अब जब 'यमला पगला दीवाना फिर से' आ रही है तो रेखा इस फिल्म में 'रफ्ता रफ्ता देखो आंख मेरी लड़ी है' को पर्दे पर गाती नजर आएंगी। सिनेमा का आकर्षण बचपन से रहा है। अपनी यथास्मरण चेतना की पहली फिल्म सत्यकाम थी। शायद छह-सात साल की उम्र होगी। उस समय पिताजी के विभाग में प्रत्येक शनिवार को कार्यालय का समय खत्म होने के बाद एक फिल्म दिखाई जाती थी। वहीं इसका अवसर मिला। सत्यकाम (1969) प्रख्यात फिल्मकार हृषिकेश मुखर्जी की फिल्म थी। सत्यकाम से सदाबहार अभिनेता धर्मेंद्र ऐसे पैठे कि उनकी फिल्में देखते-देखते ही बड़ा हुआ। जब तक लेखक नहीं हुआ था, सिनेमा पर लिखना शुरू नहीं किया था, तब तक प्रशंसक भर था।
फिर से यमला पगला दीवाना हुए धर्मेंद्र, खोले जिंदगी के बड़े राज, रेखा भी थीं साथ
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नब्बे के दशक में पहली बार मुंबई जाना हुआ। ऐसे ही क्षणों में अपने प्रिय महानायक से मिलने की ख्वाहिश बलवती होने लगी। भोपाल में मेरे साथी गजल गायक जुल्फिकार अली का परिचय धरम जी से था। वे सनी सुपर साउंड में काम कर चुके थे। एक दिन मैंने उनसे अपने मन की ख्वाहिश बताई। याद करता हूं, 1997 की 8 दिसंबर थी जब फोन पर धरम जी का तब काम देख रहे नवल जी ने मुझे उनसे जोड़ा। उनकी पहली आवाज, हैलो सुनील... हाऊ आर यू...मेरा गला खुश्क हो गया उत्तर देते हुए। मैंने उनको बहुत आदर के साथ जन्मदिन की बधाई दी।
उन्होंने आशीष की बौछार कर दी और मेरे उस विश्वास को पुख्ता कर दिया, जो मैं उनके व्यक्तित्व से जोड़कर कल्पना किया करता था। कुछ महीने बाद वह दिन भी आया जब अपने गुरु स्व. श्रीराम ताम्रकर के साथ मुंबई उनका इंटरव्यू करने गया। हम उस कमरे में बैठा दिए गए, जिसमें थोड़ी देर में वे आने वाले थे। अचानक एकदम खूबसूरत, स्मार्ट, बने-संवरे मुस्कुराते हुए धर्मेंद्र कमरे में आ गए। कह सकता हूं कि मेरी मुस्कुराहट, मेरी खुशी, मेरी पलकें, मेरी आंखें सब क्षण भर को स्थिर हो गईं। ताम्रकर जी और मैं, हम दोनों ने ही उनके पांव छुए।
एक सवाल से वे बड़े खुश हुए थे, जब उनसे कहा कि आप शोले का वह सिक्का हो जिसके दोनों तरफ हेड है, तो उठकर उन्होंने मुझे और ताम्रकर जी को गले लगा लिया था। वह लंबी बातचीत थी और आज बीस से अधिक वर्ष हो गए। अभी जब सिनेमा पर सर्वोत्तम लेखन के लिए विशेष उल्लेख के साथ नेशनल अवॉर्ड दिया जाना घोषित हुआ तो धरम जी को फोन करना भावुक क्षण था। वे बहुत खुश हुए, सदैव की तरह अनेक आशीष।
लगता है, कितना बड़ा मन और चाहने वालों के लिए बहुत संवेदनशील। जितने बड़े संघर्ष से अपना मुकाम बनाया, मन भी उतना ही बड़ा रखा। उनकी फिल्म 'यमला पगला दीवाना फिर से' का प्रदर्शन होने जा रहा है। धरम जी की वजह से ही रेखा इस फिल्म में 'कहानी किस्मत की' का प्रसिद्ध गाना 'रफ्ता रफ्ता देखो आंख मेरी लड़ी है', की याद को ताजा करने आई हैं।