बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन और अभिनेत्री राशि खन्ना अभिनीत वेब सीरीज 4 मार्च को ओटीटी प्लेटफॉर्म डिज्नी+हॉटस्टार पर रिलीज होने वाली है। इस साइकोलॉजिकल क्राइम ड्रामा सीरीज में अजय देवगन एक पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं। ब्रिटिश सीरीज लूथर पर आधारित इस सीरीज के हर एपीसोड में रुद्र एक नए अपराधी की तलाश करता नजर आएगा। सीरीज के ट्रेलर में अजय देवगन के अलावा एशा देओल, राशि खन्ना, अतुल कुलकर्णी और अश्विनी कलसेकर भी दमदार अभिनय करते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि हिंदी सिनेमा में दूसरी फिल्म करने वाली राशि खन्ना सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में कामयाब रहीं।
Raashi Khanna: 27 फिल्में करने के बाद भी राशि खन्ना को देना पड़ा 'रुद्र' के लिए ऑडिशन, कहा- "ऐसा लगा जैसे न्यूकमर..."
साउथ की फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं राशि खन्ना
30 नवंबर,1990 को जन्मी राशि खन्ना ने लेडी श्री राम कॉलेज से इंग्लिश में बीए ऑनर्स करने के बाद 23 साल की उम्र में अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। 2013 में आई फिल्म 'मद्रास कैफ' से एक्टिंश में डेब्यू करने वाली राशि खन्ना ने बैक-टू-बैक तमिल, तेलुगु और मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में काम करना शुरू किया। उन्हें तेलुगु फिल्म 'प्रति रोजू पंडगे' के लिए बेस्ट एक्ट्रेस, 'थोली प्रेमा' के लिए एंटरटेंनमेंट ऑफ द ईयर और 'साल की सबसे ग्लैमरस दिवा' का अवॉर्ड भी मिला। साउथ इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के बाद अब राशि खन्ना नौ साल बाद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कमबैक कर रही हैं। अमर उजाला ने अभिनेत्री राशि खन्ना से उनके अलग-अलग फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के अनुभव और रुद्र में उनकी भूमिका के बारे में बात की। पढ़िए...
सवाल: बच्चन में आप सिंगर बनना चाहती थीं। बड़े होने के बाद आपने आईएएस ऑफिसर बनकर देश की सेवा करने का सपना देखा। इसके बाद आपने विज्ञापन विभाग में बतौर कॉपी राइटर काम किया। और अब आप अभिनय की दुनिया में धमाल मचा रही हैं। सिंगर से लेकर अभिनेत्री बनने तक का सफर कैसे रहा? ये बदलाव क्यों आया?
जवाब: बचपन में सिंगर बनने का सपना जरूर देखा था, लेकिन मध्यम वर्गीय परिवार से होने की वजह से बहुत जल्दी इस बात का एहसास हो गया कि पढ़ाई करना कितना जरूरी है। बड़े होने के बाद मैं आईएएस बनने के लिए प्लानिंग करने लगी। लेकिन शायद मेरी किस्मत में अभिनेत्री बनना लिखा था। इसलिए कॉलेज के दिनों में ही मुझे कई अवसर मिलने लगे। मैंने भी पीछे मुड़कर नहीं देखा, जहां किस्तम ने दरवाजे खाेले, वहां चलती चली गई।
सवाल: आपने चार भाषाओं - तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिंदी में काम किया है। चारों फिल्म इंडस्ट्री में क्या फर्क आपको महसूस हुआ? क्या चीज अच्छी लगी और क्या बुरी लगी?
जवाब: फर्क केवल कल्चर और भाषा का है। बाकी चारों ही फिल्म इंडस्ट्री में बेहतरीन डायरेक्टर्स हैं, जो अच्छी फिल्म बनाना चाहते हैं। मंझे हुए कलाकार हैं, जो अच्छी अदाकारी करना चाहते हैं। अलग-अलग फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के लिए आपको उनके प्रति वफादार रहना पड़ता है। उनकी भाषा और कल्चर के साथ न्याय करना पड़ता है। और ऐसा करने के लिए आपको बहुत महनत करनी पड़ती है। मुझे भारतीय होने पर गर्व होता है। क्योंकि यही इकलौता देश है, जहां काम करने के लिए आपको इतनी वैरायटी मिल सकती है।
सवाल: आपने 2013 में फिल्म मद्रास कैफे से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इसके बाद आपने बैक-टू-बैक साउथ फिल्म इंडस्ट्री में फिल्में कीं। अब नौ साल बाद आप ओटीटी से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में आपसी कर रहीं हैं। इतना समय क्यों लगा हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कमबैक करने में?
जवाब: मेरा मानना है कि कलाकार के लिए कोई सीमा नहीं होनी चाहिए। कलाकार को केवल अपनी कला से मतलब होना चाहिए। मैंने भी केवल अपने अभिनय पर ध्यान केंद्रित किया और जहां से अच्छा ऑफर मिलते गया, वहां का रुख करते चली गई। मेरे ख्याल से अब वह समय आ गया है, जब फिल्म इंडस्ट्री को भाषा के आधार पर बांटना नहीं बंद कर देना चाहिए। इसे भारतीय फिल्म इंडस्ट्री कहना बेहतर होगा।