श्रीदेवी का जादू हिंदी सिनेमा के दर्शकों के सिर थोड़ी देर से चढ़ा क्योंकि फिल्म ‘रानी मेरा नाम’ में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट और फिल्म ‘जूली’ में सेकंड लीड हीरोइन के तौर पर नजर आने के बाद वह अमोल पालेकर के साथ फिल्म ‘सोलवां सावन’ में बाकायदा लीड रोल कर चुकी थीं। लेकिन, उन्हें चमकना था तो जीतेंद्र की हीरोइन बनकर। 31 मई 1985 को रिलीज हुई फिल्म ‘मास्टरजी’ की रिलीज से पहले श्रीदेवी एक दर्जन से ज्यादा हिंदी फिल्में बतौर लीड हीरोइन कर चुकी थीं और इनमें से आठ फिल्में थीं जीतेंद्र के साथ। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी फिल्म ‘इंकलाब’ हिट हो चुकी थी। कमल हासन के साथ रिलीज हुई फिल्म ‘सदमा’ से वह समीक्षकों को भी भा चुकी थीं। तभी तमिलनाडु में एक फिल्म का ज़बर्दस्त हल्ला हुआ। फिल्म का नाम था, ‘मुनधनई मिदुचू’। फिल्म के हीरो के भाग्यराज के करियर की ये सबसे बड़ी हिट फिल्म साबित हुई।
Bioscope S2: ‘मास्टरजी’ के लिए लगी रीमेक की सबसे बड़ी बोली, अमिताभ की सिफारिश पर काका को मिली फिल्म
रीमेक की सबसे बड़ी बोली
लेखक, अभिनेता और निर्देशक के भाग्यराज का साउथ में जलवा रहा है। वह निर्देशक भी कमाल के हैं और अभिनेता उससे बड़े धमाल के। भाग्यराज की लिखी फिल्मों के कोई एक दर्जन रीमेक हिंदी में बन चुके हैं जिनमें अनिल कपूर की पहली सोलो हिट फिल्म ‘वो सात दिन’ से लेकर ‘मास्टरजी’, ‘आखिरी रास्ता’, ‘बेटा’, ‘राजा बाबू’, ‘अंदाज’, ‘गोपी किशन’, ‘मिस्टर बेचारा’ और ‘घरवाली बाहरवाली’ शामिल हैं। वैसे भाग्यराज भी अनिल कपूर की हिट फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ के तमिल रीमेक में बतौर हीरो काम कर चुके हैं। फिल्म ‘मुनधनई मिदुचू’ के रीमेक राइट्स तब पांच लाख रुपये में बिके थे, ये उस वक्त तक किसी तमिल फिल्म के रीमेक के लिए लगी सबसे बड़ी बोली थी।
अमिताभ बच्चन थे पहली पसंद
भाग्यराज का यहां जिक्र इसलिए क्योंकि फिल्म ‘मास्टरजी’ जब बननी शुरू हुई तो इसके निर्देशक के तौर पर पहला नाम उन्हीं का आया। इस फिल्म से पहले के भाग्यराज की फिल्म ‘मौना गीतांगल’ की रीमेक जीतेंद्र और रेखा की फिल्म ‘एक ही भूल’ भी सुपरहिट हो चुकी थी। भाग्यराज फिल्म ‘मास्टरजी’ में हीरो के तौर पर अमिताभ बच्चन को लेना चाहते थे। अमिताभ बच्चन ने ये कहानी सुनी भी पर बात बनी नहीं। के भाग्यराज भी जिद के पक्के इंसान ठहरे। उनका कहना था कि वह हिंदी में फिल्म जब भी बनाएंगे तो पहली फिल्म अमिताभ बच्चन के साथ ही बनाएंगे। दोनों की जोड़ी ‘मास्टरजी’ में तो नहीं बन सकी लेकिन के भाग्यराज को जल्दी ही ये मौका मिला फिल्म ‘आखिरी रास्ता’ में। ये फिल्म उन्होंने कमल हासन के लिए तमिल में लिखी थी ‘ओरु कैदियन डायरी’ के नाम से। ‘आखिरी रास्ता’ भी सुपरहिट फिल्म रही। इस फिल्म में के भाग्यराज ने अमिताभ बच्चन के साथ श्रीदेवी और जयाप्रदा को भी लिया था।
राजेश खन्ना की सेकंड इनिंग्स
जैसा कि मैंने पहले ही बताया, श्रीदेवी की फिल्म ‘हिम्मतवाला’ से लेकर ‘बलिदान’ तक उनके हिंदी सिनेमा के करियर में जीतेंद्र ही जीतेंद्र छाए हुए थे। तो जब इस बात की चर्चा चली कि के भाग्यराज की एक औऱ सुपरडुपर हिट फिल्म का रीमेक हिंदी में श्रीदेवी के साथ बनने जा रहा है तो जीतेंद्र निश्चिंत थे कि ये फिल्म तो उनके साथ ही बनेगी। लेकिन, फिल्म के प्रोड्यूसर आर सी शर्मा अमिताभ बच्चन को ये कहानी सुनाने के पहुंच गए। लेकिन, अमिताभ ने बताते हैं तब फिल्म के लिए राजेश खन्ना का नाम आगे कर दिया था। ‘राजपूत’, ‘डिस्को डांसर’, ‘सौतन’, ‘अवतार’, ‘अगर तुम ना होते’ जैसी फिल्मों से अपनी सेकंड इनिंग्स चमका रहे राजेश खन्ना को उन दिनों काम की कमी तो नहीं थी लेकिन फिल्म ‘मास्टरजी’ का किरदार ऐसा था कि एक बार इसकी कहानी सुनकर राजेश खन्ना का चेहरा भी दो सौ वाट के बल्ब की तरह चमक गया।
कहानी मास्टरजी की
फिल्म ‘मास्टर जी’ कहानी है एक ऐसे अध्यापक की जो गांव में अपने दुधमुंहे बच्चे के साथ नौकरी करने आता है। पढ़ाना और बच्चे को पालना दोनों काम वह एक साथ करता है। गांव की एक युवती अपने मसखरेपन के लिए चर्चित है। वह लोगों के साथ मजाक करती है। मास्टरजी के साथ भी वह ऐसा ही कुछ करने की कोशिश करती है, लेकिन अपनी पत्नी के गम से दुखी मास्टर उसे घास नहीं डालता। वह दूसरी शादी भी नहीं करना चाहता क्योंकि उसे नहीं पता कि नई मां उसके बेटे को कैसे पालेगी? दोनों के बीच अहं का टकराव होता है और वह मास्टरजी को नीचा दिखाने के लिए ‘मी टू’ जैसा आरोप लगा देती है। पंचायत दोनो की शादी करने का फैसला सुनाती है। शादी तो हो जाती है पर दोनों के बीच पति पत्नी जैसा रिश्ता नहीं बनता। उर्वशी बनकर मास्टरजी की ये तपस्या भंग करने के लिए जो कुछ आगे होता है वही फिल्म ‘मास्टरजी’ की कहानी है।