इस साल वैलेंटाइंस डे से अगले हफ्ते रिलीज हुई धर्मा प्रोडक्शंस की फिल्म भूत पार्ट वन- द हॉन्टेड शिप का एक किरदार है, प्रोफेसर रघुवीर जोशी। जोशी इस कहानी में जो कर रहा है, वही काम 18 साल पहले आई फिल्म राज की कहानी में करते दिखे थे, प्रोफेसर अग्नि स्वरूप। किरदार अलग अलग। बीच में 18 साल का लंबा फासला। लेकिन, अभिनेता एक यानी आशुतोष राणा। इन दोनों किरदारों की चर्चा यहां इसलिए क्योंकि आज ही के दिन साल 1998 में रिलीज हुई फिल्म दुश्मन से जिस आशुतोष राणा ने हिंदी सिनेमा में बतौर विलेन अपना पहला बड़ा कदम बढ़ाया, उस कलाकार के लिए हिंदी सिनेमा पिछले 18 साल से कोई दमदार रोल ही नहीं लिख सका है।
बाइस्कोप: विलेन बनकर अदाकारी के शिखर को चूमा आशुतोष राणा ने, अब भी डराता है गोकुल पंडित का ये किरदार
बाइस्कोप में आज फिल्म दुश्मन की चर्चा की एक बड़ी वजह इस फिल्म में काजोल का किया दमदार अभिनय भी है। फिल्म में गोकुल पंडित इतना खूंखार इसीलिए दिखता है क्योंकि सोनिया उसके सामने एकदम निरीह लगती है। फिल्म दुश्मन की कहानी सोनिया और उसकी जुड़वा बहन नैना की है। नैना अपनी बहन की बलात्कार के बाद हुई हत्या कभी भूल नहीं पाती। और पुलिस नैना की हत्या में गोकुल पंडित का हाथ होने की बात साबित नहीं कर पाती। दोनों अपने अपने रास्ते बढ़ जाते हैं।
नैना की मुलाकात एक रिटायर्ड फौजी से होती है जो देख नहीं सकता। नैना उससे सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग लेती है। गोकुल पंडित फिर एक बार नैना का रास्ता काटता है। और, इस बार वह उसे घाट तक लाने का फैसला कर लेती है। वह उसके लिए पूरा जाल तैयार करती है और फंदे में उसका पैर आते ही डोरी खींच देती है। सोनिया और नैना के किरदारों के लिए काजोल और गोकुल पंडित के किरदार के लिए आशुतोष राणा दोनों को फिल्मफेयर पुरस्कारों में नामांकन मिला। लेकिन, पुरस्कार जीता आशुतोष राणा ने बेस्ट विलेन कैटेगरी में। इसके अगले साल भी आशुतोष राणा ने यही पुरस्कार फिर जीता फिल्म संघर्ष के लिए। निर्देशक इस फिल्म की भी तनूजा चंद्रा ही थीं।
विशेष फिल्म्स ने हिंदी सिनेमा को कलाकार तो तमाम दमदार दिए ही हैं, निर्देशक भी इस कंपनी से खूब निकले। तनूजा चंद्रा की मां कमाल की लेखक रही हैं। राज कपूर की फिल्म प्रेम रोग उन्होंने ही लिखी। तनूजा की बहन अनुपमा लंबे समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उनके भाई विक्रम चंद्रा के लिखे उपन्यास पर ही मशहूर सीरीज सैक्रेड गेम्स बनी है। दुश्मन का निर्देशक बनने का मौका मिलने से पहले तनूजा ने महेश भट्ट के सहायक के तौर पर लंबे समय से काम किया। तमन्ना और जख्म जैसी फिल्मों में उनके लेखन का असर भी दिखता है।
गौरतलब बात ये भी है कि तनूजा चंद्रा ने भट्ट कैंप के विरोधी खेमे यानी यशराज फिल्म्स में भी काम किया है। यश चोपड़ा की फिल्म दिल तो पागल है भी उन्होंने उनके साथ मिलकर लिखी है। तनूजा चंद्रा के सिनेमा में विदेशी फिल्मों का असर साफ दिखता है। विदेशी फिल्मों से सीन उठाकर हिंदी फिल्में बनाने वाले निर्देशकों की लंबी फेहरिस्त रही है लेकिन हिंदी सिनेमा के दर्शकों का वैश्वीकरण होने का सबसे ज्यादा खामियाजा भी इन्हीं निर्देशकों को उठाना पड़ा। दुश्मन फिल्म का निर्देशन बेजोड़ है। लेकिन, इस फिल्म में मौलिकता की कमी ने तनूजा के करियर को आगे चलकर काफी नुकसान पहुंचाया।
फिल्म दुश्मन अपनी कहानी की बजाय अपने कलाकारों के अभिनय और अपने संगीत के लिए ज्यादा याद की जाती है। फिल्म का एक गाना प्यार को हो जाने दो बहुत हिट हुआ। लता मंगेशकर ने इस गाने में कुमार शानू को शोहरत बख्शी तो फिल्म के ही एक और गाने आवाज दो हमको हम खो गए में उदित नारायण को भी उनके साथ गाने का मौका मिला। आनंद बक्षी के लिखे गीतों को उत्तम सिंह ने बहुत ही नफासत से कंपोज किया। जानकारी देने लायक बात यहां ये भी है कि उत्तम सिंह और जगदीश खन्ना ने मिलकर उत्तम-जगदीश के नाम से फिल्मों में संगीत देना शुरू किया था। मनोज कुमार के बेटे राजीव गोस्वामी की फिल्म पेंटर बाबू दोनों की बतौर संगीतकार पहली फिल्म थी। जगदीश के 1992 में निधन के बाद उत्तम सिंह ने अकेले म्यूजिक देना शुरू किया। फिल्म दिल तो पागल है में अपने संगीत की ताजगी का एहसास करा चुके उत्तम सिंह ने फिल्म दुश्मन में जगजीत सिंह की गाई गजल, चिट्ठी न कोई संदेस, जाने वो कौन सा देस, जहां तुम चले गए कंपोज करके जमाना जीत लिया।
फिल्म दुश्मन को बनाने से पहले इसकी निर्देशक तनूजा चंद्रा को तमाम पापड़ बेलने पड़े। ये उनकी पहली फिल्म थी तो इसमें मेजर सूरज सिंह राठौड़ के रोल के लिए उस वक्त कोई कलाकार तैयार नहीं हो रहा था। महेश भट्ट के फोन करने पर शाहरुख खान ने भी ये कहानी सुनी और आमिर खान ने भी। लेकिन, फिल्म में काम करने को तैयार हुए तो सिर्फ संजय दत्त। बॉबी देओल और अरबाज खान तक ने ये रोल करने से मना कर दिया था। अजय देवगन ने भी इस फिल्म की कहानी सुनी थी लेकिन उस समय उनका पूरा फोकस फिल्म जख्म पर था जिसके लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिला। जख्म की पटकथा लिखने में तनूजा चंद्रा ने महेश भट्ट की काफी मदद की। फिल्म दुश्मन की कास्टिंग पूरी करने में काफी वक्त लगा और इस दौरान इसके तमाम कलाकार बदलते रहे। मनोज बाजपेयी भी किसी वक्त इस कहानी के लिए साइन किए गए थे।
फिल्म में आशुतोष राणा को विलेन का किरदार मिलना उनके करियर की सबसे बड़ी किस्मत रही है, इस रोल के लिए उनसे पहले कम से कम तीन और कलाकारों का नाम पक्का हो चुका था। तब तक आशुतोष राणा टेलीविजन तो काफी कर रहे थे और फिल्मों में इक्का दुक्का रोल भी पा गए थे, लेकिन गोकुल पंडित जैसा किरदार मिलना उनके लिए टर्निंग प्वाइंट रहा। फिल्म दुश्मन की एक खास बात और। दरअसल फिल्म रिलीज के लिए तैयार हो रही थी और काजोल उन दिनों भारत में थी नहीं तो उनकी आवाज मशहूर डबिंग आर्टिस्ट मोना शेट्टी ने कई दृश्यों में डब की है, ये डबिंग इतनी कमाल की है कि कोई पकड़ नहीं पाया। जैसे कि कोई ये भी कभी पकड़ नहीं पाया कि फिल्म बीवी नंबर वन के कई दृश्यों में सलमान खान की आवाज सलमान खान की नहीं है। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल यानी 30 मई को बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।
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