श्रीदेवी का शिफॉन साड़ी वाला मोहक, मादक अंदाज फिल्म ‘जांबाज़’ से ही प्रेरित होकर बोनी कपूर ने खुद रचा था। वैसे भारतीय सिनेमा के काऊब्वॉय कहलाने वाले फिरोज खान की फिल्म ‘जांबाज़’ जिन हादसों और हालात से गुजरते हुए परदे पर पहुंची वह भी किसी दिलेरी से कम नहीं है।
Bioscope S2: इसी फिल्म के गाने को देख श्रीदेवी पर मोहित हुए बोनी कपूर, अनिल कपूर संग यूं डोलीं डिंपल
जब सलीम खान के साथ घूमे फिरोज
साल 1972 में फिल्म ‘अपराध’ से फिरोज खान निर्देशक बने और उनकी इसके बाद बनी अगली दोनों फिल्में ‘धर्मात्मा’ और ‘कुर्बानी’ भी सुपरहिट फिल्में रहीं। ‘कुर्बानी’ ने फिरोज खान को इतनी दौलत दी कि उनके पास की तिजोरियां ये कमाई रखने के लिए कम पड़ गईं। लोग बताते हैं कि वह पहले फिल्म निर्माता और निर्देशक थे, जिन्होंने सिर्फ नोट गिनने के लिए अलग से एक टीम रखी हुई थी। उनके बंग्लुरु फार्म हाउस पर जिन्हें भी जाने का मौका मिला है, वे जानते हैं कि फिरोज खान ने उन दिनों कैसे दोनों हाथों से दौलत लुटाई और उन्हें भी जानते हैं जिन्होंने खूब जतन करके ये दौलत लूटी भी। फिल्म ‘कुर्बानी’ में फिरोज खान का हर दांव बिल्कुल सही पड़ा था। फिल्म ब्लॉकबस्टर थी। फिल्म का म्यूजिक उससे भी बड़ा हिट था। और, फिरोज खान को अब एक नई तरह का सिनेमा अपने सपनों में दिखने लगा था। इस सिनेमा में परंपरागत कहानियों की कोई जगह नहीं थी। सलीम-जावेद वाले सलीम खान को वह अपने साथ विदेश घुमाने ले गए। दोनों कोई महीना भर साथ घूमे। विदेश के बार देखे, पब देखे, अय्याशी के वे सारे मुकाम देखे, जहां फिरोज खान अपनी एक ऐसी फिल्म देख रहे थे, जिसे वह इंटरनेशनल मार्केट में रिलीज कर सकें। वह ऐसी फिल्म बनाना चाहते थे जो हिंदी में देसी दर्शकों की पसंद के हिसाब से बने और अंग्रेजी में बने तो ऐसे दृश्यों के साथ कि हॉलीवुड को भी मात कर दे। ‘कुर्बानी’ 1980 में रिलीज हुई और अगले छह साल तक फिरोज खान ने इतने रंग बदले कि फिल्म इंडस्ट्री हैरान हो गई। लोग समझ ही नहीं पा रहे थे कि फिरोज खान असल में करना क्या चाह रहे हैं।
फिल्मों का दिलचस्प कॉकटेल
‘कुर्बानी’ की रिलीज से पहले फिरोज खान ने एक फिल्म 1977 में शुरू की थी जीनत अमान के साथ। लेकिन फिल्म का कुछ हिस्सा शूट करने के बाद उन्होंने ये फिल्म बंद कर दी और ‘कुर्बानी’ बनाने लगे। ‘कुर्बानी’ हिट हुई तो वे ‘कसक’ नाम की इस पुरानी फिल्म की तरफ फिर लौटे, इस बार उन्होंने इस फिल्म में जीनत अमान की जगह परवीन बाबी को लिया और साथ में रेखा भी आईं। फिरोज खान के अलावा फिल्म में शत्रुघ्न सिन्हा और संजीव कुमार भी थे। फिल्म की दो महीने शूटिंग हो चुकी थी और एक दिन परवीन बाबी मुंबई से लापता हो गईं। परवीन बाबी के जाने और सलीम खान के सीन में आने के बाद फिरोज खान ने ‘जांबाज’ नाम की नई फिल्म शुरू की। हिंदी और अंग्रेजी में एक साथ बनने वाली इस फिल्म के लिए फिरोज खान ने लंदन में तमाम विदेशी मॉडल्स के साथ रेखा पर एक गाना शूट किया। बताते हैं कि रेखा से फिरोज खान फिल्म में ऐसे सीन्स करवाना चाहते थे, जिनके लिए रेखा कतई तैयार नहीं थी। दोनों में तगड़ा झगड़ा हुआ और फिरोज खान ने फिल्म से रेखा को निकाल दिया। लोग अब तक यही समझ रहे थे कि फिरोज खान अपनी पुरानी फिल्म ‘कसक’ को ही ‘जांबाज़’ के नाम से बना रहे हैं क्योंकि दोनों में दो हीरोइनें थी और दोनों के किरदार स्टेज सिंगर के थे।
रेखा से पंगा और बदल गई कहानी
रेखा से पंगा होने के बाद फिरोज खान ने फिर अपनी दिशा बदल दी। 1983 में उन्होंने एक नई फिल्म लॉन्च की और नाम हालांकि इसका भी ‘जांबाज़’ ही था लेकिन उन्होंने लोगों से जो स्टार कास्ट इस बार मिलवाई, वो पूरी तरह अलग थी। कहानी भी इस बार काफी अलग थी। कहानी इस बार दो भाइयों की थी, जिसमें एक जिम्मेदार पुलिस अफसर है और एक मस्तमौला टाइप का इंसान। दोनों के पिता के दोस्त की बेटी मुश्किल में होती है तो वह इनके यहां आकर रहने लगती है। छोटा वाला भाई उस पर लट्टू हो जाता है। लेकिन, शारीरिक संबंध बनाने पर जब उसे इग्नोर करने लगता है तो बदला लेने के लिए ये लड़की परिवार के साथ काम करने वाले एक इंसान को अपना दोस्त बना लेती है। ये दोस्त छोटे भाई से होने वाली झड़प में मारा जाता है और बड़े भाई पर अब जिम्मेदारी है छोटे भाई को कानून के हाथों में सौंपने की। फिल्म में एक कहानी इसके समानांतर और चल रही होती है जो है बड़े भाई और उसकी प्रेमिका की जो नशे की गिरफ्त में आकर अपनी जिंदगी खो बैठती है। फिल्म में बड़े भाई राजेश के किरदार में हैं फिरोज खान और छोटे भाई अमर बने अनिल कपूर। इनके घर में रहने आने वाली रेशमा बनीं डिंपल कपाड़िया और राजेश की प्रेमिका सीमा का किरदार बतौर स्पेशल अपीयरेंस फिल्म में किया श्रीदेवी ने।
श्रीदेवी का अनदेखा अवतार
श्रीदेवी ने पहले तो फिल्म ‘जांबाज़’ की कहानी सुनने के बाद फिल्म करने से मना कर दिया था। तब फिरोज खान ने फेंका अपना तुरुप का पत्ता और ये ये था श्रीदेवी से उनका तमिल में बात करना। फिरोज खान बहुभाषी इंसान थे और उनका तमिल में बात करना श्रीदेवी को भा गया। ‘जांबाज़’ ही पहली फिल्म है जिससे श्रीदेवी ने अपनी डबिंग करनी खुद शुरू की, वह भी फिरोज खान के हौसला बढ़ाने पर। इससे पहले की हिंदी फिल्मों में उनकी डबिंग प्रोफेशनल डबिंग कलाकार किया करते थे। फिल्म में उन पर फिल्माया गया और इंदीवर का लिखा ये गाना सुपर हिट रहा, ‘हर किसी को नहीं मिलता यहां प्यार जिंदगी में....’