सब्सक्राइब करें

Bioscope S2: शापित फिल्म साबित हुई ‘जय संतोषी मां’, निर्माता का निकला दिवाला, हीरोइन का ऐसे हुआ अंत

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Mon, 31 May 2021 01:32 PM IST
विज्ञापन
Bioscope with Pankaj Shukla Jai Santoshi Maa 1975 Anita Guha Satram Rohra Kavi Pradeep C Arjun
‘जय संतोषी मां’ - फोटो : अमर उजाला

टेलीविजन पर ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ की कथाओं पर बने धारावाहिकों की जय जयकार होने से पहले बड़े परदे पर लंबे अरसे तक धार्मिक फिल्मों का बोलबाला रहा है। लेकिन, जैसी कामयाबी फिल्म ‘जय संतोषी मां’ ने हिंदी सिनेमा में पाई, वैसी न उसके पहले किसी हिंदी फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर मिली और न ही उसके बाद में। 1970 से लेकर 1979 के बीच रिलीज हुई हिंदी फिल्मों में फिल्म ‘जय संतोषी मां’ कमाई के मामले में आठवें नंबर पर रही। सिर्फ साल 1975 की बात करें जिस साल ये फिल्म रिलीज हुई थी तो उस साल ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमाई के मामले में रही थी नंबर दो पर। पहले नंबर जो फिल्म उस साल रही, उसका नाम तो आपको पता ही होगा! जी हां, ‘शोले’।



दशक की टॉप 10 फिल्मों में शामिल
आठवें दशक की टॉप 10 कमाई करने वाली फिल्मों में चार फिल्में अमिताभ बच्चन की रही हैं। इनके नाम हैं, ‘शोले’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’, और ‘अमर अकबर एंथनी’। बाकी बची फिल्मों में मनोज कुमार की तीन फिल्में ‘रोटी कपड़ा और मकान’, ‘संन्यासी’ और ‘दस नंबरी’, धर्मेंद्र की एक फिल्म ‘धर्मवीर’, देव आनंद की एक फिल्म ‘जॉनी मेरा नाम’, ऋषि कपूर की एक फिल्म ‘बॉबी’ और ‘जय संतोषी मां’। 30 मई 1975 को रिलीज हुई फिल्म ‘जय संतोषी मां’।

Trending Videos
Bioscope with Pankaj Shukla Jai Santoshi Maa 1975 Anita Guha Satram Rohra Kavi Pradeep C Arjun
‘जय संतोषी मां’ फिल्म का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

फिल्म ने शुरू किया नया पंथ
फिल्म ‘जय संतोषी मां’ से ही पूरा एक नया पंथ हिंदू समुदाय में शुरू हो गया। संतोषी माता के मंदिर इस फिल्म के बनने से पहले पूरे देश में गिने चुने ही थे। लेकिन इस फिल्म की कामयाबी ने कई लोगों को संतोषी माता के नाम पर तरह तरह के व्यवसाय खोलने के मौके दे दिए। लेकिन, कम लोगों को ही पता होगा कि ये फिल्म शुरू से शापित रही। इस फिल्म को बनाने में शामिल रहे लोगों का जीवन बहुत कष्टमय बीता। जिन जिन लोगों ने भी ‘संतोषी माता’ के नाम पर दूसरों से कपट करने की कोशिश की, सबको ईश्वरीय न्याय का सामना करना पड़ा। फिल्म बनाने वाले सतराम वोहरा के आखिरी दिन तो बहुत ही कंगाली में बीते।

विज्ञापन
विज्ञापन
Bioscope with Pankaj Shukla Jai Santoshi Maa 1975 Anita Guha Satram Rohra Kavi Pradeep C Arjun
‘जय संतोषी मां’ फिल्म का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

बैलगाड़ी भर भर बंबई पहुंचे लोग
फिल्म ‘जय संतोषी मां’ की कामयाबी भी बस ईश्वरीय चमत्कार ही है। ये उन दिनों की बात है, जब बंबई दादर के आगे बांद्रा और जुहू तक भी बमुश्किल ही आ पाया था। अंधेरी तक आने में तो लोग दस बार सोचते थे। लेकिन, एक दिन लोगों ने देखा कि बैलगाड़ियों की लंबी कतारें वसई-विरार की तरफ से पश्चिम में और मध्य मुंबई में कल्याण औऱ ठाणे की तरफ से आती ही चली जा रही हैं। पता चला कि कोई फिल्म लगी है शहर में, नाम है, ‘जय संतोषी मां’। ये करिश्मा सोमवार को हुआ। फिल्म ‘जय संतोषी मां’ ने अपने रिलीज वाले शुक्रवार को पहले शो में कमाए थे 56 रुपये, दूसरे में 64, इवनिंग शो की कमाई रही 98 रुपये और नाइट शो का कलेक्शन बमुश्किल सौ रुपये छू पाया था। शनिवार और इतवार भी कुछ खास नहीं रहा लेकिन मिल मजदूरों ने रविवार को फिल्म को देखने के बाद इसका जो प्रचार किया तो दूर दराज तक इसके किस्से फैल गए और सोमवार की सुबह सुबह जो हलचल शुरू हुई तो महीनों तक जहां जहां फिल्म ‘जय संतोषी मां’ लगी थी वहां मेला लगा रहा। इन सिनेमाघरों के सफाई कर्मचारी करने वाले तक शो के दौरान उछाले गए सिक्के बीन बीनकर मालदार हो गए।

Bioscope with Pankaj Shukla Jai Santoshi Maa 1975 Anita Guha Satram Rohra Kavi Pradeep C Arjun
‘जय संतोषी मां’ - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

अनीता गुहा को मिली देवी सी प्रसिद्धि
ये उन दिनों की भी बात है जब जोधपुर में मंडोर के पास संतोषी मां का एक मंदिर हुआ करता था। लोगों को पता भी नहीं था कि ऐसी कोई देवी पुराणों में हैं भी। खुद इस फिल्म में संतोषी मां का किरदार करने वाली अभिनेत्री अनीता गुहा को नहीं पता था कि ऐसी कोई देवी हैं। साल 2006 में स्टार गोल्ड पर फिल्म ‘जय संतोषी मां’ का पहली बार सैटेलाइट प्रसारण हुआ था। अनीता गुहा ने उस दौरान फिल्म को लेकर खूब बातें की थीं। तब तो खैर वह हिंदी सिनेमा के नए सितारों के बीच गुमनाम ही हो चुकी थीं, लेकिन उनके मुताबिक बांद्रा के उनके फ्लैट के सामने किसी जमाने में लोगों का हुजूम उमड़ता था। लोग सुबह से उनके दर्शन करने के लिए उनके फ्लैट के सामने खड़े रहते। वह घर से निकलतीं तो लोग अपने बच्चे उनकी गोद में डाल दिया करते थे। लोगों का विश्वास था कि ‘संतोषी मां’ का स्पर्श हो जाने के बाद उनके बच्चों का अनिष्ट नहीं होगा।

विज्ञापन
Bioscope with Pankaj Shukla Jai Santoshi Maa 1975 Anita Guha Satram Rohra Kavi Pradeep C Arjun
‘जय संतोषी मां’ फिल्म का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

कहानी सोलह शुक्रवार की
फिल्म ‘जय संतोषी मां’ की कहानी सत्यवती नाम की एक महिला की है जिसको उसके ससुराल वाले बहुत कष्ट देते हैं और फिर संतोषी मां की कृपा से उसके जीवन में सब ठीक हो जाता है। सत्यवती के पति बिरजू का रोल करने वाले यानी कि फिल्म के हीरो आशीष कुमार की मानें तो उन्होंने ही इस फिल्म का आइडिया फिल्म के प्रोड्यूसर सतराम रोहरा को दिया था। आशीष के बच्चे नहीं थे। उनकी पत्नी ने संतोषी मां के सोलह शुक्रवार व्रत रखने शुरू किए। व्रत के बीच में ही आशीष की पत्नी गर्भवती हो गईं तो बाकी बचे उपवासों के दिन आशीष ने ही अपनी पत्नी को शुक्रवार व्रत कथा सुनाई। अपने घर में बिटिया का जन्म होने के बाद आशीष ने ये बात सतराम के गुरु और फाइनेंसर सरस्वती गंगाराम को सुनाई जिन्होंने फिल्म शुरू करने के लिए 50 हजार रुपये दिए थे।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें Entertainment News से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और Movie Reviews आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed